महिला मतदाताओं की बढ़ती सक्रियता
केरल, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में महिला मतदाताओं ने अपनी निर्णायक भूमिका साबित की है। इन राज्यों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत ऊंचा रहा और कई जगहों पर पुरुषों से भी अधिक दर्ज किया गया। चुनावी नतीजों में महिलाओं की हिस्सेदारी केंद्रीय भूमिका में उभरकर सामने आई है।
पोल्समैप के पोस्ट पोल आंकड़ों के विश्लेषण से इन चुनावों में महिलाओं के मतदान पैटर्न की विस्तृत तस्वीर सामने आती है। विभिन्न राज्यों में महिला मतदाताओं की पसंद और प्राथमिकताएं अलग रहीं। भौगोलिक, आर्थिक और आयु वर्ग के आधार पर मतदान में स्पष्ट अंतर देखने को मिले हैं।
केरल में यूडीएफ के प्रति महिलाओं का मजबूत रुझान
केरल में लगभग 48 प्रतिशत महिलाओं ने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का समर्थन किया जबकि 36 प्रतिशत ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को वोट दिया। एनडीए को केवल 14 प्रतिशत महिला मतदाताओं का समर्थन मिला। पुरुषों में करीब 45 प्रतिशत ने यूडीएफ और 39 प्रतिशत ने एलडीएफ को वोट दिया।
महिला मतदाताओं का यूडीएफ के प्रति झुकाव पुरुषों की तुलना में अधिक मजबूत और निर्णायक रहा। राज्य में पुरुष और महिला दोनों ने यूडीएफ को पहली पसंद बनाया लेकिन महिलाओं में यह समर्थन अधिक स्पष्ट था। लैंगिक आधार पर मतदान पैटर्न में यह अंतर महत्वपूर्ण साबित हुआ।
ग्रामीण और शहरी महिलाओं में विपरीत चुनावी झुकाव
केरल की ग्रामीण महिलाओं ने यूडीएफ की तुलना में एलडीएफ को अधिक समर्थन दिया। ग्रामीण इलाकों में 42 प्रतिशत महिलाएं एलडीएफ के पक्ष में रहीं जबकि यूडीएफ को 38 प्रतिशत का समर्थन मिला। शहरी महिलाओं में एलडीएफ के मुकाबले यूडीएफ के लिए मजबूत समर्थन देखा गया।
शहरी इलाकों में 60 प्रतिशत महिलाओं ने यूडीएफ को वोट दिया जबकि एलडीएफ को करीब 30 प्रतिशत समर्थन मिला। मतदान व्यवहार में यह स्पष्ट भौगोलिक अंतर दिखाई दिया। ग्रामीण और शहरी महिलाओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं में यह विभाजन चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाला साबित हुआ।
आयु और वर्ग के आधार पर बदलता समर्थन
45 वर्ष तक की कम उम्र की महिलाओं में 50 प्रतिशत से अधिक ने यूडीएफ का समर्थन किया। उम्रदराज महिलाओं में इस गठबंधन के प्रति समर्थन में गिरावट दर्ज की गई। बुजुर्ग महिलाओं का झुकाव अपेक्षाकृत एलडीएफ की तरफ अधिक रहा जो पीढ़ीगत अंतर को दर्शाता है।
वर्गीय आधार पर भी महत्वपूर्ण अंतर सामने आए। गरीब और निम्न आय वाले परिवारों की महिलाओं में एलडीएफ के प्रति अधिक समर्थन रहा। गरीब महिलाओं में करीब 47 प्रतिशत और निम्न आय वर्ग में 43 प्रतिशत ने एलडीएफ को वोट दिया।
मध्यम और संपन्न वर्ग की महिलाओं ने यूडीएफ के लिए स्पष्ट रुझान दिखाया। इन वर्गों में यूडीएफ को लगभग 52 से 56 प्रतिशत तक वोट मिले। आर्थिक स्थिति के साथ राजनीतिक पसंद में बदलाव स्पष्ट देखा गया।
तमिलनाडु में टीवीके बनी महिलाओं की पहली पसंद
