US Venezuela Conflict: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किए जाने के दावे के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
इस घटनाक्रम के केंद्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जिनके आदेश पर अमेरिकी स्पेशल फोर्स के वेनेजुएला में घुसकर ऑपरेशन चलाने की बात कही जा रही है।
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि मादुरो सरकार ने ड्रग तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ,
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या कोई देश दूसरे संप्रभु राष्ट्र में इस तरह सैन्य दखल दे सकता है?
अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है
अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर किसी भी संप्रभु देश पर बल प्रयोग को सामान्य परिस्थितियों में अवैध मानते हैं।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के तहत किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रोक है।
हालांकि, दो अपवाद ऐसे हैं जिनमें सैन्य कार्रवाई को वैध माना जाता है। पहला, आत्मरक्षा का अधिकार—यदि किसी देश पर प्रत्यक्ष हमला हो रहा हो, तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
दूसरा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति—यदि सुरक्षा परिषद किसी सैन्य अभियान को मंजूरी देती है, तभी सामूहिक या एकतरफा कार्रवाई वैध मानी जाती है।
वेनेजुएला के मामले में न तो आत्मरक्षा की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है और न ही सुरक्षा परिषद की औपचारिक मंजूरी की बात सामने आई है, जिससे इस ऑपरेशन की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिका की विदेश नीति का ढांचा
अमेरिका की विदेश नीति लंबे समय से “राष्ट्रीय हित” की अवधारणा पर आधारित रही है।
कानूनी और अकादमिक विश्लेषणों के अनुसार, अमेरिका तीन स्थितियों में सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराता रहा है। पहली स्थिति तब होती है जब उसके नागरिकों या राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा हो।
दूसरी, आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई भले ही वे किसी अन्य देश की सीमा में सक्रिय हों। तीसरी, यदि अमेरिका पर पहले हमला किया गया हो और जवाबी कार्रवाई जरूरी हो।
ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला कार्रवाई को इन्हीं आधारों पर सही ठहराने की कोशिश कर रहा है, खासकर ड्रग तस्करी और संगठित अपराध को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए।
क्या अमेरिका को मनमानी की छूट है?
सैद्धांतिक रूप से अमेरिका भी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के दायरे में ही आता है और उसे मनमानी की खुली छूट नहीं है,
लेकिन व्यवहार में अमेरिका पर कई बार आरोप लगते रहे हैं कि उसने संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाई की।
इराक, लीबिया और अब वेनेजुएला जैसे उदाहरणों ने इन आरोपों को और मजबूत किया है।
आलोचकों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करती हैं और छोटे देशों की संप्रभुता को खतरे में डालती हैं।
वेनेजुएला के बाद अगला निशाना?
वेनेजुएला प्रकरण के बाद संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन की नजर क्यूबा, कोलंबिया, मैक्सिको और डेनमार्क पर भी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को लेकर कड़े शब्दों में चेतावनी दी है और कहा है कि हवाना सरकार ने मादुरो शासन का समर्थन किया।
वहीं डेनमार्क के संदर्भ में ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए अमेरिकी बयानों ने यूरोप में भी चिंता बढ़ा दी है।
इन घटनाओं से साफ है कि आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के बीच टकराव और गहराने की आशंका है, जिसका असर वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है।

