Wednesday, January 21, 2026

मैथिली ठाकुर की जीत से क्यों असहज हैं ‘प्रगतिशील’ नारीवादी? सादगी, संस्कार और सफलता का बोझ नहीं झेल पा रहा वाम-मॉडर्न गैंग

मैथिली ठाकुर: अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि महिला होना ही नारीवाद है, जबकि वास्तविक फेमिनिज़्म महिला अधिकारों के प्रति सजग और संवेदनशील होना है।

लेकिन मैथिली ठाकुर की जीत के बाद जिस तरह से कुछ महिलाएँ उन पर निजी हमले कर रही हैं, वह दिखाता है कि वे न महिला सम्मान समझती हैं, न नारी सशक्तिकरण।

टिकट मिलने के समय उनकी उम्र और अनुभव पर प्रश्न उठाए गए, और जैसे ही वे जीत गईं, बिहार के मतदाताओं को अपमानित करने का सिलसिला शुरू हो गया।

‘गायिका रहो’ मानसिकता, महिलाओं की क्षमता सीमित करने का प्रयास

मैथिली के राजनीति में आने पर कुछ समूहों ने कहा कि उन्हें राजनीति नहीं समझ आएगी।

चुनाव जीतने के बाद वही लोग यह कहने लगे कि “एक विद्वान को छोड़ लोगों ने गायिका को चुन लिया।”

यह वही मानसिकता है जो महिलाओं को सीमित दायरे में रखने की कोशिश करती है।

जो महिला उनकी विचारधारा में फिट नहीं बैठती, उसे तुरंत ही अपमानित करना इनका सामान्य तरीका है।

एआई वीडियो, छेड़छाड़ की गई तस्वीरें और नारीवाद की चुप्पी

सोशल मीडिया पर मैथिली ठाकुर की एआई जेनरेटेड, शर्मनाक और अपमानजनक तस्वीरें साझा की जा रही हैं।

कभी सिंदूर लगाकर किसी नेता के साथ दिखाया जाता है, तो कभी फेक तस्वीरों से उनके सम्मान पर चोट की जाती है।

लेकिन जो स्वयं को ‘महिला अधिकारों की संरक्षक’ बताते हैं, वे पूरी तरह चुप हैं।

यह मौन ही साबित करता है कि उनका नारीवाद सिर्फ सुविधा, राजनीति और एजेंडे पर निर्भर है।

वामपंथी लेखिकाओं की कुंठा, मैथिली पर निजी प्रहार

एक वामपंथी लेखिका ने मैथिली पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि वह “पितृसत्ता की मलाई” खा रही हैं।

उन्होंने मैथिली की तुलना कंगना, हेमा मालिनी और स्मृति ईरानी से करते हुए कहा कि उनकी कोई पहचान नहीं।

यह मानसिकता बताती है कि उनके लिए फेमिनिज़्म का अर्थ सिर्फ वही महिला है जो उनकी विचारधारा का अनुसरण करती हो।

संस्कार, संस्कृति और परिवार से जुड़ी महिलाओं को यह हमेशा ‘रूढ़िवादी’ कहकर खारिज करते हैं।

फेमिनिज़्म का मतलब, संस्कृति का विरोध और आधुनिकता का दिखावा

तथाकथित प्रगतिशील नारीवादियों के लिए फेमिनिज़्म अब कुछ प्रतीकों तक सीमित हो चुका है।

इनके लिए आधुनिकता का अर्थ है छोटे कपड़े पहनना, सिगरेट-शराब के साथ तस्वीरें पोस्ट करना, संस्कृति को दकियानूसी बताना और पुरुषों को सामूहिक रूप से दोष देना।

लेकिन जब कोई महिला सादगी, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ी होकर आगे बढ़ती है, तो यह उनकी विचारधारा के ढांचे को हिला देती है।

रिश्ते, परिवार और संस्कृति, इनके लिए ‘जंजीर’, महिलाओं के लिए ‘सामर्थ्य’

इन नारीवादियों के लिए परिवार एक कैद है और विवाह उत्पीड़न।

वे हर महिला की समस्या के लिए पुरुषों को जिम्मेदार ठहराती हैं।

लेकिन खुद महिलाओं की इज़्ज़त को तार-तार होते देखकर भी वे मौन रहती हैं।

आज रिश्तों को तोड़ना और संस्कृति से दूरी को आधुनिकता का प्रतीक माना जाता है।

ऐसे माहौल में मैथिली जैसी सादगीभरी, संस्कारी और पारिवारिक महिला इनकी पूरी थ्योरी को झूठा साबित कर देती हैं।

मैथिली की जीत नहीं, बल्कि उनका व्यक्तित्व असली दिक्कत

वामपंथी समूहों की समस्या मैथिली की लोकप्रियता नहीं है, बल्कि उनका व्यक्तित्व है।

वह सनातन संस्कृति से जुड़ी हैं, संस्कृति व परंपरा का सम्मान करती हैं, साड़ी-बिंदी में आत्मविश्वास से भरी हैं, प्रतिशत सुनाती नहीं, गाली-गलौज नहीं करतीं, और सकारात्मक छवि के साथ युवाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं।

वह एक ऐसी महिला हैं जो आधुनिकता और संस्कृति को संतुलित करके आगे बढ़ रही हैं।

यही बात वामपंथी विचारधारा को चुभती है।

25 साल की उम्र में उपलब्धि, और वामपंथी ‘प्रोग्रेसिव’ वर्ग की जलन

महज 25 साल की उम्र में राजनीति में आकर विशाल जनसमर्थन प्राप्त करना हर महिला के लिए प्रेरणादायक है।

लेकिन यह उपलब्धि उन लोगों के लिए तकलीफ़ बन गई है जो महिलाओं की सफलता को केवल तब स्वीकार करते हैं जब वह उनकी विचारधारा के अनुरूप हो।

मैथिली का आत्मविश्वास, सादगी और परिवार से जुड़ाव उन्हें महिलाओं के लिए एक आदर्श बनाता है। यही बात वामपंथियों के लिए असहनीय है।

मैथिली ठाकुर, सादगी, संस्कार और सफलता का नया प्रतीक

मैथिली ने यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिकता का अर्थ संस्कृति से टूटना नहीं होता।

उन्होंने दिखाया कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी महिलाएँ शिखर छू सकती हैं।

मैथिली न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी एक नई पीढ़ी के लिए आदर्श बन चुकी हैं।

इसी कारण उनके व्यक्तित्व से सबसे अधिक डर उन लोगों को है जो महिलाओं की पहचान को सिर्फ अपने एजेंडे में फिट होते देखना चाहते हैं।

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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