तमिलनाडु में महिला मतदाताओं का रुझान अपेक्षाकृत बंटा हुआ रहा लेकिन एक स्पष्ट पैटर्न उभरकर सामने आया। कुल मिलाकर 38 प्रतिशत महिलाओं ने टीवीके को वोट दिया जो सबसे अधिक था। डीएमके गठबंधन को 31 प्रतिशत और एडीएमके गठबंधन को 25 प्रतिशत महिलाओं का समर्थन मिला।
महिलाओं के बीच टीवीके सबसे बड़ी पसंद बनकर उभरी। पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने टीवीके के लिए अधिक समर्थन दिखाया। एडीएमके गठबंधन के लिए महिलाओं का झुकाव अपेक्षाकृत कम रहा जबकि डीएमके के प्रति समर्थन दोनों लिंगों में लगभग समान था।
त्रिकोणीय मुकाबले में ग्रामीण महिलाओं का बंटा वोट
ग्रामीण महिलाओं की पसंद तीनों तरफ लगभग बराबर बंटी रही। 33 प्रतिशत ने डीएमके गठबंधन को, 31 प्रतिशत ने एडीएमके गठबंधन को और 31 प्रतिशत ने टीवीके को समर्थन दिया। यह कड़े त्रिकोणीय मुकाबले का संकेत था।
शहरी महिलाओं ने टीवीके की तरफ मजबूत झुकाव दिखाया। 45 प्रतिशत शहरी महिलाओं ने टीवीके का समर्थन किया जबकि डीएमके गठबंधन को 30 प्रतिशत और एडीएमके गठबंधन को 19 प्रतिशत का समर्थन मिला। शहरी इलाकों में टीवीके की स्पष्ट बढ़त रही।
युवा महिलाओं में टीवीके का प्रबल समर्थन
उम्र के आधार पर अंतर बेहद स्पष्ट था जो पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देता है। कम उम्र की महिलाओं ने टीवीके का मजबूती से समर्थन किया। उम्र बढ़ने के साथ टीवीके के प्रति यह समर्थन लगातार घटता गया।
डीएमके और एडीएमके गठबंधनों को उम्रदराज महिलाओं के बीच अपेक्षाकृत अधिक समर्थन प्राप्त हुआ। पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों के प्रति बुजुर्ग महिलाओं का झुकाव अधिक रहा। युवा और वृद्ध महिलाओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं में यह अंतर महत्वपूर्ण रहा।
आर्थिक स्थिति के साथ बदलती राजनीतिक पसंद
गरीब महिलाओं के बीच वोट अपेक्षाकृत बंटे हुए थे। एडीएमके गठबंधन को 36 प्रतिशत, टीवीके को 34 प्रतिशत और डीएमके गठबंधन को 27 प्रतिशत गरीब महिलाओं के वोट मिले। आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ टीवीके के समर्थन में वृद्धि देखी गई।
मध्यम और संपन्न वर्ग की महिलाओं के बीच टीवीके के प्रति समर्थन 41 और 42 प्रतिशत तक पहुंच गया। टीवीके को कम उम्र और आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति वाली महिलाओं के बीच काफी मजबूत समर्थन मिला। उम्रदराज और गरीब महिलाएं पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों के बीच अधिक बंटी रहीं।
असम में एनडीए के प्रति महिलाओं का एकजुट समर्थन
असम में महिला मतदाताओं ने एनडीए के लिए साफ और एकजुट समर्थन प्रदर्शित किया। 51 प्रतिशत महिलाओं ने एनडीए का समर्थन किया जबकि 31 प्रतिशत ने एएसएम को वोट दिया। एयूडीएफ को 5 प्रतिशत और अन्य दलों को 14 प्रतिशत महिलाओं का समर्थन मिला।
पुरुषों की तुलना में महिलाएं एनडीए की ओर अधिक झुकी रहीं। एएसएम के लिए महिलाओं का समर्थन पुरुषों से कम रहा। महिलाओं के बीच एनडीए के पक्ष में एक सीमित लेकिन स्पष्ट लैंगिक अंतर दिखाई दिया जो चुनावी परिणामों में निर्णायक साबित हुआ।
वर्ग और आयु वर्गों में एनडीए की मजबूती
वर्ग आधारित अंतर ने बेहतर आर्थिक स्थिति वाले समूहों में एनडीए की मजबूती को और पुष्ट किया। आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ एनडीए का समर्थन लगातार बढ़ता गया। संपन्न वर्ग की महिलाओं में एनडीए के प्रति समर्थन सबसे अधिक रहा।
