IVF: आईवीएफ आज उन महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद बन चुका है जो किसी भी वजह से नेचुरल तरीके से प्रेगनेंसी नहीं कर पातीं।
भारत में भी हजारों कपल्स इस तकनीक की मदद से पैरेंट बनने का अपना सपना पूरा कर रहे हैं।
हालाँकि आईवीएफ प्रेगनेंसी के साथ एक बात और जुड़ जाती है जुड़वा बच्चों की संभावना नेचुरल प्रेगनेंसी के मुकाबले काफी बढ़ जाती है।
ऐसे में ज़्यादातर कपल्स के मन में एक ही सवाल घुमने लगता है कि अगर IVF से जुड़वा बच्चे कंसीव हो गए हों, तो क्या नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है या फिर सी-सेक्शन ही करवाना पड़ेगा?
IVF: सी-सेक्शन को ज्यादा सुरक्षित
ज़्यादातर माएं चाहती हैं कि उनकी डिलीवरी सामान्य तरीके से हो, क्योंकि यह शरीर के प्राकृतिक प्रोसेस के करीब होता है और सुनने में भी आसान लगता है, लेकिन हर प्रेगनेंसी एक जैसी नहीं होती,
खासकर तब जब IVF के जरिए ट्विन्स यानी दो बच्चे गर्भ में हों। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि IVF प्रेगनेंसी को सामान्यत: हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा जाता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि यह प्रेगनेंसी मेडिकल सपोर्ट के जरिए होती है और इसमें माँ व बच्चों दोनों की सेहत पर पहले से ही थोड़ी ज्यादा निगरानी रखी जाती है।
ऐसे में अगर गर्भ में दो बच्चे हों, तो जोखिम और बढ़ जाता है, जिससे डॉक्टर सामान्य डिलीवरी की जगह सी-सेक्शन को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
मां की जान पर भी खतरा
अक्सर लोग मान लेते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी ही सबसे सही विकल्प है, लेकिन ट्विन प्रेगनेंसी में परिस्थितियाँ काफी अलग होती हैं।
जब गर्भ में दो बच्चे हों तो लेबर के दौरान कई तरह की जटिलताएँ सामने आ सकती हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को सांस लेने में दिक्कत, दिल की धड़कन कम या तेज होना या लेबर लंबा चलने के कारण उनका तनाव में आ जाना शामिल हो सकता है।
इसके अलावा प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएँ भी अचानक पैदा हो सकती हैं, जिससे माँ की जान पर भी खतरा बढ़ जाता है।
कई बार ऐसा भी होता है कि लेबर शुरू तो होता है, लेकिन बीच में किसी इमरजेंसी की स्थिति बन जाती है और तुरंत ऑपरेशन करना पड़ता है।
इन्हीं सभी वजहों से IVF ट्विन प्रेगनेंसी में डॉक्टर्स नॉर्मल डिलीवरी के बजाय सी-सेक्शन को ज्यादा सुरक्षित और कंट्रोल्ड प्रक्रिया बताते हैं।
सी-सेक्शन में डॉक्टर पूरी तैयारी के साथ ऑपरेशन करते हैं, बच्चे सुरक्षित तरीके से बाहर लाए जाते हैं और माँ की सेहत पर भी बेहतर निगरानी रखी जा सकती है।
यही कारण है कि मेडिकल दृष्टिकोण से सी-सेक्शन को ट्विन प्रेगनेंसी में सुरक्षित माना जाता है।
नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है खतरनाक
बहुत सी महिलाएं सी-सेक्शन सुनते ही घबरा जाती हैं, और कई तो यह सोचकर दुखी भी हो जाती हैं कि शायद उनमें कोई कमी है,
लेकिन एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सी-सेक्शन का मतलब किसी भी महिला की क्षमता या ताकत पर सवाल उठाना बिल्कुल नहीं होता।
यह एक मेडिकल निर्णय होता है जो माँ और बच्चों दोनों की जान बचाने के लिए लिया जाता है।
कई बार डॉक्टरों के पास ऑपरेशन के अलावा कोई विकल्प ही नहीं रहता, क्योंकि नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश करना माँ और बच्चों दोनों को खतरे में डाल सकता है।
ऐसा भी देखा गया है कि सी-सेक्शन के बाद भी महिलाओं का मदरहुड अनुभव बिल्कुल सामान्य रहता है और वे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।
मां है मजबूत
आईवीएफ होने का यह मतलब नहीं है कि महिला कमजोर है या वह नेचुरली डिलीवर नहीं कर सकती।
बल्कि यह एक आधुनिक तकनीक है जिसने लाखों परिवारों के जीवन में खुशियाँ भरी हैं,
लेकिन जब बात जुड़वा बच्चों की हो, खासकर IVF ट्विन प्रेगनेंसी की, तो हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाना ज़रूरी होता है।
डॉक्टर हमेशा माँ और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए उनकी सलाह सुनना सबसे बेहतर होता है।
आखिरकार, माँ और बच्चों का सुरक्षित रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है, चाहे डिलीवरी नॉर्मल हो या सी-सेक्शन।

