Tuesday, May 26, 2026

केरल के मुनंबम विवाद ने पकड़ा तूल, वक्फ को दी जमीन, 600 हिंदू परिवार हुए बेघर

केरल के मुनंबम विवाद ने पकड़ा तूल: केरल के मुनंबम भूमि विवाद ने एक बार फिर राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।

कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार बनने के बाद वक्फ बोर्ड द्वारा

विवादित 404 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार के ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है।

इस कदम के बाद इलाके में रहने वाले सैकड़ों हिंदू और ईसाई परिवारों के बीच चिंता और नाराजगी का माहौल बन गया है।

वक्फ बोर्ड ने खुद को बताया ‘मुतवल्ली’

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वक्फ बोर्ड ने डिजिटल रजिस्ट्रेशन के जरिए खुद को इस पूरी संपत्ति का ‘मुतवल्ली’ यानी प्रबंधन और नियंत्रण करने वाला अधिकारिक पक्ष घोषित कर दिया है।

यह जमीन लंबे समय से विवादों में रही है और यहां कई पीढ़ियों से स्थानीय परिवार रहते आ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कदम से उनकी जमीन और घरों पर संकट खड़ा हो गया है।

उनका आरोप है कि सरकार और वक्फ बोर्ड ने बिना पारदर्शिता के यह प्रक्रिया पूरी की है।

कांग्रेस सरकार पर लगे गंभीर आरोप

भारतीय जनता पार्टी और कई स्थानीय संगठनों ने कांग्रेस सरकार पर मुस्लिम लीग को खुश करने का आरोप लगाया है।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि सरकार बनने के बाद मुनंबम विवाद का जल्दी समाधान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कथित तौर पर कहा था कि वक्फ एक्ट की धारा 97 का इस्तेमाल कर विवाद को कुछ ही मिनटों में सुलझाया जा सकता है

लेकिन अब विपक्ष का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस अपने वादों से पीछे हट गई।

स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश

मुनंबम भूमि संरक्षण समिति के संयोजक जोसेफ बेनी ने वक्फ बोर्ड के रजिस्ट्रेशन को गैर-कानूनी बताया है।

उनका कहना है कि तय समय से पहले ही दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कानूनी विवाद को और जटिल बनाने की कोशिश है।

इलाके में रहने वाले परिवार अब सरकार के खिलाफ खुलकर प्रदर्शन कर रहे हैं और वक्फ बोर्ड को तुरंत भंग करने की मांग उठा रहे हैं।

413 दिनों से जारी आंदोलन

मुनंबम के लोग अपनी जमीन बचाने के लिए पिछले 413 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इलाके में रिले भूख हड़ताल और लगातार प्रदर्शन जारी हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं और अचानक उन्हें बेदखल करने की कोशिश की जा रही है।

यह विवाद साल 2019 में उस समय शुरू हुआ था जब वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि यह जमीन 1950 में मोहम्मद सिद्दीकी सैत द्वारा फारूक कॉलेज को दान दी गई थी।

इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव हुए और वर्ष 2021 में कुछ पीड़ित परिवारों से जमीन कर लेना भी बंद कर दिया गया।

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

अक्टूबर 2025 में केरल हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के दावे पर सवाल उठाते हुए इसे “जमीन हड़पने की तरकीब” बताया था।

अदालत ने बोर्ड के दावे को स्वीकार नहीं किया था। हालांकि बाद में वक्फ समर्थकों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा रखी है और मामला न्यायिक प्रक्रिया में है।

इसी बीच वक्फ बोर्ड द्वारा उम्मीद पोर्टल पर संपत्ति का डिजिटल पंजीकरण किए जाने से विवाद और गहरा गया है।

राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा मुनंबम विवाद

मुनंबम भूमि विवाद अब केवल कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह केरल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

विपक्ष लगातार कांग्रेस सरकार को घेर रहा है, जबकि स्थानीय लोग अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।

आने वाले दिनों में यह विवाद राज्य की राजनीति और अदालत दोनों जगहों पर और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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