Friday, May 8, 2026

मिडिल ईस्ट संकट: PM मोदी की हाई-लेवल बैठक, पेट्रोल-डीजल पर सरकार का बड़ा फैसला!

मिडिल ईस्ट संकट: वैश्विक स्तर पर गहराते Energy Crisis और Middle East Tension के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

रविवार, 22 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सहित कई दिग्गज मौजूद रहें।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक संघर्ष के बीच भारत की अर्थव्यवस्था और आम नागरिक को सुरक्षा कवच प्रदान करना था।

CCS की बैठक और प्रधानमंत्री का विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने Cabinet Committee on Security (CCS) की बैठक में मौजूदा हालात की समीक्षा की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल वर्तमान संकट को टालना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भारत को सुरक्षित बनाना है।

पीएम ने लिखा, हम अपने नागरिकों को इस संघर्ष के प्रभावों से सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बैठक में विशेष रूप से Global Supply Chain Disruption को लेकर चिंता जताई गई और उससे निपटने के ठोस रोडमैप पर चर्चा हुई।

तीन स्तरों पर रणनीति

मिडिल ईस्ट संकट: सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए एक व्यापक Action Plan तैयार किया है। इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है।

अल्पकालिक (Short-term): तत्काल प्रभाव से पेट्रोल, डीजल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।

मध्यमकालिक (Medium-term): आयात के स्रोतों में विविधता लाना ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न रहे।

दीर्घकालिक (Long-term): ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना।

इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य Energy Security और Food Security को हर कीमत पर बनाए रखना है।

किसानों के लिए राहत

Farmers Welfare को प्राथमिकता देते हुए बैठक में उर्वरकों (Fertilizers) की उपलब्धता पर विस्तृत चर्चा हुई।

आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए पीएम ने निर्देश दिए कि किसानों को खाद की कमी नहीं होनी चाहिए।

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भारत के पास पर्याप्त Buffer Stock मौजूद है। इसके साथ ही, उर्वरक आयात के लिए नए अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों की तलाश शुरू कर दी गई है ताकि सप्लाई चैन में आने वाली किसी भी बाधा का असर भारतीय कृषि पर न पड़े।

जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त निर्देश

मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

ऐसे में देश के भीतर Inflation Control के लिए पीएम मोदी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे Hoarding and Black Marketing पर कड़ी नजर रखें।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि LPG, पेट्रोल और राशन जैसी आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

औद्योगिक सुरक्षा और निर्यात को बढ़ावा । Economic Resilience

बैठक में भारत की Macro-economic stability पर भी मंथन हुआ। फार्मास्युटिकल, केमिकल और पेट्रोकेमिकल जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी कच्चे माल के आयात में विविधता लाने की योजना बनाई गई है।

साथ ही, भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों की पहचान की जा रही है ताकि Global Trade में भारत की हिस्सेदारी बनी रहे।

बिजली संयंत्रों (Power Plants) के लिए कोयले के स्टॉक की भी समीक्षा की गई, जिसमें पाया गया कि देश के पास पर्याप्त भंडार है और बिजली संकट का कोई खतरा नहीं है।

Whole of Government अप्रोच

मिडिल ईस्ट संकट: प्रधानमंत्री ने संकट के समय में Whole of Government दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

इसके तहत सभी संबंधित मंत्रालय (चाहे वह विदेश मंत्रालय हो, वित्त मंत्रालय हो या पेट्रोलियम मंत्रालय) एक विशेष समूह के रूप में मिलकर काम करेंगे।

कैबिनेट सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे हर विभाग की प्रगति की निरंतर निगरानी करें।

यह सामूहिक प्रयास यह सुनिश्चित करेगा कि वैश्विक उथल-पुथल का असर भारत के विकास की रफ्तार और आम आदमी की जेब पर न पड़े।

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