Wednesday, January 21, 2026

बहराइच के अवैध मदरसे में दबिश, बाथरूम से 40 नाबालिग लड़कियां बरामद, गुप्त फंडिंग की भी जांच

बहराइच

छापेमारी के दौरान चौंकाने वाले हालात

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के पयागपुर तहसील अंतर्गत पहलवारा गांव स्थित पट्टीहाट चौराहे के पास अवैध रूप से संचालित एक मदरसे पर एसडीएम अश्विनी पांडेय ने पुलिस बल के साथ छापेमारी की।

जांच के दौरान मदरसा संचालक ने पहले गेट खोलने से इनकार कर दिया। बाद में पुलिस फोर्स को बुलाकर जब परिसर में प्रवेश किया गया तो वहां से बाथरूम में छिपाई गईं लगभग 40 नाबालिग लड़कियां बरामद की गईं।

बाथरूम में छिपी लड़कियों का खुलासा

एसडीएम ने बताया कि पूछताछ में लड़कियों ने स्वीकार किया कि वे यहां तालीम लेने आती थीं। हालांकि देर शाम तक इतनी बड़ी संख्या में लड़कियों का मदरसे में रहना कई सवाल खड़े करता है।

दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि मदरसा पूरी तरह अवैध रूप से संचालित हो रहा था और इसके पास किसी भी प्रकार की वैध अनुमति या प्रमाणपत्र नहीं थे।

प्रशासन ने मदरसे को किया बंद

मौके पर की गई जांच के बाद उप जिलाधिकारी और पयागपुर पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी जिलाधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को दी।

अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी खालिद ने बताया कि बरामद हुई सभी लड़कियों को उनके परिजनों को सुरक्षित सौंप दिया गया है।

वहीं, दस्तावेजों की अनुपस्थिति के चलते मदरसे को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है।

फंडिंग के स्रोत पर उठे सवाल

जांच में यह भी सामने आया कि मदरसा बाहरी फंडिंग से संचालित हो रहा था। इस संबंध में बड़े पैमाने पर वित्तीय स्रोतों की जांच की जा रही है।

प्रशासन को संदेह है कि मदरसे को विदेश से फंडिंग प्राप्त हो रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर भारत-नेपाल सीमा से सटे जनपदों में अवैध मदरसों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।

ऐसे में पयागपुर का यह मामला आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई की दिशा में इशारा करता है।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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