ज्योतिष सम्मेलन: ज्ञान के स्थान पर व्यावसायिक आयोजन?
देशभर में इन दिनों ज्योतिष सम्मेलनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें से अनेक आयोजन ऐसे लोगों और टैरो कार्ड पाठकों द्वारा किए जा रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य विद्या का विस्तार नहीं, बल्कि धन कमाना और प्रभावशाली छवि बनाना दिखाई देता है।
इन आयोजनों में शुल्क लेकर वरिष्ठ और प्रतिष्ठित ज्योतिषियों को सम्मानित किया जाता है। चिंताजनक स्थिति यह है कि कुछ महीनों का सामान्य प्रशिक्षण लेने वाला व्यक्ति धनलोलुप आयोजकों से मिलकर सम्मेलन करा देता है और सीमित उपलब्धि वाले लोगों को बड़ी उपाधियां बांटता है।
कई लोग समाज और अपने ग्राहकों पर प्रभाव डालने के लिए दिखावटी गतिविधियां करते हैं। वे किसी प्रसिद्ध ज्योतिषी के साथ तस्वीर खिंचवाकर उसे प्रमाण की तरह प्रस्तुत करते हैं, जबकि उनके अध्ययन, साधना, शोध और वास्तविक क्षमता का कोई ठोस आधार दिखाई नहीं देता।
पैसे देकर सम्मान पाने की प्रवृत्ति
वर्षों से ज्योतिष सेवा कर रहे कुछ लोग भी क्षणिक प्रसिद्धि और छोटे स्वार्थ के कारण किसी मंच पर पहुंच जाते हैं। वे शुल्क देकर ऐसे व्यक्तियों से सम्मान ग्रहण करते हैं, जिनका ज्योतिष से संबंध नहीं होता, फिर उसे उपलब्धि बनाकर प्रचारित करते हैं।
फिल्मी कलाकारों और सस्ती लोकप्रियता वाले चेहरों से ज्योतिषीय सम्मान ग्रहण करना विद्या की प्रतिष्ठा बढ़ाने के बजाय उसे हल्का बनाता है। ऐसे आयोजन ज्ञान की गरिमा के स्थान पर प्रदर्शन, तस्वीर, प्रचार और कृत्रिम प्रतिष्ठा को अधिक महत्व देने लगे हैं।
सम्मान ग्रहण करने वाले अनेक लोग बाद में तस्वीरों और प्रमाणपत्रों को अपने सामाजिक माध्यमों पर प्रदर्शित करते हैं। इससे सामान्य व्यक्ति भ्रमित होकर उन्हें बड़ा विद्वान मान लेता है, जबकि उस सम्मान के पीछे योग्यता के बजाय शुल्क, संपर्क और आयोजन का समझौता होता है।
उपाधियों का अनियंत्रित वितरण
ज्योतिष सम्मेलनों में अब ज्ञानवर्धक चर्चा, सूत्रों की व्याख्या और नए शोध की प्रस्तुति लगभग गायब होती जा रही है। बिना किसी जांच के लोगों को ज्योतिष महर्षि और ज्योतिष गुरु जैसी उपाधियां दे दी जाती हैं, जिससे इन पदवियों का महत्व समाप्त होता है।
एक विद्वान के अनुभव के अनुसार, किसी सम्मेलन में प्रसिद्ध ज्योतिषी अपने कई शिष्यों के साथ अतिथि बनकर पहुंचे। उन्होंने अपने साथ आए एक व्यक्ति को ज्योतिष गुरु की उपाधि दिलवा दी, बाद में पता चला कि वह व्यक्ति उनका चालक था।
ऐसे प्रसंग बताते हैं कि उपाधियों के लिए न अध्ययन की अनिवार्यता बची है और न अनुभव की जांच। आयोजक जिसकी सिफारिश स्वीकार कर लें, उसे बड़ी पदवी मिल सकती है। इससे वास्तविक आचार्यों, शोधकर्ताओं और साधकों के वर्षों के परिश्रम का अवमूल्यन होता है।
मंचों पर चुनिंदा लोगों का कब्जा
कुछ आयोजनों में चुनिंदा लोग हर मंच पर पहुंचकर स्थायी रूप से बैठ जाते हैं। इन्हें मंच पर कब्जा जमाने वाले समूह के रूप में देखा जाता है। वही अन्य ज्योतिषियों को सम्मानित करते हैं, जबकि वास्तविक विद्वानों और गंभीर विषयों को स्थान नहीं मिलता।
इन मंचों पर प्रायः वही चेहरे बार बार दिखाई देते हैं, जो आयोजकों के निकट होते हैं या स्वयं ऐसे कार्यक्रमों का हिस्सा बने रहते हैं। योग्य व्यक्ति दर्शक बनकर रह जाते हैं और सम्मान वितरण कुछ परिचित लोगों के बीच घूमता रहता है।
ग्रहगोचर की भी अनदेखी
सम्मेलन आयोजित करते समय शुभ समय, ग्रहगोचर और ज्योतिषीय मान्यताओं पर भी ध्यान नहीं दिया जाता। सुविधा के अनुसार किसी भी दिन आयोजन कर दिया जाता है। गुरु और राहु की युति जैसे संकेतों की उपेक्षा करना स्वयं ज्योतिष पर अविश्वास जैसा प्रतीत होता है।
जो लोग ग्रहों, मुहूर्त और समय की उपयुक्तता पर दूसरों को सलाह देते हैं, वही अपने आयोजनों में इन सिद्धांतों को महत्व नहीं देते। सुविधा को शास्त्रीय विचार से ऊपर रखने पर सम्मेलन की विश्वसनीयता और आयोजकों की कथनी करनी दोनों प्रश्नों में घिरती हैं।
संदिग्ध लोगों के हाथों में ज्योतिष
