पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में आयोजित एक जनसभा में नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने खास तौर पर आदिवासी समुदाय, घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाते हुए राज्य की राजनीति को गरमाया।
आदिवासी मुद्दों पर सीधा निशाना
प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी की सरकार पर आदिवासियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।
उनका कहना था कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्य ठप पड़े हैं और उनकी जमीनों पर कथित रूप से सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों ने कब्जा कर लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इन इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है।
घुसपैठ और सांस्कृतिक बदलाव का मुद्दा
मोदी ने राज्य में बढ़ती घुसपैठ को लेकर भी चिंता जताई।
उनके अनुसार, इससे न सिर्फ जनसंख्या संतुलन प्रभावित हो रहा है बल्कि बंगाल की भाषा और सांस्कृतिक पहचान पर भी असर पड़ रहा है।
उन्होंने इस मुद्दे को राज्य की सुरक्षा और पहचान से जोड़कर पेश किया।
भ्रष्टाचार और ‘कट मनी’ का आरोप
प्रधानमंत्री ने All India Trinamool Congress पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना रिश्वत दिए आम लोगों के काम नहीं होते।
उन्होंने राज्य में ‘महाजंगलराज’ जैसे हालात होने की बात कही और दावा किया कि जनता इससे परेशान है।
चुनावी रणनीति और भाजपा का दावा
2026 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति को स्पष्ट करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी आदिवासी अस्मिता और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।
उन्होंने संथाली भाषा के कथित अपमान और मदरसा शिक्षा के बजट को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए।
पुरुलिया में बदलाव की बात
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पुरुलिया, बांकुड़ा और झाड़ग्राम जैसे क्षेत्रों में लोगों का रुख अब बदल रहा है।
उन्होंने कहा कि जनता “बदलाव जरूरी है” जैसे नारों के साथ सत्ता परिवर्तन की इच्छा जता रही है और भाजपा को एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रही है।
पुरुलिया की यह रैली साफ संकेत देती है कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल तेज हो चुका है।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच आदिवासी मुद्दे, घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे विषय चुनावी विमर्श के केंद्र में आते नजर आ रहे हैं।

