Saturday, May 16, 2026

Donald Trump China Visit: जासूसी के डर से ट्रंप के स्टाफ ने कचरे में फेंके चीनी गिफ्ट, फोन भी तोड़े; जानें ‘डिजिटल लॉकडाउन’ की पूरी कहानी

Donald Trump China Visit: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय Donald Trump China Visit (चीन यात्रा) खत्म हो चुकी है और वह अपने देश वापस लौट चुके हैं।

इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन को लेकर ट्रंप ने खुद कहा कि यह एक अविश्वसनीय यात्रा रही और इसके बहुत अच्छे नतीजे निकले हैं।

लेकिन इस वीआईपी दौरे पर कैमरों के सामने जो दोस्ती और मुस्कुराहटें दिख रही थीं, उसके पीछे एक बेहद खतरनाक और अदृश्य ‘डिजिटल जंग‘ चल रही थी।

सुरक्षा और जासूसी के इतने कड़े इंतजाम देखे गए कि अमेरिका लौटते वक्त एयर फोर्स वन (Air Force One) विमान में बैठने से पहले अमेरिकी अधिकारियों और पत्रकारों को मिले सभी चीनी गिफ्ट, क्रेडेंशियल्स और सरकारी पिन को एयरपोर्ट पर ही कचरे के डिब्बे में फेंकना पड़ा।

सीढ़ियों के पास रखा गया डस्टबिन, लागू हुआ ‘नो चाइना आइटम’ रूल

Donald Trump China Visit: यह चौंकाने वाला वाकया तब सामने आया जब न्यूयॉर्क पोस्ट की व्हाइट हाउस कोरेसपोंडेंड एमिली गुडिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इसकी जानकारी दी। एमिली खुद राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस दौरे पर मौजूद थीं।

उन्होंने बताया कि अमेरिका लौटने के लिए एयर फोर्स वन विमान पर सवार होने से पहले व्हाइट हाउस स्टाफ ने एक सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया।

विमान की सीढ़ियों के ठीक नीचे एक बड़ा डस्टबिन (कूड़ेदान) रखा गया था।

सभी अमेरिकी अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और पत्रकारों को साफ आदेश था कि वे चीन से मिली कोई भी चीज विमान के अंदर नहीं ले जा सकते।

सुरक्षा के इस कड़े नियम के चलते टीम को चीन की तरफ से मिले सरकारी क्रेडेंशियल्स, पास, उपहार और यहाँ तक कि कोट पर लगाने वाले डेलीगेशन पिन भी वहीं डस्टबिन में फेंकने पड़े।

दिलचस्प बात यह है कि चीन में कार्यक्रम के दौरान खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, एप्पल के मालिक टिम कुक और एनवीडिया के प्रमुख जेन्सेन हुआंग जैसे दिग्गज इन पिनों को लगाए हुए दिखे थे, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के आगे किसी की एक न चली।

पर्सनल फोन-लैपटॉप घर छोड़े, सिर्फ ‘बर्नर फोन’ का हुआ इस्तेमाल

Donald Trump China Visit: साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन एक ‘मास सर्विलांस स्टेट’ है, यानी वहाँ हर एक नागरिक और विदेशी की हर गतिविधि पर सरकार की सीधी नजर रहती है।

चीन में मोबाइल और लैपटॉप से डेटा चोरी करना या उनमें जासूसी वायरस डालना बेहद आसान माना जाता है। यहाँ तक कि फोन बंद होने पर भी उसे हैक किया जा सकता है।

इसी बड़े खतरे से बचने के लिए अमेरिकी डेलिगेशन का कोई भी सदस्य अपना असली पर्सनल फोन या लैपटॉप चीन लेकर ही नहीं गया था।

चीन में काम चलाने के लिए उन्हें कुछ दिनों वाले अस्थाई ‘बर्नर फोन’ (Temporary Phones) दिए गए थे।

यात्रा खत्म होते ही इन सभी फोन्स को भी पूरी तरह तोड़कर नष्ट करने का आदेश दिया गया, ताकि भविष्य में भी जासूसी का कोई खतरा न रहे।

