भारत से विदेश तक UPI: देश में डिजिटल पेमेंट को नई पहचान देने वाला यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार यूपीआई से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा में काम कर रही है।
प्रस्तावित बदलाव के तहत व्यापारियों को किए जाने वाले कुछ डिजिटल भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है।
हालांकि, सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि आम लोगों के बीच होने वाले पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर पर किसी तरह का शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है।
यानी यदि आप अपने परिवार, दोस्तों या किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में यूपीआई के जरिए पैसे भेजते हैं, तो यह सुविधा पहले की तरह मुफ्त बनी रहेगी।
दूसरी ओर, भारतीय यूपीआई सिस्टम की लोकप्रियता अब देश की सीमाओं से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। कई देशों में भारतीय पर्यटक और कारोबारी अब अपने मोबाइल से आसानी से यूपीआई भुगतान कर रहे हैं।
आखिर क्या होता है मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है, जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर व्यापारियों से वसूलते हैं।
जब कोई ग्राहक किसी दुकान, होटल या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उस ट्रांजैक्शन की प्रोसेसिंग में शामिल संस्थानों को एक निश्चित शुल्क मिलता है।
वर्तमान में अधिकांश यूपीआई ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क लागू नहीं है। यही वजह है कि यूपीआई देश में सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम बन चुका है
लेकिन लगातार बढ़ते लेनदेन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर आने वाले खर्च को देखते हुए सरकार इस व्यवस्था में बदलाव पर विचार कर रही है।
कानून में संशोधन के बाद RBI को मिल सकता है अधिकार
सरकार पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर तय करने का अधिकार सीधे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास होगा।
इस कदम का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक टिकाऊ और मजबूत बनाना बताया जा रहा है।
बैंक और पेमेंट नेटवर्क का कहना है कि लगातार बढ़ते डिजिटल ट्रांजैक्शन को संभालने के लिए उन्हें तकनीकी ढांचे और सुरक्षा पर लगातार निवेश करना पड़ता है।
ऐसे में सीमित शुल्क व्यवस्था से इस पूरे इकोसिस्टम को मजबूती मिल सकती है।
क्या 2,000 रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट पर देना होगा शुल्क?
सरकार के सामने मौजूद प्रस्ताव के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.40% तक एमडीआर लगाया जा सकता है।
यानी यदि कोई ग्राहक किसी दुकान, रेस्टोरेंट, अस्पताल या अन्य व्यावसायिक संस्थान में यूपीआई के जरिए भुगतान करता है और राशि 2,000 रुपये से अधिक है, तो उस लेनदेन पर यह शुल्क लागू हो सकता है।
हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुआ है। इसे लागू करने से पहले संसद की मंजूरी, नियामकीय प्रक्रिया और बैंकिंग एवं फिनटेक सेक्टर से जुड़े सभी पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी।
आम उपभोक्ताओं को क्यों नहीं होगी चिंता?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित शुल्क केवल व्यापारिक लेनदेन (P2M) तक सीमित रहेगा।
यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में यूपीआई के जरिए पैसे भेजता है, तो उस पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगेगा।
यानी परिवार के सदस्य को पैसे भेजना, दोस्तों को भुगतान करना या किसी परिचित को ट्रांसफर करना पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
इससे करोड़ों यूपीआई उपयोगकर्ताओं की रोजमर्रा की डिजिटल भुगतान सुविधा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत से दुनिया तक पहुंचा UPI
भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली की सफलता अब वैश्विक स्तर पर भी दिखाई देने लगी है।
यूपीआई सेवा अब कई देशों में उपलब्ध है, जिससे भारतीय नागरिक विदेश यात्रा के दौरान भी अपने परिचित यूपीआई ऐप के जरिए आसानी से भुगतान कर सकते हैं।
फिलहाल सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, भूटान, फ्रांस, कतर और कंबोडिया समेत कई देशों में यूपीआई आधारित भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।
इन देशों में भारतीय पर्यटक होटल, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान कर सकते हैं।
यह उपलब्धि भारत की डिजिटल तकनीक को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विदेश में UPI इस्तेमाल करने पर कितना खर्च आता है?
विदेशों में यूपीआई से भुगतान करने पर एनपीसीआई (NPCI) या यूपीआई ऐप की ओर से अलग से कोई प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं लिया जाता। यानी यूपीआई सेवा का उपयोग करने के लिए अतिरिक्त ऐप फीस नहीं देनी पड़ती।
हालांकि, भुगतान के दौरान भारतीय रुपये को संबंधित देश की मुद्रा में बदला जाता है।
इसी प्रक्रिया में बैंक करेंसी कन्वर्जन या फॉरेक्स मार्कअप शुल्क वसूलते हैं, जो आमतौर पर 1.5% से 3.5% तक हो सकता है।
इसके अलावा कुछ बैंक प्रति ट्रांजैक्शन 15 रुपये से 50 रुपये तक प्रोसेसिंग शुल्क भी ले सकते हैं।
यह शुल्क बैंक की नीति और कार्ड या खाते के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
विदेश यात्रा से पहले करना होगा यह जरूरी काम
यदि आप विदेश में यूपीआई का उपयोग करना चाहते हैं, तो यात्रा से पहले अपने मोबाइल में मौजूद यूपीआई ऐप में जाकर UPI International फीचर सक्रिय करना जरूरी होता है।
फोनपे, गूगल पे और अन्य समर्थित ऐप्स में यह सुविधा उपलब्ध है। फीचर एक्टिव होने के बाद ही विदेशी व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर यूपीआई भुगतान किया जा सकता है।
कितनी है इंटरनेशनल UPI की दैनिक सीमा?
अंतरराष्ट्रीय यूपीआई लेनदेन के लिए बैंक एक दैनिक सीमा निर्धारित करते हैं। अधिकांश मामलों में यह सीमा 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये प्रतिदिन तक हो सकती है।
हालांकि, वास्तविक सीमा आपके बैंक, खाते के प्रकार और संबंधित नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए विदेश यात्रा से पहले अपने बैंक या यूपीआई सेवा प्रदाता से सीमा और शुल्क की जानकारी लेना बेहतर माना जाता है।
डिजिटल भुगतान का भविष्य और सरकार की रणनीति
यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन इस प्लेटफॉर्म के जरिए किए जा रहे हैं।
अब सरकार का उद्देश्य इस व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत बनाए रखना है। यदि भविष्य में एमडीआर से जुड़ा कोई नया नियम लागू होता है,
तो उसका प्रभाव मुख्य रूप से व्यापारिक लेनदेन पर ही देखने को मिलेगा, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई ट्रांसफर की सुविधा जारी रहने की संभावना है।

