Gen Z vs Millennials: आज के समय में हेल्थ और फिटनेस केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
सोशल मीडिया पर हर दिन वर्कआउट, हेल्दी डाइट, योग, मेडिटेशन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी लाखों लोगों तक पहुंच रही है।
खासकर Gen Z को ऐसी पीढ़ी माना जाता है जो अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य के बारे में जानकारी रखना और वास्तव में स्वस्थ जीवन जीना दो अलग-अलग बातें हैं।
नई रिपोर्ट्स भी यही संकेत देती हैं कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद दोनों पीढ़ियों के सामने अलग-अलग स्वास्थ्य चुनौतियां मौजूद हैं।
हेल्थ को लेकर बदली सोच
Millennials के दौर में फिटनेस का मुख्य उद्देश्य वजन कम करना और आकर्षक दिखना माना जाता था। जिम जाना, डाइटिंग करना और योग को अपनाना उस समय तेजी से लोकप्रिय हुआ।
वहीं Gen Z फिटनेस को केवल वजन तक सीमित नहीं मानती। यह पीढ़ी मसल्स स्ट्रेंथ, बॉडी कंपोजिशन, फ्लेक्सिबिलिटी, स्टैमिना और ओवरऑल वेलनेस पर भी ध्यान देती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव सकारात्मक है क्योंकि अच्छी सेहत केवल पतले शरीर से नहीं, बल्कि शरीर की कार्यक्षमता और संतुलन से भी जुड़ी होती है।
मेंटल हेल्थ को मिल रही प्राथमिकता
Gen Z की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करती है। तनाव, एंग्जायटी, बर्नआउट और डिप्रेशन जैसे विषय अब पहले की तुलना में ज्यादा खुलेपन के साथ चर्चा का हिस्सा बन चुके हैं।
जरूरत पड़ने पर थेरेपी या काउंसलिंग लेने में भी यह पीढ़ी कम झिझक महसूस करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को स्वीकार करना और समय पर मदद लेना लंबे समय तक बेहतर जीवन के लिए जरूरी कदम है।
वहीं Millennials ने भी मेडिटेशन, योग और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी आदतों को बढ़ावा देकर इस बदलाव की मजबूत नींव रखी थी।
कम उम्र में बढ़ रही लाइफस्टाइल बीमारियां
विशेषज्ञों के अनुसार, आज कम उम्र में ही कई लाइफस्टाइल डिजीज तेजी से बढ़ रही हैं।
हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और हृदय संबंधी समस्याएं अब 30 से 40 वर्ष की उम्र में भी देखने को मिल रही हैं।
इसके पीछे लंबे समय तक बैठकर काम करना, अनियमित खानपान, जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और पर्याप्त नींद की कमी जैसी आदतों को जिम्मेदार माना जाता है।
महिलाओं में पीसीओएस जैसी समस्याएं भी पहले की तुलना में अधिक सामने आ रही हैं, जो बदलती जीवनशैली से जुड़ी मानी जाती हैं।
डिजिटल लाइफस्टाइल की नई चुनौती
तकनीक ने जीवन को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। Gen Z का बड़ा हिस्सा दिन का काफी समय स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर बिताता है।
लगातार स्क्रीन देखना, सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करना, हर समय ऑनलाइन बने रहना और कुछ छूट जाने का डर यानी FOMO मानसिक दबाव बढ़ा सकता है।
इसके अलावा देर रात तक स्क्रीन इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
दूसरी ओर Millennials भी डिजिटल दुनिया का हिस्सा हैं, लेकिन वे तनाव कम करने के लिए परिवार, दोस्तों या अपने पुराने शौकों का सहारा अपेक्षाकृत अधिक लेते हैं।
जागरूकता के साथ संतुलन भी जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि हेल्थ से जुड़ी जानकारी होना अच्छी बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा हेल्थ कॉन्शियस होना भी कई बार तनाव की वजह बन सकता है।
आज कई युवा हर समय परफेक्ट डाइट, फिटनेस रूटीन और हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखने के दबाव में रहते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फिटनेस का मतलब केवल कठिन एक्सरसाइज या सख्त डाइट नहीं है।
नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें ही लंबे समय तक स्वस्थ जीवन का आधार बनती हैं।
इसलिए किसी भी पीढ़ी की असली ताकत उसकी जागरूकता के साथ-साथ उन आदतों में छिपी होती है, जिन्हें वह रोजमर्रा की जिंदगी में लगातार अपनाती है।