होटल के वाई-फाई और सार्वजनिक चार्जर से बनाई दूरी

Donald Trump China Visit: अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने अपने पूरे दल को सख्त चेतावनी दी थी कि चीन में कोई भी इलेक्ट्रॉनिक बातचीत या नेटवर्क सुरक्षित नहीं है।

इसी वजह से अधिकारियों को होटल के वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट करने से साफ मना किया गया था।

इसके अलावा किसी भी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन का इस्तेमाल करने पर भी रोक थी।

ऐसा ‘जूस जैकिंग’ (Juice Jacking) के खतरे को देखते हुए किया गया था, जिसमें हैकर्स चार्जिंग पोर्ट या केबल के जरिए फोन का पूरा डेटा उड़ा लेते हैं।

अमेरिकी दल केवल अमेरिका से अपने साथ लाए गए प्रमाणित चार्जर और पावर बैंक का ही इस्तेमाल कर रहा था।

इस ‘डिजिटल लॉकडाउन’ के कारण अधिकारियों को काम करने में काफी परेशानी भी हुई क्योंकि वे अपने क्लाउड स्टोरेज या पर्सनल अकाउंट्स नहीं खोल पा रहे थे।

आलम यह था कि कई बेहद संवेदनशील संदेशों को डिजिटल रूप से भेजने के बजाय, अधिकारियों ने आपस में आमने-सामने बात करके साझा किया।

बंद दरवाजों के पीछे तीखी बहस और सुरक्षा पर टकराव

भले ही सार्वजनिक तौर पर डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात बहुत सौहार्दपूर्ण दिख रही थी, लेकिन पर्दे के पीछे दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों के बीच भारी तनाव चल रहा था।

जब अमेरिकी दल बीजिंग के मशहूर ‘टेंपल ऑफ हीवन’ देखने गया, तो चीनी सुरक्षाकर्मियों ने अमेरिका के एक सुरक्षा एजेंट को अंदर जाने से रोक दिया क्योंकि उसके पास नियम के मुताबिक हथियार था।

इस बात पर दोनों पक्षों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक तीखी बहस हुई।

यही नहीं, जब ट्रंप वापस लौटने लगे तब भी चीनी सुरक्षाकर्मियों ने अमेरिकी पत्रकारों की गाड़ियों को राष्ट्रपति के काफिले में शामिल होने से रोक दिया था, जिसके बाद अमेरिकी अफसरों को बीच-बचाव करके रास्ता साफ कराना पड़ा।

‘हम भी उन पर जमकर जासूसी करते हैं’- डोनाल्ड ट्रंप

चीन से वापसी के दौरान जब एयर फोर्स वन विमान हवा में था, तब पत्रकारों ने डोनाल्ड ट्रंप से पूछा कि क्या उन्होंने शी जिनपिंग के सामने साइबर हमलों का मुद्दा उठाया था? इस पर ट्रंप ने खुलकर स्वीकार किया कि दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ जासूसी अभियानों में लगे हुए हैं।

ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा:

“शी जिनपिंग ने उन साइबर हमलों के बारे में बात की जो हमने चीन में किए थे। जो वे करते हैं, वही हम भी करते हैं। हम भी उन पर जमकर जासूसी करते हैं। मैंने उनसे आमने-सामने कहा कि हम आपके खिलाफ ऐसी बहुत सी चीजें करते हैं जिनके बारे में आपको भनक तक नहीं है।”

सार्वजनिक तौर पर दोस्ती, भीतर गहरे मतभेद

हालांकि Donald Trump China Visit के बाद दोनों देशों ने बातचीत को सकारात्मक बताया है, लेकिन अमेरिका और चीन के बीच का यह साइबर तनाव जगजाहिर हो चुका है।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियां हमेशा चीन के ‘वोल्ट टाइफून‘ और ‘साल्ट टाइफून‘ जैसे हैकिंग ग्रुप्स पर अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने का आरोप लगाती रही हैं, जबकि चीन इन दावों को खारिज करता आया है।

एयर फोर्स वन के इस कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल ने यह साफ कर दिया है कि व्यापार असंतुलन, टेक्नोलॉजी कॉम्पटिशन और जासूसी जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद कितने गहरे हैं।

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