सुधांशु त्रिवेदी
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में आज एक बेहद आक्रामक और सनसनीखेज प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उसे “शराब, जुआ और आपसी कलह” का पर्याय बताया, वहीं पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर दिया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक तरफ भाजपा का ‘गुजरात मॉडल’ है जो विकास और पारदर्शिता की बात करता है, और दूसरी तरफ कांग्रेस का मॉडल है जो भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण में आकंठ डूबा हुआ है।
कर्नाटक फाइल्स: 6000 करोड़ की वसूली और ‘मैं नशे में हूँ’ वाला मॉडल
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कर्नाटक सरकार के खिलाफ एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि यह आरोप भाजपा नहीं लगा रही, बल्कि स्वयं ‘कर्नाटक वाइन मर्चेंट एसोसिएशन’ ने लिखित में यह शिकायत दर्ज कराई है।
एसोसिएशन का दावा है कि राज्य में 6000 करोड़ रुपये का शराब घोटाला हुआ है, जिसमें रेस्टोरेंट से लेकर होटलों के लाइसेंस अलॉटमेंट तक में सरकार के मंत्रियों और बड़े ओहदेदारों ने भारी रिश्वत खाई है।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने इसकी तुलना दिल्ली के शराब घोटाले से करते हुए कहा कि कांग्रेस का चरित्र अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस की हालत उस पुरानी गजल की पंक्ति जैसी हो गई है, “मुझको यारों माफ करना मैं नशे में हूँ।” उनका कहना था कि कांग्रेस आज मोदी विरोध के नशे में इस कदर धुत है कि उसे जनता के हित और विकास का कोई होश नहीं बचा है।
सट्टेबाजी के जाल में विधायक और कुर्सी की लड़ाई में उलझे मुख्यमंत्री
शराब घोटाले के बाद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के ‘जुए के मॉडल’ की पोल खोली। उन्होंने बताया कि कर्नाटक के चित्रदुर्ग से कांग्रेस के एक विधायक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के घेरे में हैं। उन पर ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं, जो यह दर्शाता है कि सत्ता में बैठे लोग किस तरह अनैतिक कार्यों को संरक्षण दे रहे हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के ‘लड़ाई मॉडल’ का जिक्र किया। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि जहाँ भी कांग्रेस की सरकार होती है, वहां मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच सत्ता का संघर्ष अनिवार्य होता है। कर्नाटक में सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच चल रही रस्साकशी जगजाहिर है।
सिद्धारमैया का यह कहना कि “राहुल गांधी कैबिनेट विस्तार की अनुमति नहीं दे रहे” और शिवकुमार का “न्याय की मांग” करना यह साबित करता है कि कांग्रेस का ध्यान जनता की सेवा पर नहीं, बल्कि अपनी कुर्सी बचाने पर है। यही स्थिति राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी देखी गई थी।
“घुसपैठियों के वोट के लिए राष्ट्र की सुरक्षा का सौदा” – ममता सरकार पर हाई कोर्ट का चाबुक
प्रेस कॉन्फ्रेंस का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित था। डॉ. त्रिवेदी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के हालिया आदेश का हवाला देते हुए ममता बनर्जी की सरकार को ‘घुसपैठिया परस्त’ करार दिया।
न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि वह भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग (बाड़) लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 31 मार्च 2026 तक जमीन आवंटित करे।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने केवल एक खास वर्ग के वोट बैंक और घुसपैठियों को खुश करने के लिए जानबूझकर सीमा सुरक्षा के काम को लटकाए रखा। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के इस आदेश ने ममता सरकार के चेहरे से नकाब नोच लिया है और यह साबित कर दिया है कि उनके लिए राष्ट्र की सुरक्षा से बढ़कर अपनी क्षुद्र राजनीति है।
हामिद अंसारी को इतिहास का पाठ: “मुगलों की वफादारी भारत से नहीं, बगदाद के खलीफा से थी”
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा विदेशी आक्रांताओं और अफगानिस्तान को भारत का हिस्सा बताने वाले बयान पर डॉ. त्रिवेदी ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि अलाउद्दीन खिलजी के बाद तमाम मुगल बादशाहों ने भारत में शासन जरूर किया, लेकिन उन्होंने बगदाद के खलीफा का खुदबा पढ़कर राज किया।
उनकी वफादारी ठीक वैसे ही विदेशी सत्ता के प्रति थी, जैसे ब्रिटिश वायसराय की वफादारी इंग्लैंड की महारानी के प्रति होती थी। उन्होंने इसे एक “रोगी मानसिकता” बताया जो ‘M3’ यानी मुगल, मैकाले और मार्क्स के विचारों से ग्रसित है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि इंटरनेट क्रांति ने अब वामपंथियों और कट्टरपंथी इतिहासकारों के झूठ को बेनकाब कर दिया है। अब सच को छिपाना आसान नहीं है क्योंकि आम जनता एक क्लिक पर असली इतिहास जान सकती है।
राहुल गांधी पर सीधा वार: “विदेश यात्राओं और देश में विवाद खड़ा करने से फुर्सत मिले तब तो संवैधानिक मर्यादा याद रहे”
अंत में, राहुल गांधी द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह में सीटिंग व्यवस्था को लेकर की गई शिकायत पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए डॉ. त्रिवेदी ने उन्हें आड़े हाथों लिया। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी न तो उपराष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए और न ही अन्य संवैधानिक दायित्वों को गंभीरता से लेते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का समय या तो विदेश यात्राओं में बीतता है या फिर भारत के अंदर विवाद उत्पन्न करने और अपने ही गठबंधन (INDI Alliance) के साथियों को निपटाने की साजिशें रचने में। डॉ. त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

