LNG गैस की सप्लाई: केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की सप्लाई और वितरण पर लागू किए गए इमरजेंसी कंट्रोल को वापस लेने का फैसला किया है।
सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता पहले के मुकाबले बेहतर है और सप्लाई व्यवस्था भी सामान्य रूप से काम कर रही है।
ऐसे में अब विशेष नियंत्रण बनाए रखने की जरूरत नहीं रह गई है। इस फैसले के बाद प्राकृतिक गैस का आवंटन और वितरण पहले की तरह सामान्य नियमों के तहत किया जाएगा।
मार्च में लागू किया गया था विशेष प्रावधान
सरकार ने इसी साल मार्च में प्राकृतिक गैस की सप्लाई को लेकर इमरजेंसी प्रावधान लागू किए थे। उस समय अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए यह फैसला लिया गया था।
इन प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार के पास यह अधिकार था कि जरूरत पड़ने पर वह तय कर सके कि किस क्षेत्र को कितनी प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह था कि यदि गैस की कमी होती है तो देश के जरूरी क्षेत्रों में सप्लाई प्रभावित न हो।
सरकार चाहती थी कि आवश्यक सेवाओं को पहले गैस मिले, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जरूरी क्षेत्रों को दी गई थी प्राथमिकता
इमरजेंसी कंट्रोल लागू होने के दौरान उर्वरक उद्योग, सीएनजी, पीएनजी, बिजली उत्पादन और अन्य आवश्यक क्षेत्रों को सबसे पहले प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी।
सरकार का मानना था कि यदि गैस की आपूर्ति कम हो जाती है तो इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देना जरूरी होगा।
उर्वरक उद्योग में गैस का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए किया जाता है। वहीं सीएनजी और पीएनजी का उपयोग लाखों वाहन चालकों और घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है।
बिजली उत्पादन में भी प्राकृतिक गैस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए इन क्षेत्रों में सप्लाई बनाए रखना सरकार की पहली प्राथमिकता थी।
अब हालात सामान्य होने का दावा
सरकार का कहना है कि वर्तमान समय में देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता संतोषजनक है। घरेलू उत्पादन पहले की तरह जारी है और विदेशों से आयात भी सामान्य तरीके से हो रहा है।
इसके अलावा गैस के वितरण से जुड़ी व्यवस्था भी सुचारु रूप से काम कर रही है।
सरकार के अनुसार फिलहाल ऐसा कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आ रहा है, जिससे गैस की भारी कमी होने की आशंका हो।
इसी वजह से इमरजेंसी कंट्रोल को हटाने का फैसला लिया गया है। अब कंपनियां और संबंधित एजेंसियां पहले की तरह सामान्य नियमों के तहत गैस का वितरण करेंगी।
ईरान संकट के बाद बढ़ी थी चिंता
मार्च में इमरजेंसी कंट्रोल लागू करने के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव एक बड़ी वजह माना गया था। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
उस समय आशंका जताई जा रही थी कि यदि इस मार्ग पर कोई बड़ी रुकावट आती है तो दुनिया के कई देशों में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
इसी संभावना को देखते हुए भारत सरकार ने पहले से तैयारी करते हुए गैस की सप्लाई पर विशेष नियंत्रण लागू किया था, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जरूरी क्षेत्रों को पर्याप्त गैस मिलती रहे।
समझौते के बाद सुधरे हालात
अब अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले जैसी चिंता नहीं रही है। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और हालात पहले की तुलना में काफी शांत माने जा रहे हैं।
इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है और गैस की आपूर्ति सामान्य होने लगी है।
इसी बदले हुए माहौल को देखते हुए भारत सरकार ने भी इमरजेंसी कंट्रोल हटाने का फैसला लिया है। हालांकि सरकार अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
यदि भविष्य में फिर किसी तरह का बड़ा संकट पैदा होता है तो जरूरत के अनुसार नए कदम उठाए जा सकते हैं।

