मार्कण्डेय काटजू
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हाथों तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कण्डेय काटजू ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला है।
काटजू ने कहा कि चुनावी पराजय के बाद ममता बनर्जी ने राज्य की सभी गैर भाजपा पार्टियों से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है। हालांकि कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि ममता की अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी उनके खिलाफ बगावत की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
एकता का आधार क्या होगा
मार्कण्डेय काटजू ने सवाल उठाया कि अगर अन्य विपक्षी दलों ने ममता बनर्जी के आह्वान को स्वीकार भी कर लिया होता तो वे किस मुद्दे पर एकजुट हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि एकमात्र मुद्दा धर्मनिरपेक्षता है लेकिन यह केवल मुस्लिम वोटों को हासिल करने के लिए था। इन दलों की धर्मनिरपेक्षता के प्रति कोई वास्तविक प्रतिबद्धता कभी नहीं रही है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत ऐतिहासिक
काटजू का मानना है कि पश्चिम बंगाल में हिंदू समर्थक भारतीय जनता पार्टी की व्यापक जीत आधुनिक भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है। यह राज्य लंबे समय तक धर्मनिरपेक्षता का गढ़ माना जाता था।
यह जीत भारत के संपूर्ण भगवाकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम को समझने के लिए अतीत में गहराई से झांकना जरूरी है।
विभाजन और द्विराष्ट्र सिद्धांत की भूमिका
मार्कण्डेय काटजू की राय में यह विकास वर्ष 1947 में ब्रिटिश शासकों द्वारा द्विराष्ट्र सिद्धांत के आधार पर भारत के विभाजन का अपरिहार्य परिणाम था। द्विराष्ट्र सिद्धांत यह मानता था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग राष्ट्र हैं जो कभी शांतिपूर्वक एक साथ नहीं रह सकते।
यद्यपि इस सिद्धांत को औपचारिक रूप से मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना ने 1940 के लाहौर प्रस्ताव में पेश किया था। जिन्ना ने नियमित और निरंतर रूप से इस सिद्धांत की वकालत की थी।
कांग्रेस नेताओं की सहमति
काटजू ने कहा कि अंततः कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने विभाजन पर सहमति जताई और भारत का बंटवारा हो गया। चूंकि 1947 में भारत के विभाजन का आधार द्विराष्ट्र सिद्धांत था और गांधी तथा नेहरू जैसे कांग्रेसी नेताओं ने भी अंततः भारत के विभाजन पर सहमति जताई।
पाकिस्तान को इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया गया तो तार्किक रूप से यह अनुसरण करता है कि 80 प्रतिशत हिंदू आबादी वाले भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था।
भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करना
मार्कण्डेय काटजू ने कहा कि ऐसा नहीं किया गया और भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया गया। निस्संदेह नेहरू और कांग्रेस पार्टी के कुछ अन्य नेता वास्तव में धर्मनिरपेक्ष थे लेकिन कांग्रेसियों का विशाल बहुमत सांप्रदायिक था।
उनकी धर्मनिरपेक्षता केवल सतही थी और केवल मुस्लिम वोट हासिल करने का एक उपकरण थी। इसके प्रति किसी वास्तविक विश्वास के कारण नहीं था। कांग्रेस शासन के दौर में भी मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार और भेदभाव जारी रहा।
सच्चर समिति रिपोर्ट का खुलासा
काटजू ने कहा कि वर्ष 2006 की सच्चर समिति रिपोर्ट ने इसका संकेत दिया था। हालांकि यह अत्याचार छिटपुट और अक्सर गुप्त था और कुछ हद तक नियंत्रण में रखा गया था।
कांग्रेस को मुस्लिम वोट बैंक खोने का डर था इसलिए वह सतर्क रहती थी। तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों द्वारा इस दिखावे को लंबे समय तक भारत में जारी रखा गया। इन पार्टियों ने मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपनाई।
राजीव गांधी और शाहबानो मामला
मार्कण्डेय काटजू ने राजीव गांधी द्वारा संसद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के प्रगतिशील और मानवीय शाहबानो फैसले को निरस्त करने का उदाहरण दिया। यह फैसला तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए गुजारा भत्ता प्रदान करता था।
कई मुसलमानों ने विरोध किया कि यह फैसला शरिया कानून के खिलाफ है। राजीव गांधी को मुस्लिम वोट बैंक खोने का डर था इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया।
ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टीकरण
काटजू ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की 28 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के वोटों पर नजर रखते हुए निर्लज्जता से मुस्लिम तुष्टीकरण का अभ्यास किया।
यह दिखावा हमेशा के लिए जारी नहीं रह सकता था। भारत के 80 प्रतिशत लोग हिंदू हैं और वे तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों द्वारा मुस्लिम तुष्टीकरण से आक्रोशित थे। परिणामस्वरूप हिंदू तेजी से भाजपा की ओर आकर्षित होते गए।
राम जन्मभूमि आंदोलन की भूमिका
मार्कण्डेय काटजू ने कहा कि यह प्रक्रिया भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा 1990 में शुरू किए गए राम जन्मभूमि आंदोलन से तेज हुई। यह आंदोलन दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस में परिणत हुआ।
अंततः इसने 2014 में भाजपा शासित केंद्र सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। तब से भाजपा अपने सहयोगियों के साथ शासन कर रही है।
भाजपा का राज्यों में विस्तार
काटजू ने कहा कि हाल के दिनों में भारत में दक्षिण को छोड़कर एक के बाद एक राज्य भाजपा या भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के अधीन आ गया है।
वर्तमान में 21 भारतीय राज्य या केंद्र शासित प्रदेश भाजपा या एनडीए शासन के अधीन हैं। अब मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार जो पहले कांग्रेस शासन के दौर में केवल छिटपुट और अक्सर गुप्त थे।
वे खुले, निरंतर और उग्र हो गए हैं क्योंकि भाजपा मुस्लिम वोटों पर निर्भर नहीं है। न तो उन्हें चाहती है और न ही हासिल करती है।
दक्षिण भारत में भाजपा की रणनीति
मार्कण्डेय काटजू ने बताया कि दक्षिण में भाजपा ने कर्नाटक राज्य में गहरी पैठ बनाई जहां उसने एक समय अपनी सरकार भी बनाई।
अब भाजपा का लक्ष्य दक्षिणी राज्यों में भी सत्ता हासिल करना होगा। ये राज्य भी भारी हिंदू बहुमत वाले हैं लेकिन अब तक भाजपा की वहां केवल सीमांत उपस्थिति रही है।
भारत का भगवाकरण अपरिहार्य
काटजू ने कहा कि इन रुझानों को देखते हुए ऐसा लगता है कि एक दशक या उससे कम समय में भारत का अधिकांश हिस्सा बड़े पैमाने पर भगवाकृत हो जाएगा।
भारत एक वास्तविक हिंदू राष्ट्र बन जाएगा भले ही यह अपने संविधान के तहत कानूनी रूप से धर्मनिरपेक्ष राज्य बना रहे। यह प्रक्रिया अब रुकने वाली नहीं है।

