NEET UG 2026: देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा, NEET UG 2026, विवादों के घेरे में आने के बाद आधिकारिक तौर पर रद्द कर दी गई है।
3 मई 2026 को जिस उम्मीद के साथ 25 लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे थे, वह उम्मीद अब ‘पेपर लीक’ और ‘धांधली‘ के आरोपों की भेंट चढ़ गई है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पारदर्शिता का हवाला देते हुए परीक्षा को अमान्य घोषित कर दिया है और अब इस पूरे मामले की कमान देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI को सौंप दी गई है।
क्या है पूरा मामला? कैसे हुआ खुलासा?
NEET UG 2026: इस विवाद की जड़ें उस वक्त गहरी हुईं जब राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों से ऐसी खबरें आईं कि परीक्षा से पहले ही एक ‘गेस पेपर‘ बाजार में घूम रहा था।
चौंकाने वाली बात यह रही कि जब असली परीक्षा हुई, तो 125 सवाल हूबहू उसी गेस पेपर से मेल खा गए।
इतनी बड़ी संख्या में सवालों का मिलना कोई संयोग नहीं हो सकता था।
मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव के बाद जब प्राथमिक जांच की गई, तो पाया गया कि परीक्षा की शुचिता (Integrity) भंग हो चुकी है।
इसके बाद NTA ने 10 मई और फिर 12 मई को स्थिति स्पष्ट करते हुए परीक्षा रद्द करने का कड़ा फैसला लिया।
प्रमुख बिंदु: जो हर छात्र और अभिभावक को जानना चाहिए
अगर आप भी इस परीक्षा में शामिल हुए थे, तो घबराएं नहीं। सरकार और NTA ने स्थिति को संभालने के लिए कुछ अहम घोषणाएं की हैं:
दोबारा होगी परीक्षा: 3 मई को हुई परीक्षा अब पूरी तरह रद्द है। इसकी नई तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी।
कोई एक्स्ट्रा फीस नहीं: छात्रों को फिर से परीक्षा देने के लिए कोई नया रजिस्ट्रेशन या अतिरिक्त फीस देने की जरूरत नहीं होगी।
एडमिट कार्ड: पुराने एडमिट कार्ड की जगह नए सिरे से एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे।
परीक्षा केंद्र: कोशिश की जाएगी कि छात्रों को वही परीक्षा केंद्र या शहर मिले जो उन्होंने पहले चुना था।
CBI जांच: पेपर लीक के पीछे कौन सा बड़ा गिरोह है, इसकी जड़ तक पहुंचने के लिए CBI ने अपनी जांच शुरू कर दी है।
उत्तर प्रदेश में थी सबसे ज्यादा संख्या
NEET UG 2026 में इस बार रिकॉर्ड तोड़ उपस्थिति दर्ज की गई थी।
देशभर के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 97 प्रतिशत छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे।
इसमें सबसे ज्यादा भागीदारी उत्तर प्रदेश के छात्रों की थी, जहाँ से 3.6 लाख युवाओं ने डॉक्टर बनने का सपना संजोकर परीक्षा दी थी।
राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी छात्रों का उत्साह चरम पर था, लेकिन अब इस फैसले से उनके बीच निराशा और रोष का माहौल है।
NTA का आधिकारिक रुख और पारदर्शिता का वादा
NTA ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को ‘निष्पक्ष, सुरक्षित और विश्वसनीय’ (Fair, Secure and Credible) बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
एजेंसी ने स्वीकार किया कि 8 मई को कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आई थीं, जिसके बाद मामले को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।
NTA ने छात्रों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक वेबसाइट पर आने वाली सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
आगे की राह: क्या होगा छात्रों का?
परीक्षा रद्द होना निश्चित रूप से मानसिक और आर्थिक रूप से थकाने वाला होता है।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि धांधली के साथ आगे बढ़ने से बेहतर है कि एक स्वच्छ परीक्षा कराई जाए ताकि केवल योग्य छात्र ही डॉक्टर बन सकें।
छात्रों के लिए कुछ सुझाव:
तैयारी जारी रखें: इसे एक ‘ब्रेक’ नहीं बल्कि ‘रिवीजन’ का मौका मानें।
आधिकारिक अपडेट देखें: NTA की वेबसाइट को नियमित रूप से चेक करते रहें।
हताश न हों: व्यवस्था को सुधारने के लिए यह कड़ा कदम जरूरी था ताकि आपकी मेहनत बेकार न जाए।
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