Tuesday, May 19, 2026

तालिबानी में वर्जिन बच्चियों से निकाह के आदेश का तुगलकी फरमान, दुनिया में उठ रहे सवाल

तालिबानी: तालिबान ने अफगानिस्तान में एक नया पारिवारिक कानून लागू किया है, जिसने पूरी दुनिया में बहस छेड़ दी है।

इस कानून के तहत अगर कोई कुँवारी लड़की निकाह के प्रस्ताव पर चुप रहती है, तो उसकी इस चुप्पी को ही उसकी मंजूरी माना जाएगा।

पहली नजर में यह एक साधारण कानूनी प्रावधान लग सकता है, लेकिन जब इसे अफगानिस्तान की मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाता है,

तो यह महिलाओं की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या है तालिबान का नया पारिवारिक कानून?

तालिबान ने 31 अनुच्छेदों वाला नया पारिवारिक कानून लागू किया है, जिसे पति-पत्नी के अलगाव से जुड़े सिद्धांतों पर आधारित बताया गया है।

इस कानून को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा की मंजूरी मिली है।

इसमें निकाह, तलाक, पति-पत्नी के अलगाव, पारिवारिक विवादों और नाबालिगों के विवाह से जुड़े कई नियम तय किए गए हैं,

लेकिन सबसे विवादित हिस्सा वह प्रावधान है जिसमें लड़की की चुप्पी को उसकी सहमति माना गया है।

यह प्रावधान इसलिए ज्यादा चिंता पैदा करता है क्योंकि सहमति का मतलब हमेशा स्पष्ट और स्वतंत्र इच्छा से लिया गया फैसला माना जाता है।

खामोशी को सहमति मानना इस बुनियादी सिद्धांत को कमजोर करता है।

‘खियार अल बुलूघ’ क्या है?

इस कानून में ‘खियार अल बुलूघ’ नाम का इस्लामी कानूनी सिद्धांत भी शामिल किया गया है। इसका अर्थ है बालिग होने के बाद निर्णय लेने का अधिकार।

इस सिद्धांत के तहत अगर किसी बच्चे का विवाह कम उम्र में तय किया गया है, तो बालिग होने पर वह उसे खत्म करने की मांग कर सकता है।

हालांकि यहाँ एक महत्वपूर्ण शर्त है। विवाह खत्म करने के लिए मजहबी अदालत की मंजूरी जरूरी होगी। यानी लड़की की इच्छा अंतिम नहीं होगी; फैसला अदालत करेगी।

यही वह बिंदु है जिस पर आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि अगर अंतिम अधिकार अदालत के पास ही है, तो व्यक्तिगत स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है?

नाबालिगों के निकाह पर क्या कहता है कानून?

नए नियमों के मुताबिक कुछ परिस्थितियों में नाबालिग बच्चों के विवाह को मान्यता दी जा सकती है।

कानून परिवार के बड़े पुरुष सदस्यों जैसे पिता और दादा को बच्चों का निकाह तय करने का अधिकार देता है।

यदि रिश्ता सामाजिक और धार्मिक मानकों के अनुसार उपयुक्त माना जाता है, तो ऐसे विवाह वैध माने जा सकते हैं।

यानी कम उम्र में तय किए गए विवाहों को मान्यता मिलने का रास्ता खुला रखा गया है।

क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल?

किसी भी विवाह में सहमति सबसे अहम आधार होती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे माहौल में जहाँ महिलाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति सीमित हो,

चुप्पी को वास्तव में सहमति माना जा सकता है?

अगर कोई लड़की डर, सामाजिक दबाव, पारिवारिक भय या प्रताड़ना के डर से कुछ नहीं बोलती,

तो उसकी चुप्पी को ‘हाँ’ मान लेना जबरन विवाह को वैधता देने जैसा हो सकता है।

यही वजह है कि मानवाधिकार संगठन इस कानून को बेहद खतरनाक मान रहे हैं।

अफगानिस्तान में महिलाओं की मौजूदा स्थिति

अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद महिलाओं पर लगातार कई प्रतिबंध लगाए गए हैं।

लड़कियों की पढ़ाई छठी कक्षा के बाद रोक दी गई। विश्वविद्यालयों में प्रवेश बंद कर दिया गया।

कई क्षेत्रों में महिलाओं के काम करने पर पाबंदी लगी। अकेले यात्रा करने पर भी सख्त नियम लागू किए गए।

ऐसे माहौल में यह नया कानून महिलाओं की स्वतंत्रता को और सीमित करने वाला माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रतिक्रिया

एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस कानून की आलोचना की है।

उनका कहना है कि विवाह में सहमति हमेशा स्पष्ट, स्वतंत्र और बिना दबाव के होनी चाहिए।

किसी लड़की की मजबूरी में बनी चुप्पी को सहमति नहीं कहा जा सकता।

कई विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि तालिबान जिस तरह इन नियमों को धार्मिक आधार पर सही ठहराने की कोशिश कर रहा है,

वह इस्लामी कानून की आधुनिक और व्यापक व्याख्याओं से मेल नहीं खाता।

यह सिर्फ अफगानिस्तान का मुद्दा नहीं

यह मामला सिर्फ एक देश के कानून तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता से जुड़ा वैश्विक सवाल है।

अगर 21वीं सदी में भी किसी महिला की इच्छा उसकी स्पष्ट आवाज से नहीं, बल्कि उसकी चुप्पी से तय की जाएगी, तो यह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।

महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई तब ही सार्थक होगी जब हर जगह, हर परिस्थिति में समान रूप से उनके पक्ष में आवाज उठे चाहे मामला दुनिया के किसी भी हिस्से का क्यों न हो।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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