Tuesday, June 23, 2026

लखनऊ अग्निकांड: सीएम योगी की सख्ती, SIT गठन से लेकर गिरफ्तारियों तक तेज हुई कार्रवाई

लखनऊ अग्निकांड: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया।

हादसे में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात तक हालात की लगातार निगरानी करते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ में चल रहे अपने सभी कार्यक्रम रद्द किए और सीधे राजधानी लखनऊ पहुँचे।

उनके निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई गई, घायलों के इलाज की विशेष व्यवस्था की गई।

कुछ ही घंटों के भीतर आरोपितों की गिरफ्तारी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई।

योगी ने घायलों से की मुलाकात

लखनऊ पहुँचने के बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले अलीगंज स्थित घटनास्थल पर पहुँचे।

उन्होंने मौके पर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मलबे में किसी के फंसे होने की आशंका को देखते हुए बचाव कार्य पूरी सतर्कता के साथ जारी रखा जाए।

इसके बाद वह सीधे किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पहुँचे, जहां उन्होंने भर्ती घायलों से मुलाकात की और उनके परिजनों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

आर्थिक सहायता का ऐलान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

साथ ही घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का भी ऐलान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और किसी भी प्रकार की मदद में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।

जांच के लिए एसआईटी का गठन

घटनास्थल और अस्पताल का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पाँच कालीदास मार्ग पर देर रात उच्च स्तरीय बैठक बुलाई।

बैठक में शासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि इस हादसे के लिए जो भी व्यक्ति या अधिकारी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मामले की विस्तृत जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया।

एसआईटी में पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है।

जांच दल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

चार आरोपी गिरफ्तार

सरकार के मुताबिक एसआईटी यह पता लगाएगी कि भवन में फायर सेफ्टी मानकों का पालन किया गया था या नहीं, संबंधित विभागों ने अपने दायित्वों का निर्वहन किया या नहीं और किन अधिकारियों अथवा व्यक्तियों की लापरवाही के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ।

इसके साथ ही भवन निर्माण, अनुमति और निरीक्षण से जुड़े सभी दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।

इस मामले में थाना अलीगंज में छह लोगों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 110, 105, 125, 3(5) तथा उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया है।

गिरफ्तार आरोपितों में रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषॉक कृष्णा जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।

अन्य आरोपितों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

2016 में दिया था ध्वस्तीकरण का आदेश

प्रारंभिक जांच में विभिन्न विभागों की लापरवाही सामने आने पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इनमें बिजली विभाग के एक्सईएन कलेक्शन गौरव कुमार, इंदिरा नगर फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेन्द्र कुमार सिंह,

लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि यदि संबंधित विभाग समय रहते भवन का निरीक्षण करते और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करते तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि अलीगंज सेक्टर-डी के उषा मेहता मार्ग स्थित इस तीन मंजिला भवन का आवासीय नक्शा वर्ष 2014 में स्वीकृत हुआ था।

हालांकि वर्ष 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर मामला दर्ज किया था और 10 मई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश भी जारी किया गया था।

बाद में भवन मालिकों की आपत्तियों के बाद यह आदेश वापस ले लिया गया।

अब एसआईटी इस पूरे मामले की दोबारा जांच करेगी कि आखिर उस समय क्या परिस्थितियां थीं और क्या नियमों का पूरी तरह पालन किया गया था।

1980 में आवंटित हुआ था भवन

अधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार यह भवन वर्ष 1980 में आवंटित हुआ था और समय-समय पर इसके मालिक बदले गए।

वर्ष 2005 और 2013 में स्वामित्व परिवर्तन के बाद 7 अगस्त 2014 को इसे नए मालिकों के नाम म्यूटेट किया गया था।

अब जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि भवन का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था और क्या उसके अनुरूप सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

सोमवार 22 जून 2026 को दोपहर करीब तीन बजे इस भवन में आग लगने की घटना हुई थी।

प्रारंभिक जांच में आग एसी डक्ट से शुरू होने और भवन में पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट न होने की आशंका जताई गई है।

हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

फिलहाल पूरे मामले पर सरकार की नजर बनी हुई है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article