अयातुल्ला अली खामेनेई: ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम विदाई में भारत की भागीदारी पर गहरा आभार व्यक्त किया है।
भारत स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि इस कठिन समय में भारत सरकार और भारतीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति दोनों देशों के बीच दशकों पुराने विश्वास,
आपसी सम्मान और सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती को दर्शाती है।
दूतावास के अनुसार, शोक की इस घड़ी में भारत द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता को ईरान लंबे समय तक याद रखेगा।
भारत ने दी श्रद्धांजलि
भारत की ओर से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए तेहरान पहुंचा।
इस प्रतिनिधिमंडल में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा शामिल थे।
दोनों नेताओं ने दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की और ईरानी नेतृत्व के प्रति संवेदना व्यक्त की।
ईरान का कहना है कि खामेनेई का निधन इस वर्ष फरवरी में तेहरान पर हुए अमेरिका और इजराइल के हमलों के दौरान हुआ था।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती सहित भारत के विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया।
इनमें सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के कई प्रमुख धार्मिक नेता शामिल थे। ईरानी दूतावास ने इसे भारत की धार्मिक
सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बताते हुए कहा कि अलग-अलग वर्गों की उपस्थिति ने दोनों देशों के मानवीय रिश्तों को और मजबूत किया है।
सोशल मीडिया पर ईरानी दूतावास ने क्या कहा?
ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में भारत सरकार, भारतीय जनता और सभी भारतीय प्रतिनिधियों का विशेष रूप से धन्यवाद किया।
पोस्ट में कहा गया कि भारतीय नेताओं, सांसदों, विद्वानों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की सम्मानजनक मौजूदगी ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मित्रता को नई मजबूती दी है।
दूतावास ने इसे केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सच्ची मित्रता, संवेदना और आपसी सम्मान का उदाहरण बताया।
साथ ही यह भी कहा गया कि ईरान के लोग इस सहयोग और समर्थन को कभी नहीं भूलेंगे और भविष्य में यही विश्वास दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आधार बनेगा।
तेहरान में शुरू हुई अंतिम यात्रा, लाखों लोगों की उमड़ी भीड़
ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार सोमवार, 6 जुलाई 2026 की सुबह तेहरान में शुरू हुआ।
अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक अंतिम यात्रा 10 से 12 घंटे तक चलने की संभावना है।
इसमें लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है, जिसके चलते इसे ईरान के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक सभाओं में से एक माना जा रहा है।
अंतिम यात्रा के दौरान खामेनेई का ताबूत राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर एक विशेष वाहन पर रखा गया था, जिसे पारंपरिक शैली में सजाया गया।
तेहरान की सड़कों पर भारी संख्या में लोग अपने दिवंगत नेता को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़े।
कई लोग ताबूत के करीब पहुंचने और उसे स्पर्श करने की कोशिश करते दिखाई दिए।
वहीं कुछ श्रद्धालुओं ने अपने स्कार्फ और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं वाहन की ओर बढ़ाईं ताकि उन्हें ताबूत से स्पर्श कराया जा सके।
ईरान में इसे आशीर्वाद और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।
मशहद में होगा सुपुर्द-ए-खाक, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भीषण गर्मी और भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। जगह-जगह पानी का छिड़काव किया गया ताकि लोगों को गर्मी से राहत मिल सके।
सुरक्षा एजेंसियां लगातार भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी रहीं और लोगों से शांति बनाए रखने, धक्का-मुक्की से बचने तथा निर्धारित मार्गों का पालन करने की अपील करती रहीं।
अधिकारियों ने बताया कि आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की भी तैनाती की गई थी।
रिवोल्यूशनरी गार्ड के जनरल हसन हसनज़देह के अनुसार अंतिम यात्रा तेहरान की प्रमुख सड़कों से गुजरते हुए मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक जाएगी।
इसके बाद अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को उनके जन्मस्थान मशहद ले जाया जाएगा, जहां उन्हें इमाम रजा की दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
ईरानी सरकार ने राष्ट्रीय शोक के मद्देनजर कई सार्वजनिक कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है और राजधानी सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा यातायात व्यवस्था लागू की गई है।
सरकार का कहना है कि यह अंतिम संस्कार केवल एक राष्ट्रीय समारोह नहीं, बल्कि देश की एकजुटता, अपने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय भावनाओं की अभिव्यक्ति का प्रतीक है।

