महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा स्थित एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने मानवाधिकार कार्यकर्ता और चिकित्सक महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सोमवार 22 जून 2026 को यह फैसला सुनाया।
महरंग के साथ उनके संगठन के दो अन्य प्रमुख सदस्यों सिबगतुल्लाह बलूच और कादिर खान को भी आजीवन कारावास की सजा दी गई है।
अदालत ने इन सभी को वर्ष 2024 में ग्वादर में हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में दोषी माना है, जिसमें एक सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई थी।
फैसले के बाद सड़कों पर उतरे समर्थक
अदालत का फैसला आते ही बलूचिस्तान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। क्वेटा समेत विभिन्न इलाकों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की और महरंग बलोच की रिहाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया का नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव का परिणाम है।
कई जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
कौन हैं महरंग बलोच?
महरंग बलोच पेशे से एक डॉक्टर हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने बलूचिस्तान में मानवाधिकार, लापता लोगों और सरकारी दमन के खिलाफ एक मजबूत आवाज के रूप में पहचान बनाई है।
उन्हें उनके समर्थक ‘बलूचिस्तान की शेरनी’ भी कहते हैं। अपनी बेबाक शैली और खुलकर विरोध दर्ज कराने के कारण वह बलूच युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
महरंग ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर बलूच नागरिकों के अधिकारों की बात की है और कथित तौर पर जबरन गायब किए गए लोगों के परिवारों के साथ खड़ी नजर आई हैं।
यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और वे पाकिस्तान सरकार की आलोचना करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं।
बलूच यकजेहती कमेटी की हैं प्रमुख
महरंग बलोच बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की प्रमुख हैं। यह संगठन बलूचिस्तान में मानवाधिकारों, राजनीतिक अधिकारों और कथित जबरन गायब किए गए लोगों के मुद्दे पर सक्रिय रहता है।
संगठन का दावा है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग करता है, जबकि पाकिस्तान सरकार कई बार इस संगठन की गतिविधियों पर सवाल उठाती रही है।
संगठन के नेताओं का कहना है कि महरंग और अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक कारणों से बनाए गए हैं।
उनका आरोप है कि बलूचिस्तान में असहमति की आवाजों को दबाने के लिए कानून का इस्तेमाल किया जा रहा है।
वकीलों ने किया था न्यायिक प्रक्रिया का बहिष्कार
सूत्रों के मुताबिक, मुकदमे की सुनवाई के दौरान महरंग बलोच और उनके सहयोगियों के वकीलों ने न्यायिक प्रक्रिया का बहिष्कार किया था।
उनका आरोप था कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही है और बचाव पक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
बताया जाता है कि जून 2026 में संगठन के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद संगठन के सदस्यों ने जेल के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
इसी दौरान महरंग और उनके समर्थकों ने भी गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाई थी।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है।
उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति की आवाजों को दबाने के बजाय संवाद और न्यायिक पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
कुछ संगठनों ने यह भी मांग की है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही है।
बलूचिस्तान की राजनीति पर पड़ेगा असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महरंग बलोच को मिली सजा का असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा।
इससे बलूचिस्तान में पहले से मौजूद राजनीतिक असंतोष और गहरा हो सकता है।
यह इलाका लंबे समय से अलगाववाद, सुरक्षा अभियानों और राजनीतिक संघर्षों का केंद्र रहा है।
ऐसे में महरंग बलोच के खिलाफ आया यह फैसला आने वाले दिनों में पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और बलूचिस्तान की स्थिति को किस दिशा में ले जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
फिलहाल इतना तय है कि इस फैसले ने एक बार फिर बलूचिस्तान के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

