Jharkhand JPSC Protest 2026: झारखंड में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक और OMR शीट में छेड़छाड़ जैसे आरोपों के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
आंदोलन अब भूख हड़ताल तक पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इसे और तेज करने की तैयारी की जा रही है।
जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सरकार पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार पूरे मामले पर खुलकर बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है और कानून के दायरे में रहकर युवाओं के साथ न्याय किया जाएगा।
आखिर क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं JPSC अभ्यर्थी?
विवाद की शुरुआत 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद हुई। रिजल्ट सामने आते ही कई अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हैं तो ऐसे परिणामों पर भरोसा करना मुश्किल है।
इसी वजह से वे परीक्षा रद्द करने और नए सिरे से निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाने की मांग कर रहे हैं।
OMR शीट और पेपर लीक को लेकर क्या हैं आरोप?
छात्रों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों की OMR शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए।
दावा किया गया कि कुछ ऐसे उम्मीदवार भी प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए जिनके अंक संभावित कट-ऑफ से कम बताए जा रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं दावों के बाद छात्रों का गुस्सा बढ़ गया और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती तो इस तरह के सवाल खड़े ही नहीं होते।
कट-ऑफ जारी नहीं होने पर भी उठे सवाल
छात्रों की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि JPSC ने परिणाम जारी करते समय कैटेगरी वाइज कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए।
उनका कहना है कि कट-ऑफ जारी नहीं होने से यह पता लगाना मुश्किल हो गया कि किस आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया गया।
इसके अलावा छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जारी की गई मेरिट लिस्ट पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
छात्र क्यों कर रहे हैं CBI और ED जांच की मांग?
राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी है, लेकिन आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि इतने बड़े भर्ती विवाद की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांग है कि इस मामले की जांच CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए।
उनका यह भी कहना है कि पिछले सात वर्षों में हुई भर्ती परीक्षाओं की भी जांच होनी चाहिए, ताकि यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आ सके।
देवेंद्र नाथ महतो ने शुरू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
आंदोलन को नई दिशा देते हुए झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़े छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
उनके साथ कई अन्य अभ्यर्थी भी भूख हड़ताल पर बैठ चुके हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द नहीं की जाती और CBI जांच के आदेश नहीं दिए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
विधानसभा मार्च की भी तैयारी
आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए कई छात्र संगठनों ने चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित किए हैं।
इसके तहत रांची में प्रदर्शन जारी रखने के साथ-साथ झारखंड विधानसभा तक मार्च निकालने की भी योजना बनाई गई है।
इस आंदोलन में केवल छात्र संगठन ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में स्वतंत्र अभ्यर्थी भी शामिल हैं। कई सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के जरिए धरनास्थल पर बैठे छात्रों के लिए भोजन और जरूरी सामान भेज रहे हैं।
राष्ट्रीय छात्र संगठनों ने भी जताया समर्थन
रांची में चल रहे इस आंदोलन की गूंज अब दूसरे राज्यों तक भी पहुंच गई है। छात्र युवा परिषद (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके,
जो पहले NEET पेपर लीक मामले में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं, उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत की।
उन्होंने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया कि उनकी संस्था निष्पक्ष भर्ती और पारदर्शी जांच की मांग के साथ उनके समर्थन में खड़ी है।
हालांकि स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंदोलन में शामिल कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि केवल ऑनलाइन समर्थन काफी नहीं है।
उनका मानना है कि यदि संगठन के प्रमुख नेता धरनास्थल पर पहुंचकर छात्रों के साथ खड़े हों तो इससे आंदोलन को और मजबूती मिलेगी।
सरकार और पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की?
विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने कई अहम कदम उठाए हैं।
पूर्व JPSC चेयरपर्सन एल. खियांगते ने बढ़ते दबाव के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं CID की टीम ने रांची, पलामू और हजारीबाग सहित कई जिलों में छापेमारी की।
जांच के दौरान पूर्व JPSC अधिकारियों और परीक्षा से जुड़ी बाहरी एजेंसियों के कुछ प्रतिनिधियों समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तार भी किया गया।
जांच एजेंसियां पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
रामगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं के हितों के साथ पूरी तरह खड़ी है।
उन्होंने कहा कि संविधान और कानून के दायरे में रहकर जो भी कदम जरूरी होंगे, सरकार उन्हें उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और युवाओं के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि CID की टीम लगातार जांच कर रही है और दिन-रात इस मामले पर काम चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने छात्रों से अपील की कि वे जांच पूरी होने तक धैर्य रखें और जांच एजेंसी को अपना काम करने दें।
छात्र अभी भी अपनी मांगों पर अड़े
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
उनका कहना है कि जब तक CBI जांच के आदेश नहीं दिए जाते और 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का फैसला नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारी छात्रों का मानना है कि केवल इस एक परीक्षा की जांच काफी नहीं होगी।
वे चाहते हैं कि राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा पर इस तरह के सवाल न उठें।

