पंजाब में भाजपा का विस्तार
बंगाल में सत्ता हासिल करते ही भाजपा देश की पहली ऐसी पार्टी बन जाएगी जो किसी भी राज्य में अपनी इच्छानुसार सरकार गठित कर सकती है।
पंजाब को लेकर आज जो धारणाएं प्रचलित हैं वैसी ही स्थिति पंद्रह वर्ष पूर्व ओडिशा, बंगाल और असम में थी। इन तीनों राज्यों में आज केसरिया झंडा फहरा रहा है जो संघ-भाजपा युग की राजनीतिक सर्वव्यापकता का प्रमाण है।
1. पंजाब में बदलती राजनीतिक तस्वीर
विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा हाशिए की पार्टी वाली छवि से निकलकर प्रमुख दावेदार के रूप में स्थापित हो चुकी है। अकाली दल से अलग होने के बाद पार्टी ने स्वतंत्र संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया है जो अब बूथ स्तर तक सशक्त हो गया है।
लोकसभा 2024 में वोट प्रतिशत 6.6 से उछलकर 19 के पार पहुंचना मनोवैज्ञानिक रूप से निर्णायक सफलता साबित हुआ है।
यह बढ़ता वोट प्रतिशत भाजपा के लिए सहायक दल से मुख्यधारा की स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति बनने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज नेताओं की सक्रिय भागीदारी से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह जगा है। मतदाताओं के बीच भाजपा अब वास्तविक विकल्प के रूप में स्वीकार की जा रही है।
2. हिंदू-सिख संतुलन की रणनीति
पारंपरिक हिंदू वोट बैंक को मजबूत करने के साथ भाजपा पंजाब में सावधानीपूर्वक काम कर रही है। हिंदू नेताओं और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की घटनाओं के विरुद्ध पार्टी आक्रामक प्रदर्शन कर रही है।
ध्रुवीकरण से बचते हुए हिंदू-सिख संतुलन की नीति अपनाई जा रही है जो सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखती है।
माझा और मालवा के ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ बनाने के लिए हिंदू-सिख नेताओं की नई पीढ़ी तैयार की जा रही है। ग्रामीण पंजाब में भाजपा विश्वसनीयता स्थापित करने में सफल हो रही है जो पहले कभी संभव नहीं लगता था।
3. सामाजिक गठबंधन का नया समीकरण
एकल पहचान या वोट बैंक पर निर्भरता छोड़कर भाजपा सवर्ण, ओबीसी और दलित समुदायों को जोड़ने पर केंद्रित है। सुनील जाखड़, अश्विनी शर्मा, मनोरंजन कालिया सवर्ण समाज के एकीकरण पर प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की बार-बार पंजाब यात्रा ओबीसी केंद्रित पहुंच का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
पंजाब की विशाल दलित आबादी को साधने के लिए विशेष प्रयास चल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का जालंधर स्थित डेरा बल्लन दौरा इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
रविदासिया समुदाय और अन्य दलित समूहों में उपस्थिति दर्ज कराकर भाजपा पारंपरिक चुनावी गणित बदलने में जुटी है।
4. धर्मांतरण और नशामुक्ति एजेंडा
धर्मांतरण के विरुद्ध कानून बनाने का वादा उन वर्गों को जोड़ रहा है जो ग्रामीण और हाशिए के इलाकों में बढ़ते धर्मांतरण से चिंतित हैं। ड्रग्स संकट को भाजपा ने शासन एजेंडे का केंद्रीय मुद्दा बनाया है। दो वर्ष में नशे को समाप्त करने का वादा कर पार्टी खुद को निर्णायक विकल्प के रूप में पेश कर रही है।
सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नशामुक्ति भाजपा के पंजाब विमर्श की वैचारिक रीढ़ बनते जा रहे हैं। इन मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाकर पार्टी जनता के बीच गंभीर और जिम्मेदार शक्ति की छवि गढ़ रही है।

