Friday, July 10, 2026

पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: 3 खाली सीटों पर मुकाबले से पहले बदला सियासी गणित, किसके पक्ष में है विधानसभा का संख्या बल?

पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की तीन खाली सीटों पर 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

इन चुनावों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा विधानसभा के मौजूदा संख्या बल और दलों के राजनीतिक समीकरणों की हो रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर मतदान तक मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, तो विधानसभा का गणित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है।

वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सामने अपनी राजनीतिक एकजुटता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

निर्वाचन आयोग ने घोषित किया चुनाव कार्यक्रम

भारत निर्वाचन आयोग ने टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे से खाली हुई तीन सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है।

आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई है, जबकि 24 जुलाई को मतदान कराया जाएगा।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि तीनों खाली सीटों के लिए अलग-अलग चुनाव होंगे।

यानी सामान्य राज्यसभा चुनाव की तरह सभी सीटों पर एक साथ मतदान नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक सीट के लिए अलग अधिसूचना जारी होगी और अलग मतदान प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

अलग-अलग चुनाव से क्यों अहम हो गया विधानसभा का गणित?

राज्यसभा की प्रत्येक खाली सीट के लिए अलग चुनाव होने के कारण विधानसभा में विधायकों की संख्या और उनका समर्थन निर्णायक भूमिका निभाएगा।

निर्वाचन आयोग के अनुसार यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 147 से 151 के तहत निर्धारित है। इसी व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक सीट के लिए अलग-अलग वोटों की गणना होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर किसी दल के पास पर्याप्त विधायक हैं और सभी विधायक पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करते हैं, तो वह हर सीट पर अलग-अलग उम्मीदवार को जिता सकता है।

यही वजह है कि इस बार सबसे ज्यादा चर्चा विधानसभा के मौजूदा संख्या बल को लेकर हो रही है।

बीजेपी के पक्ष में कैसे बन रहा है समीकरण?

मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए बीजेपी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।

विधानसभा की कुल 294 सदस्यीय संरचना में अगर पार्टी के समर्थक विधायक एकजुट रहते हैं और सभी अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करते हैं, तो तीनों सीटों पर जीत का गणित उसके पक्ष में बन सकता है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अलग-अलग चुनाव होने से हर सीट पर आवश्यक वोटों की संख्या अलग मानी जाएगी।

ऐसे में अगर वर्तमान संख्या बल मतदान तक कायम रहता है, तो बीजेपी अपने तीनों उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने की स्थिति में दिखाई देती है।

हालांकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा, नामांकन और मतदान के दिन विधायकों की वास्तविक संख्या पर ही निर्भर करेगी।

टीएमसी के सामने क्यों खड़ी हुई चुनौती?

तृणमूल कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव केवल तीन सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती की भी परीक्षा माना जा रहा है।

पार्टी के तीनों राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक पहले ही राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के भीतर बागी खेमे का प्रभाव पहले की तुलना में बढ़ा है।

अगर मतदान तक यही स्थिति बनी रहती है, तो पार्टी के लिए अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और टीएमसी नेतृत्व की ओर से भी इस पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।

खाली सीटों का बचा हुआ कार्यकाल

  • सुखेंदु शेखर रॉय – कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक।
  • प्रकाश चिक बराइक – कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक।
  • सुष्मिता देव – कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक।

इन इस्तीफों के बाद फिलहाल राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों की संख्या घटकर 9 रह गई है।

परिणाम तय करेंगे पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक दिशा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बीजेपी तीनों सीटों पर जीत दर्ज करती है,

तो इसका असर केवल राज्यसभा में उसकी संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी बड़ा संकेत माना जाएगा।

दूसरी ओर, अगर टीएमसी इन सीटों पर वापसी करती है, तो यह पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व पर भरोसे का संदेश होगा।

फिलहाल सभी की नजर उम्मीदवारों की घोषणा, नामांकन प्रक्रिया और 24 जुलाई को होने वाले मतदान पर टिकी है।

विधानसभा का मौजूदा गणित भले ही बीजेपी के पक्ष में माना जा रहा हो, लेकिन अंतिम फैसला विधायकों के वास्तविक मतदान और चुनावी रणनीति पर ही निर्भर करेगा।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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