ईरान पर फिर हमले की चेतावनी: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव को फिर बढ़ा दिया है।
नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि इजरायल की सुरक्षा को खतरा हुआ तो उनकी सरकार ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान चलाने से पीछे नहीं हटेगी।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका लगातार दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
नेतन्याहू ने दोहराया सख्त रुख
इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा।
उन्होंने दावा किया कि पहले किए गए सैन्य अभियानों ने इजरायल को संभावित परमाणु खतरे से बचाया है।
उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भी ऐसी आवश्यकता महसूस हुई तो इजरायल तीसरी बार भी कार्रवाई करने के लिए तैयार रहेगा।
नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि उनकी सरकार किसी ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते को स्वीकार नहीं करेगी, जिसमें ईरान की परमाणु क्षमता बनी रहे।
उनके अनुसार, इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार रखता है और जरूरत पड़ने पर बिना किसी बाहरी दबाव के कदम उठाएगा।
अमेरिका ने बरतने को कहा संयम
इजरायल के आक्रामक रुख के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयम बरतने की सलाह दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय हालात को और गंभीर बना सकती है।
उनका मानना है कि इस समय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि संघर्ष को टाला जा सके।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि इजरायल लगातार सैन्य अभियान चलाता रहा तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना और अलगाव का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी प्रशासन फिलहाल ईरान के साथ वार्ता को आगे बढ़ाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।
ईरान ने भी दिया सख्त जवाब
इजरायल की चेतावनी के बाद ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि उनकी सरकार बातचीत को प्राथमिकता देती है,
लेकिन यदि वार्ता सफल नहीं होती है तो देश युद्ध के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
उनके अनुसार, यदि किसी देश ने हमला करने की कोशिश की तो उसका उचित जवाब दिया जाएगा।
परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया अपना पक्ष
गालिबाफ ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि उनका देश परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का सदस्य है और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में अपने सभी परमाणु कार्यक्रम संचालित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यूरेनियम संवर्धन ईरान का वैध अधिकार है और यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप किया जा रहा है।
ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
हालांकि, इजरायल और कई पश्चिमी देश इस दावे पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं और उन्हें आशंका है कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ी चिंता
इजरायल और ईरान के ताजा बयानों ने पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है।
एक ओर अमेरिका बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है,
वहीं दूसरी ओर दोनों देशों की ओर से आ रहे सख्त बयान किसी भी समय हालात को और गंभीर बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए और दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ा, तो इसका असर केवल इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा।
इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

