योगी सरकार का बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
राज्य सरकार अब तीन तलाक (ट्रिपल तलाक) से प्रभावित महिलाओं और एसिड अटैक (तेजाब हमले) की शिकार सर्वाइवर्स को मुफ्त पक्का मकान और पूरी स्वास्थ्य सुरक्षा देने जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि ऐसी महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज की मुख्यधारा से कटी और मुश्किलों का सामना कर रही महिलाओं को एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देना है।
क्यों पड़ी इस योजना की जरूरत?
योगी सरकार का बड़ा फैसला: हमारे समाज में तीन तलाक से प्रभावित महिलाओं और एसिड अटैक पीड़ितों को न सिर्फ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है, बल्कि वे गंभीर आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा के जाल में भी फंस जाती हैं।
एसिड अटैक पीड़ितों की चुनौतियाँ: तेजाब हमले की शिकार महिलाओं को जिंदगी भर कई तरह की सर्जरी, लंबे समय तक चलने वाले मेडिकल ट्रीटमेंट और पुनर्वास (Rehabilitation) की जरूरत होती है।
गरीब परिवारों के लिए यह खर्च उठा पाना नामुमकिन जैसा होता है।
तीन तलाक पीड़ितों के हालात: तीन तलाक का दंश झेलने वाली कई महिलाओं के पास रहने को अपना घर नहीं होता और अचानक आए इस संकट के कारण वे बेघर और बेसहारा हो जाती हैं।
इन्हीं बुनियादी समस्याओं को समझते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा को मिलाकर एक सुरक्षा कवच तैयार करने का फैसला किया है।
किन बड़ी योजनाओं से जोड़ा जाएगा?
योगी सरकार का बड़ा फैसला: इस नई पहल के तहत उत्तर प्रदेश सरकार पीड़ित महिलाओं को चार सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी योजनाओं का सीधा लाभ देने जा रही है:
1.रहने के लिए पक्की छत (आवास सुरक्षा)
जिन पीड़ित महिलाओं के पास अपना खुद का कोई स्थायी या पक्का मकान नहीं है, उन्हें सरकार प्राथमिकता के आधार पर घर देगी। इसके लिए दो मुख्य योजनाओं की मदद ली जाएगी:
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) * मुख्यमंत्री आवास योजना
2.मुफ्त इलाज की गारंटी (स्वास्थ्य सुरक्षा)
पीड़ित महिलाओं और उनके परिवारों को बीमारी के समय इलाज के खर्च से बचाने के लिए सरकार उन्हें पूरी तरह कैशलेस स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ेगी, जिसमें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है:
आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना
महिला कल्याण विभाग ने तेज की तैयारी: तैयार हो रहा है डेटा
मुख्यमंत्री के आदेश के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश का महिला कल्याण विभाग (Women Welfare Department) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।
योजना का लाभ असली और पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी रुकावट के पहुँचे, इसके लिए विभाग निम्नलिखित कदम उठा रहा है:
सत्यापित डेटा (Verified Data) का संकलन: विभाग राज्य के हर जिले से तीन तलाक से प्रभावित, एसिड अटैक पीड़ितों और बेसहारा (निराश्रित) महिलाओं का एक विस्तृत और पूरी तरह सत्यापित डेटाबेस तैयार कर रहा है।
प्रक्रियाओं का सरलीकरण: अक्सर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कागजी जटिलताएँ आड़े आती हैं। इसलिए शासन स्तर पर नए दिशा-निर्देश (Guidelines) और शासनादेश (Government Orders) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी पीड़ित महिला को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
अंतर-विभागीय समन्वय: महिला कल्याण विभाग, आवास विभाग और स्वास्थ्य विभाग आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं, ताकि डेटा मिलते ही तुरंत मकान आवंटन और आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
भरोसा और सम्मान: “सबका साथ, सबका विकास” का जमीन पर असर
योगी सरकार का मानना है कि केवल कानून बना देने से पीड़ितों की जिंदगी नहीं बदलती, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है।
सरकार की इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि जानकारी के अभाव में कोई भी जरूरतमंद महिला पीछे न छूट जाए।
जब एक पीड़ित महिला के सिर पर अपनी पक्की छत होगी और उसके पास मुफ्त इलाज का भरोसा होगा, तो वह समाज में बिना किसी डर के सिर उठाकर जी सकेगी।
साथ ही, यह कदम उत्तर प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण (Women Empowerment) को एक नई और मजबूत दिशा देगा।

