सड़कों पर नमाज़ की दो तस्वीरें: देशभर में त्योहारों के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों के बीच संतुलन बनाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है।
हाल ही में बकरीद के मौके पर देश के दो अलग-अलग राज्यों राजस्थान और पश्चिम बंगाल से आई तस्वीरों ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
एक तरफ जहां पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा दिखा और यातायात सुचारू रूप से चलता रहा, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान की राजधानी जयपुर में नेशनल हाईवे पर भारी जाम की स्थिति देखने को मिली।
इन दोनों वीडियो के सामने आने के बाद अब राजस्थान की भजनलाल सरकार की प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जयपुर की तस्वीर: नेशनल हाईवे पर लगा लंबा जाम
सड़कों पर नमाज़ की दो तस्वीरें: राजस्थान के जयपुर में ईदगाह के सामने से जो वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, वे काफी हैरान करने वाली हैं। ईदगाह के बाहर इतनी बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने के लिए उमड़े कि जगह कम पड़ गई और लोग नेशनल हाईवे (सड़क) पर बैठकर नमाज अदा करने लगे।
यातायात ठप: सड़क पर नमाज पढ़े जाने के कारण नेशनल हाईवे पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। देखते ही देखते पूरा हाईवे जाम हो गया और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सोशल मीडिया पर बहस तेज: इस घटना का वीडियो वायरल होते ही इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि हाईवे जैसे संवेदनशील और व्यस्त मार्ग को इस तरह ब्लॉक करने की अनुमति प्रशासन ने कैसे दे दी।
कोलकाता की तस्वीर: खाली सड़कें और सख्त प्रशासन
सड़कों पर नमाज़ की दो तस्वीरें: इसके बिल्कुल उलट तस्वीर पश्चिम बंगाल के कोलकाता से सामने आई है। कोलकाता के रेड रोड और आसपास के मुख्य इलाकों से जो वीडियो सामने आया है, उसमें सड़कें पूरी तरह खाली नजर आ रही हैं।
ट्रैफिक सुचारू: वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कोलकाता पुलिस मुस्तैदी से सड़कों पर तैनात है और वहां से गाड़ियां बिना किसी बाधा के गुजर रही हैं। किसी भी मुख्य मार्ग पर नमाज के नाम पर यातायात को रोकने की अनुमति नहीं दी गई।
विपक्ष का दबाव और प्रशासनिक सख्ती: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सहित अन्य विपक्षी नेताओं के लगातार दबाव और अदालती गाइडलाइंस के बाद, इस बार कोलकाता प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया। पुलिस ने पहले ही सुनिश्चित कर लिया था कि कोई भी धार्मिक गतिविधि सड़कों को जाम करके न की जाए।
क्या वाकई विफल साबित हुई राजस्थान की भजनलाल सरकार?
जयपुर और कोलकाता की इन दोनों तस्वीरों की तुलना ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार यह सवाल पूछ रहे हैं कि जो काम बंगाल जैसे राज्य में मुस्तैदी से कर लिया गया, वह राजस्थान की ‘डबल इंजन’ सरकार क्यों नहीं कर पाई?
प्रशासनिक ढीलापन: जयपुर पुलिस और प्रशासन को पहले से अंदाजा था कि ईदगाह में भीड़ बढ़ेगी, इसके बावजूद हाईवे पर ट्रैफिक को डायवर्ट करने या नमाजियों को सड़क पर आने से रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
कानून-व्यवस्था पर सवाल: कानून के मुताबिक किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) को इस तरह अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। ऐसे में भजनलाल सरकार की इस ‘लापरवाही’ को सोशल मीडिया पर उनकी प्रशासनिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है।
नेताओं की प्रतिक्रिया: कोलकाता में जहां विपक्ष के कड़े रुख के कारण ममता सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और सड़कों को खाली रखना पड़ा, वहीं जयपुर में भाजपा सरकार होने के बावजूद इस स्थिति को न संभाल पाना सरकार के इकबाल पर सवाल खड़े करता है।
सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की जरूरत
यह पूरा विवाद सिर्फ दो राज्यों की तुलना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े नागरिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट और देश की विभिन्न उच्च न्यायालयों ने समय-समय पर यह साफ किया है कि किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए सार्वजनिक सड़कों या रास्तों को इस तरह नहीं घेरा जा सकता जिससे आम जनता के मौलिक अधिकारों (आवाजाही की स्वतंत्रता) का हनन हो।
जयपुर की इस घटना ने साफ कर दिया है कि केवल कागजों पर नियम बना देने से कानून-व्यवस्था नहीं सुधरती, बल्कि उसके लिए कोलकाता जैसी जमीनी मुस्तैदी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। अब देखना यह है कि इस तीखी आलोचना के बाद क्या राजस्थान सरकार भविष्य में ऐसे आयोजनों को लेकर कोई सख्त कदम उठाती है या नहीं।
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