Chandauli Encounter: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में 24-26 घंटे तक दहशत का दूसरा नाम बने एक कथित ‘साइको किलर’ ने चलती ट्रेनों और अस्पताल में घुसकर तीन सनसनीखेज हत्याओं को अंजाम दिया। रिटायर्ड फौजी गुरप्रीत सिंह उर्फ वीरेंद्र ने जिस तरह से लोगों को निशाना बनाया, उसने पूरे इलाके में भय और सनसनी फैला दी। आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और बाद में सीन रीक्रिएशन के दौरान हुई मुठभेड़ में वह मारा गया।
कौन था गुरप्रीत सिंह?
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान पंजाब के अमृतसर निवासी 45 वर्षीय गुरप्रीत सिंह उर्फ वीरेंद्र के रूप में हुई।
वह भारतीय सेना से करीब 2020-21 में रिटायर हुआ था। सेना छोड़ने के बाद वह सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा था और बिहार के आरा में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी कर चुका था।
हालांकि, शराब की लत, मानसिक अस्थिरता और नौकरी छूटने के बाद उसका व्यवहार हिंसक होता चला गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि वह अक्सर शराब पीने के बाद अपना मानसिक संतुलन खो देता था और लोगों से झगड़ा करता था।
शुरुआती पूछताछ में उसने खुद को “मन का राजा” बताते हुए कहा कि शराब पीने के बाद उसे होश नहीं रहता और जो मन में आता है, वही करता है।
पहली वारदात: पैसेंजर ट्रेन में युवक की हत्या
गुरप्रीत ने पहली हत्या रविवार 10 मई की सुबह करीब 7 बजे की। वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में सवार हुआ था।
ट्रेन जब चंदौली के कचमन स्टेशन के पास पहुंची, तभी किसी बात को लेकर उसकी यात्री मंगरू से कहासुनी हो गई।
गुस्से में गुरप्रीत ने मंगरू की कनपटी पर गोली मार दी। गोली लगते ही ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद उसने शव को ट्रेन से नीचे फेंक दिया और ट्रेन की रफ्तार धीमी होते ही फरार हो गया।
मंगरू गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र का रहने वाला था और काम की तलाश में बाहर गया हुआ था।
दूसरी हत्या: जम्मूतवी एक्सप्रेस में फिर वही तरीका
Chandauli Encounter: पहली हत्या के बाद गुरप्रीत करीब 9 किलोमीटर दूर व्यासनगर पहुंचा और वहां से जम्मूतवी एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हो गया। रविवार देर रात करीब 2 बजे उसने दूसरी वारदात को अंजाम दिया।
बिहार के गया निवासी दिनेश साहू ट्रेन के बाथरूम से लौट रहे थे। जैसे ही वे बाहर निकले, गुरप्रीत ने उनकी कनपटी पर गोली मार दी।
गोली की आवाज सुनते ही यात्री डर गए और ट्रेन में हड़कंप मच गया। ट्रेन की रफ्तार कम होते ही आरोपी मौके से कूदकर भाग निकला।
दो अलग-अलग ट्रेनों में एक जैसे तरीके से हुई हत्या ने पुलिस को यह समझा दिया कि दोनों वारदातों के पीछे एक ही व्यक्ति हो सकता है।
तीसरी और सबसे खौफनाक वारदात: अस्पताल में घुसकर हत्या
सोमवार सुबह गुरप्रीत चंदौली के अलीनगर स्थित जीवक अस्पताल पहुंचा। उसने इलाज कराने के बहाने अपना पर्चा बनवाया और फर्जी नाम ‘वीरेंद्र’ लिखवाया। अस्पताल में उसका बीपी और पल्स भी चेक किया गया।
इसके बाद वह सीधे उस वार्ड में पहुंचा, जहां बिहार के भभुआ जिले की रहने वाली 55 वर्षीय लक्ष्मीना देवी भर्ती थीं।
आरोपी ने महिला के सिर पर पिस्टल सटाई और कनपटी पर गोली मार दी। अस्पताल में अचानक हुई फायरिंग से अफरा-तफरी मच गई।
हत्या के बाद वह भागने लगा, लेकिन बाहर मौजूद लोगों ने साहस दिखाया। एक ऑटो चालक विनोद दुबे ने आरोपी को पकड़ लिया और उससे पिस्टल छीन ली। इसके बाद भीड़ ने उसकी जमकर पिटाई कर दी और पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस को कैसे हुआ शक?
तीनों वारदातों में हत्या का तरीका बिल्कुल एक जैसा था। हर बार आरोपी ने पीड़ित की कनपटी पर गोली मारी। यही पैटर्न पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बना।
इसके अलावा पुलिस को चश्मदीदों से आरोपी के हुलिए की जानकारी मिली। एक यात्री ने बताया कि आरोपी ने सिर पर भगवा गमछा बांध रखा था और उसका कद करीब 6 फीट था। अस्पताल में पकड़े गए आरोपी का हुलिया उसी विवरण से मेल खा गया।
सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और लोकेशन हिस्ट्री के आधार पर पुलिस ने तीनों हत्याओं में उसकी संलिप्तता की पुष्टि कर दी।
पूछताछ में कबूले तीनों कत्ल
पुलिस हिरासत में गुरप्रीत ने तीनों हत्याओं की बात कबूल कर ली। पूछताछ के दौरान उसने कहा कि वह शराब पीने के बाद खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाता था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने किसी निजी दुश्मनी में नहीं बल्कि पूरी तरह रैंडम तरीके से लोगों को निशाना बनाया। यही वजह थी कि पुलिस उसे ‘साइको किलर’ मानकर जांच कर रही थी।
सीन रीक्रिएशन के दौरान एनकाउंटर
सोमवार देर रात पुलिस आरोपी को घटनास्थलों पर लेकर गई थी, ताकि सीन रीक्रिएशन कराया जा सके। इसी दौरान दरियापुर रेलवे लाइन के पास आरोपी ने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीन ली और भागने की कोशिश की।
पुलिस का कहना है कि गुरप्रीत ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। मुठभेड़ में गुरप्रीत के सिर और सीने में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस एनकाउंटर में जीआरपी के एक हेड कांस्टेबल समेत दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने आरोपी के पास से रिवॉल्वर, कारतूस और एक कटी हुई डीबीबीएल गन बरामद करने का दावा किया है।
परिवार और मानसिक स्थिति पर उठे सवाल
गुरप्रीत सिंह पंजाब के तरनतारन जिले के एक गांव का रहने वाला था। उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नौकरी छूटने और शराब की लत ने उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया।
अस्पताल के डॉक्टरों ने भी बताया कि उसका बीपी सामान्य था, लेकिन पल्स काफी अधिक थी, जो एंग्जायटी डिसऑर्डर या अत्यधिक तनाव की स्थिति की ओर इशारा करती है।
हालांकि, उसकी मानसिक बीमारी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
24-26 घंटे तक दहशत में रहा चंदौली
Chandauli Encounter: लगातार तीन हत्याओं ने चंदौली, वाराणसी और आसपास के इलाकों में दहशत फैला दी थी। ट्रेन यात्रियों में डर का माहौल था, वहीं अस्पताल में हुई हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।
हालांकि, आरोपी की गिरफ्तारी और बाद में हुए एनकाउंटर के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। चंदौली पुलिस का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो आरोपी और भी लोगों को निशाना बना सकता था।
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