Internet Addiction In Kids: राजस्थान इस समय बाल अपराध की दो ऐसी खौफनाक घटनाओं से दहल उठा है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। कोटा और जयपुर में हाल ही में हुए दो मासूम बच्चों के कत्ल ने हर किसी का दिल दहला दिया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन हत्याओं के पीछे कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि खुद नाबालिग बच्चे हैं।
महज 11 से 16 साल की उम्र के बच्चों का इस कदर हिंसक हो जाना समाज के लिए एक बेहद गंभीर और डरावनी चेतावनी है। आखिर मासूम दिलों में इतनी नफरत और क्रूरता कहाँ से आ रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब तीव्र हताशा (फ्रस्ट्रेशन) और खोते बचपन का नतीजा है, जहाँ बच्चे अब उम्र के पड़ावों को छोड़कर सीधे हिंसक वयस्क बन रहे हैं।
जयपुर की घटना: मामूली बात और तीन दोस्तों की बेरहमी
Internet Addiction In Kids: पहला मामला जयपुर के मुहाना इलाके का है, जहाँ 11 वर्षीय अजमत को किसी और ने नहीं, बल्कि उसके ही तीन हमउम्र दोस्तों ने मौत के घाट उतार दिया।
इनमें से दो की उम्र तो 12 साल से भी कम है। बीते 14 जून से गायब अजमत की तलाश जब 25 जून को नाले में मिली उसकी क्षत-विक्षत लाश पर खत्म हुई, तो पुलिस भी सन्न रह गई।
मासूम का सिर धड़ से अलग किया जा चुका था। जाँच में सामने आया कि महज एक छोटी सी बहस के बाद इन नाबालिगों ने इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है।
कोटा की वारदात: पोर्न की लत और वहशीपन की इंतेहा
Internet Addiction In Kids: इससे पहले शिक्षा नगरी कोटा में भी ऐसी ही एक रूह कंपाने वाली घटना सामने आई थी। वहाँ रेलवे कॉलोनी के पास 26 मई को एक 10 साल के बच्चे का कुचला हुआ शव झाड़ियों में मिला था।
इस हत्या को उसके ही 16 साल के दोस्त ने अंजाम दिया था। आरोपी किशोर को पोर्न देखने की लत थी और उसने मर्डर से पहले मासूम के साथ कुकर्म किया। दोबारा विरोध करने पर उसने पत्थर से वार कर बच्चे की जान ले ली।
इस हैवानियत की हद यहीं खत्म नहीं हुई, उसने लाश के साथ दोबारा दुराचार किया और पहचान छुपाने के लिए चेहरे को सिगरेट और पत्तों से जलाने की कोशिश की।
इस खौफनाक वारदात के बाद वह आराम से घर जाकर नहाया, खाना खाया और सो गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
क्यों खत्म हो रहा बच्चों का बचपन?
Internet Addiction In Kids: राजस्थान विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर और समाजशास्त्री डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार, ऐसी डरावनी घटनाएं हमारी प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था की नाकामियों का आइना हैं।
आज बाजारवाद और अनियंत्रित मोबाइल स्क्रीन ने बच्चों से उनका खेल-कूद और मासूमियत छीन ली है।
इंटरनेट पर परोसी जा रही हिंसक और अश्लील सामग्री बच्चों के दिमाग को सीधे प्रभावित कर रही है, जिससे उनके भीतर की संवेदनशीलता खत्म हो रही है और वे समय से पहले परिपक्व (एडल्ट) हो रहे हैं।
ऑनलाइन हिंसा और अकेलेपन का खतरनाक कॉकटेल
Internet Addiction In Kids: विशेषज्ञ बताते हैं कि डिजिटल दुनिया में हिंसा को बहुत ही आकर्षक और ‘ग्लैमरस’ तरीके से परोसा जा रहा है।
यौन हिंसा और अपराधों की ऑनलाइन मौजूदगी ने बच्चों के कोमल दिमाग पर गहरा और आक्रामक असर डाला है। आज का बच्चा अकेलेपन (आइसोलेशन) का शिकार है, जिससे उसमें धैर्य खत्म हो रहा है और कुंठा (फ्रस्ट्रेशन) बढ़ रही है।
नतीजा हमारे सामने सुसाइड, मॉब लिंचिंग और ऐसे जघन्य बाल अपराधों के रूप में आ रहा है।
अगर समाज, माता-पिता और सरकार ने मिलकर बच्चों को इस डिजिटल दलदल से बाहर नहीं निकाला, तो आने वाला कल इससे भी ज्यादा भयावह हो सकता है।
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