एनडीए को कम उम्र और अधिक उम्र दोनों वर्गों की महिलाओं का मजबूत समर्थन मिला। 36 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में समर्थन थोड़ा घटा लेकिन यह करीब 45 प्रतिशत बना रहा। कुल मिलाकर असम में महिलाओं का मतदान अधिकांश समूहों में एनडीए के साथ मजबूत रूप से जुड़ा रहा।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला
पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं का रुझान तृणमूल कांग्रेस गठबंधन और बीजेपी के बीच काफी करीबी मुकाबले में बंटा रहा। 47 प्रतिशत महिलाओं ने तृणमूल गठबंधन को और 42 प्रतिशत ने बीजेपी को समर्थन दिया। दोनों के बीच अंतर अपेक्षाकृत कम था।
50 प्रतिशत पुरुषों ने बीजेपी को और 36 प्रतिशत से अधिक ने तृणमूल गठबंधन को वोट दिया। मतदान पैटर्न में अधिक स्पष्ट लैंगिक अंतर दिखाई दिया। महिलाओं के बीच तृणमूल ने मामूली बढ़त बनाए रखी लेकिन बीजेपी ने भी वोट का बड़ा हिस्सा हासिल किया।
महिलाओं का समर्थन पूरी तरह तृणमूल के पीछे संगठित नहीं था। बीजेपी ने इस वर्ग में महत्वपूर्ण पैठ बनाई। 2021 में महिलाओं का वोट टीएमसी के पक्ष में कहीं अधिक ध्रुवीकृत था जो इस बार नहीं देखा गया।
सीमित ग्रामीण शहरी अंतर और बीजेपी की बढ़ती पैठ
पश्चिम बंगाल में ग्रामीण और शहरी अंतर सीमित रहा। तृणमूल को मामूली बढ़त मिली जबकि बीजेपी दोनों इलाकों में करीब रही। यह राज्य में बीजेपी की बढ़ती पैठ का संकेत है। दोनों गठबंधनों के बीच मुकाबला सभी भौगोलिक क्षेत्रों में कड़ा रहा।
अलग अलग उम्र की सभी महिला समूहों का मतदान पैटर्न तृणमूल और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर दिखाता है। विभिन्न आयु समूहों में कुछ अंतर थे लेकिन कोई एक समान पैटर्न नहीं उभरा। हर आयु वर्ग में प्रतिस्पर्धा तीव्र रही।
वर्ग आधारित मतदान में स्पष्ट विभाजन
वर्ग आधारित अंतर पश्चिम बंगाल में स्पष्ट थे। गरीब आर्थिक पृष्ठभूमि की 42 प्रतिशत महिलाओं ने बीजेपी को और 51 प्रतिशत ने तृणमूल को अधिक समर्थन दिया। गरीब वर्ग में तृणमूल की बढ़त रही।
निम्न आय और मध्यम वर्ग की महिलाओं में दोनों दलों के बीच अंतर कम रहा। मध्यम वर्ग में लगभग बराबरी की स्थिति दिखी जहां तृणमूल को 45 प्रतिशत और बीजेपी को 44 प्रतिशत वोट मिले। यह वर्ग दोनों पार्टियों के बीच बंटा रहा।
संपन्न महिलाओं के बीच तृणमूल को फिर से स्पष्ट बढ़त मिली। उसे 46 प्रतिशत समर्थन प्राप्त हुआ जबकि बीजेपी को 37 प्रतिशत का समर्थन मिला। संपन्न वर्ग में तृणमूल की पकड़ मजबूत रही।
महिलाओं की बढ़ती चुनावी भागीदारी
इन चुनावों ने अलग अलग राज्यों में मतदान के विविध पैटर्न सामने रखे हैं। हर राज्य में महिलाओं की राजनीतिक प्राथमिकताएं भिन्न रहीं। भौगोलिक, आर्थिक और पीढ़ीगत आधार पर महिला मतदाताओं के रुझान में महत्वपूर्ण अंतर देखे गए।
महिलाओं की चुनावी भागीदारी लगातार बढ़ रही है जो निर्विवाद तथ्य है। वे अब ऐसा मतदाता वर्ग बन चुकी हैं जिसे कोई भी राजनीतिक दल नजरअंदाज नहीं कर सकता। चुनावी नतीजों में महिलाओं की भूमिका निर्णायक साबित हो रही है।