ज्योतिष जगत के वरिष्ठ विद्वानों और संस्थाओं को इस प्रवृत्ति पर गंभीर विचार करना चाहिए। स्थिति नहीं बदली तो कोई भी संदिग्ध या आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति पैसे देकर उपाधि प्राप्त कर सकता है और समाज में ज्योतिष को गलत दिशा में ले जा सकता है।
कई घटनाओं में ठग स्वयं को ज्योतिषी बताकर यजमानों को भ्रमित करते हैं और उनसे धन ऐंठते हैं। ऐसे लोगों के कारण पूरी विद्या बदनाम होती है। जब अपात्र व्यक्ति ज्योतिष के नाम पर छल करेंगे, तब समाज का विश्वास और कल्याण दोनों प्रभावित होंगे।
अयोग्य व्यक्ति जब बड़ी उपाधि और प्रसिद्ध लोगों के साथ तस्वीर लेकर जनता के बीच पहुंचता है, तब उसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। यही कृत्रिम प्रतिष्ठा उसे भय, प्रलोभन और काल्पनिक उपायों के माध्यम से लोगों का आर्थिक शोषण करने का अवसर देती है।
प्रतिभागियों की योग्यता की जांच जरूरी
आयोजकों की जिम्मेदारी है कि सम्मेलन से पहले प्रत्येक प्रतिभागी की योग्यता की जांच करें। जो व्यक्ति स्वयं को ज्योतिषी बताता है, उससे शास्त्रीय ज्ञान, अध्ययन, अनुभव या शोध का प्रमाण मांगा जाना चाहिए। नकली लोग वास्तविक साधकों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
जांच केवल प्रमाणपत्र देखने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रतिभागियों से मूल सिद्धांतों, गणना, फलित, संहिता, प्रश्न, मुहूर्त अथवा उनके बताए विशेषज्ञ क्षेत्र से संबंधित जानकारी ली जानी चाहिए। इससे वास्तविक विद्वान और केवल प्रचार के सहारे चलने वाले व्यक्ति अलग हो सकेंगे।
सम्मान वितरण में समाप्त होती ज्योतिष चर्चा
जहां एक दिन में पचास से अधिक लोगों को अलग अलग उपाधियां दी जाती हैं, वहां गंभीर ज्योतिष चर्चा के लिए समय बचना कठिन है। ऐसे सम्मेलनों का मुख्य एजेंडा प्रमाणपत्र, ट्रॉफी, उपहार और औपचारिक संतुष्टि तक सीमित होकर रह जाता है।
मंच पर बैठे प्रतिष्ठित अतिथियों को गूढ़ विषयों पर बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। संभव है कि उन्हें केवल नाम, सम्मान या आर्थिक आकर्षण के कारण बुलाया जाता हो। कार्यक्रम की संरचना विद्वत्ता के बजाय भीड़, प्रदर्शन और वितरण केंद्रित बन जाती है।
सम्मेलन का अधिकांश समय नाम पुकारने, मंच पर बुलाने, माल्यार्पण करने, तस्वीर खिंचवाने और प्रमाणपत्र देने में समाप्त हो जाता है। विषय आधारित व्याख्यान, प्रश्नोत्तर, शोधपत्र प्रस्तुति और शास्त्रीय मतभेदों पर गंभीर संवाद के लिए कोई सुव्यवस्थित अवसर नहीं बचता।
जलपान और तालियों तक सीमित सहभागिता
सामने बैठे अनेक तथाकथित ज्योतिषी ज्ञान सुनने के बजाय जलपान स्वीकार करने, हर सम्मानित व्यक्ति के लिए ताली बजाने और आपसी हंसी मजाक में समय बिताते हैं। इसी कारण ज्योतिष क्षेत्र की छवि बदनामी, दिखावे और अविश्वसनीयता से घिरती जा रही है।
प्रतिभागियों की रुचि विद्या ग्रहण करने के स्थान पर अपनी बारी आने, प्रमाणपत्र प्राप्त करने और मंच पर तस्वीर खिंचवाने में अधिक रहती है। ऐसे वातावरण में न गंभीर प्रश्न उठते हैं, न विचारों का परीक्षण होता है और न किसी नए निष्कर्ष तक पहुंचा जाता है।
ज्योतिष की प्रतिष्ठा बचाने की आवश्यकता
ज्योतिष जगत से जुड़े गंभीर और सच्चे लोग इस गिरावट को अच्छी तरह समझते हैं। आवश्यकता ऐसे सम्मेलनों की है जहां शोध, शास्त्र, अनुभव, नैतिकता और जनहित केंद्र में हों। अन्यथा सम्मान समारोह बढ़ेंगे, लेकिन ज्योतिष की वास्तविक प्रतिष्ठा लगातार घटती जाएगी।
वरिष्ठ विद्वानों को भी यह तय करना होगा कि वे किन मंचों पर उपस्थित हों और किससे सम्मान स्वीकार करें। उनकी भागीदारी किसी आयोजन को विश्वसनीयता देती है। इसलिए केवल संबंध, प्रचार या आर्थिक लाभ के आधार पर संदिग्ध कार्यक्रमों का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए।
ज्योतिष सम्मेलन का उद्देश्य योग्य विद्वानों के बीच संवाद, नए अनुसंधान की समीक्षा, दुर्लभ सूत्रों की व्याख्या और समाज के लिए उपयोगी मार्गदर्शन होना चाहिए। जब तक आयोजन इस मूल उद्देश्य की ओर नहीं लौटेंगे, ज्योतिष के नाम पर चल रहा दिखावा बढ़ता रहेगा।

