अमेरिका-ईरान वार्ता: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता को लेकर एक अहम मोड़ सामने आया है।
खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान की एक प्रमुख शर्त मान ली है, जिससे दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका कतर और अन्य अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जमा ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने पर सहमत हो गया है।
इस फैसले को ईरान की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है, जो बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
यह जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार, खासकर तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र पर अपने नियंत्रण और युद्ध के दौरान हुए नुकसान के मुआवजे की मांग करता रहा है।
शांति वार्ता को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज
इस बीच दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में मौजूद हैं, जहां शांति वार्ता को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
अमेरिका की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं।
उनके विमान पाकिस्तान पहुंच चुके हैं, जहां उनका स्वागत पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार ने किया।
दूसरी ओर ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी पूरी तैयारी के साथ बातचीत में शामिल होने के लिए पहुंच चुका है।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराकची कर रहे हैं।
दोनों नेता पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर बातचीत की रूपरेखा तय करने की योजना बना रहे हैं।
हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष
यह बातचीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति के बाद से यह दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तर की सीधी वार्ता हो सकती है।
इससे पहले 2015 में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसे बाद में ट्रंप प्रशासन ने 2018 में समाप्त कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव बढ़ गया था।
हालांकि, बातचीत से पहले ईरान ने कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें प्रतिबंध हटाना और क्षेत्रीय संघर्षों पर स्पष्ट रुख शामिल है। ईरान ने खासतौर पर लेबनान की स्थिति और वहां जारी संघर्ष को भी मुद्दा बनाया है।
इस संदर्भ में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का भी जिक्र किया गया है, जिसमें अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है।
लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई
अमेरिका और इजरायल ने स्पष्ट किया है लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई को इस संभावित समझौते का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि ईरान के पास बातचीत के अलावा कोई ठोस विकल्प नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक जलमार्गों के सहारे दबाव बनाने की रणनीति ज्यादा समय तक नहीं चल सकती।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता पर टिकी हुई है। अगर दोनों देश अपनी शर्तों पर सहमत हो जाते हैं, तो यह न सिर्फ उनके रिश्तों में सुधार लाएगा, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।

