ट्रंप की हत्या की साजिश: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है।
हाल के दिनों में ईरान के कई शहरों में हुए धमाकों और सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच हालात पहले से अधिक गंभीर हो गए हैं।
इसी बीच एक नई खुफिया जानकारी ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,
इजरायल ने अमेरिका को ऐसी इंटेलिजेंस साझा की है, जिसमें दावा किया गया कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश तैयार की थी।
इस जानकारी के सामने आने के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को फिर तेज कर दिया।
ईरान में धमाकों के बाद बढ़ा तनाव
हाल ही में ईरान के कई इलाकों में विस्फोटों की घटनाएं सामने आईं। तेहरान का दावा है कि इन हमलों में उसके आठ सैनिकों की मौत हुई है।
ईरानी अधिकारियों ने इन घटनाओं को गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया है। इन धमाकों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया तथा दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास और गहरा हो गया।
ट्रंप की हत्या की साजिश का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने वॉशिंगटन के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा की, जिसमें दावा किया गया कि ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की योजना बनाई थी।
बताया जा रहा है कि इस इनपुट को अमेरिका ने गंभीरता से लिया और इसके बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा तेज कर दी गई।
हालांकि इस खुफिया जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।
फिर भी इस इनपुट ने अमेरिका-ईरान संबंधों को एक बार फिर टकराव की स्थिति में पहुंचा दिया है।
क्या इजरायल की रणनीति सफल रही?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि कहीं इजरायल की ओर से साझा की गई
खुफिया जानकारी का उद्देश्य अमेरिका को ईरान के खिलाफ अधिक आक्रामक रुख अपनाने के लिए प्रेरित करना तो नहीं था।
इन अधिकारियों का मानना है कि यदि यह केवल रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश थी, तो उसका असर दिखाई देता है क्योंकि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई और तेज कर दी है।
हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सीजफायर के बाद फिर बढ़ी सैन्य कार्रवाई
कुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को कम करने के लिए युद्धविराम (सीजफायर) की स्थिति बनी थी।
इससे उम्मीद की जा रही थी कि दोनों देशों के बीच तनाव धीरे-धीरे कम होगा, लेकिन ट्रंप की कथित हत्या की साजिश से जुड़ी खुफिया जानकारी सामने आने के बाद हालात फिर बदल गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच इस तरह की खुफिया सूचनाएं सैन्य,
कूटनीतिक फैसलों को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। यही कारण है कि क्षेत्र में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है।
ट्रंप ने खुद भी जताया था खतरे का संकेत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें ईरान से अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस होता है।
उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान उन्हें निशाना बनाना चाहता है और उनका नाम उन लोगों की सूची में शामिल है जिन्हें ईरान अपना विरोधी मानता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अब तक वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं, लेकिन भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
उनके इस बयान के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती।
खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर भी चर्चा
इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर भी कई खबरें सामने आई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक सप्ताह तक चले श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के बाद उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर के पास सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और देश के विभिन्न शहरों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं।
हालांकि इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं और आधिकारिक स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं का मिलान किया जाना अभी बाकी है।
पश्चिम एशिया पर मंडरा रहा बड़ा संकट
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव पूरे पश्चिम एशिया के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
यदि सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है तो इसका असर केवल इन तीन देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।

