Wednesday, April 15, 2026

उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

उन्नाव रेप केस एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत के सामने है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी,

जिसमें दोषी करार दिए जा चुके पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा निलंबित करते हुए उसे सशर्त जमानत दी गई थी।

इस फैसले के बाद एक बार फिर पीड़िता और उसके परिवार को न्याय की उम्मीद बंधी है।

उन्नाव रेप केस: CBI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच सुनवाई कर रही है, जिसमें जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह भी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की गंभीरता को स्वीकार किया।

हाईकोर्ट का फैसला और विवाद

23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की अपील लंबित रहने तक उसकी उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया था।

कोर्ट ने यह फैसला इस आधार पर दिया कि सेंगर अब तक सात साल पांच महीने की सजा काट चुका है। साथ ही उसे सशर्त जमानत भी प्रदान की गई थी।

हालांकि इस आदेश के बाद पीड़िता और उसके परिवार ने कड़ा विरोध जताया और दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर लगातार प्रदर्शन शुरू कर दिया।

नाबालिग पीड़िता और गंभीर आरोप

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि यह मामला नाबालिग पीड़िता से जुड़े अत्यंत जघन्य अपराध का है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 लागू होती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट ने इन धाराओं की गंभीरता पर समुचित विचार नहीं किया।

इस पर जस्टिस जेके महेश्वरी ने कहा कि धारा 376 पर विचार किया गया है, लेकिन SG मेहता ने दोहराया कि कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया,

जबकि अपराध एक सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किया गया था।

पीड़िता की उम्र और दोषसिद्धि के तथ्य

CBI ने कोर्ट को बताया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 15 साल 10 महीने थी, यानी वह स्पष्ट रूप से नाबालिग थी।

सेंगर को दो अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और उसकी दोषसिद्धि ठोस साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर हुई थी।

इसके बावजूद सजा निलंबित किया जाना न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हिरासत में मौत का दूसरा मामला

हालांकि रेप केस में सजा निलंबित होने के बावजूद कुलदीप सिंह सेंगर अभी जेल से बाहर नहीं आया है।

पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में उसे 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसके चलते वह अभी भी जेल में बंद है।

2017 से अब तक का पूरा मामला

उन्नाव रेप केस की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी, जब उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था।

लंबे संघर्ष और कई विवादों के बाद 2019 में दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

इस केस ने न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि सत्ता और न्याय के टकराव को भी उजागर किया।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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