सालार मसूद दरगाह: उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित सालार मसूद दरगाह एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार विवाद का केंद्र दरगाह में आने वाले चढ़ावे, दान और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन द्वारा मांगे जाने के बावजूद कई वर्षों का आय-व्यय विवरण उपलब्ध नहीं कराया जा सका है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंकाएं तेज हो गई हैं।
चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन पर सवाल
देश की प्रमुख दरगाहों में शामिल सालार मसूद दरगाह में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। नकद दान के अलावा सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं भी चढ़ाई जाती हैं।
हाल के दिनों में दरगाह की आय और संपत्तियों के रखरखाव को लेकर कई सवाल उठे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से मिलने वाले चढ़ावे का समुचित लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया।
वहीं कुछ पुश्तैनी खादिमों ने दावा किया है कि दरगाह में चढ़ाई गई कीमती ज्वेलरी अब दिखाई नहीं दे रही है।
उनका कहना है कि यदि आभूषण सुरक्षित हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को लेकर कई सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
आरोप है कि दरगाह से जुड़ी बहुमूल्य संपत्तियों और चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
मांग की जा रही है कि पिछले लगभग दो दशकों के वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश सरकार के स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया गया है और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
रिकॉर्ड न मिलने से बढ़ी शंकाएं
जिलाधिकारी द्वारा दरगाह के वित्तीय रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान पिछले कई वर्षों के आय-व्यय और चढ़ावे से संबंधित रिकॉर्ड पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं हो सके।
यही कारण है कि वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका और गहरी हो गई है।
बताया जा रहा है कि मामले को लेकर संबंधित वक्फ संस्थाओं को भी पत्र भेजा गया है।
कर्मचारियों की नियुक्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी कुछ बिंदुओं पर जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पूर्व मंत्री का नाम भी चर्चा में
विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री यासर शाह का नाम भी चर्चाओं में आया है।
कुछ पक्षों ने आर्थिक मामलों में उनकी भूमिका की जांच की मांग की है।
हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी द्वारा इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इंतजामिया कमेटी ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर दरगाह इंतजामिया कमेटी ने सभी आरोपों को खारिज किया है।
कमेटी का कहना है कि सभी वित्तीय प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती हैं और चढ़ावे की गिनती सीसीटीवी निगरानी में की जाती है।
उनका दावा है कि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता बरती जाती है और किसी प्रकार की हेराफेरी की संभावना नहीं है।
पहले भी विवादों में रही है दरगाह
सालार मसूद दरगाह पिछले कुछ वर्षों में कई बार विवादों का केंद्र रही है। वर्ष 2025 में जेठ मेले और उर्स के आयोजन को लेकर प्रशासनिक अनुमति का मामला चर्चा में रहा था।
वहीं जून 2026 में दरगाह परिसर के ऐतिहासिक और पुरातात्विक पहलुओं की जांच को लेकर सर्वेक्षण की मांग ने भी बहस को जन्म दिया।
फिलहाल वित्तीय रिकॉर्ड और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर दरगाह को सुर्खियों में ला दिया है।
अब सभी की नजरें प्रशासनिक जांच और आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

