शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा: नीट-यूजी परीक्षा को लेकर कई दिनों से चल रहे विवाद और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
पिछले कुछ समय से विपक्षी दल और कई छात्र संगठन उनसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग कर रहे थे।
आखिरकार शनिवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पिछले कुछ दिनों में जो घटनाएं हुई हैं, उन्हें देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की युवाशक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उन्हें किसी भी तरह के भ्रम या गलत जानकारी का शिकार नहीं होने दिया जाएगा।
शिक्षा सुधार को बताया जीवन का लक्ष्य
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा: अपने इस्तीफे के साथ जारी पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि वे पिछले चार दशकों से शिक्षा और छात्र हित से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन से लेकर शिक्षक और शिक्षा सुधार के क्षेत्र तक उन्होंने लगातार काम किया है।
उनके अनुसार, किसी भी देश के विकास के लिए मजबूत और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव तैयार करती है।
NEET परीक्षा विवाद का किया जिक्र
अपने पत्र में उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही परीक्षा में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं, केंद्र सरकार ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लिया।
निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया। इसके बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा आयोजित कराने का फैसला लिया ताकि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो।
अगले साल से CBT मोड में होगी परीक्षा
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा: धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से NEET-UG परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी।
उनका मानना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी। साथ ही तकनीक की मदद से अनियमितताओं की संभावना भी काफी कम हो जाएगी।
20 लाख से ज्यादा छात्रों की परीक्षा थी चुनौती
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा: उन्होंने अपने बयान में कहा कि सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरा कराना था।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के सहयोग से 21 जून 2026 को परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने परीक्षा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में योगदान दिया।
छात्रों के हित को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा: धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले में शुरुआत से ही अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी इससे पीछे नहीं हटे।
उनका कहना था कि उनका सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया या किसी भी तरह की गड़बड़ी के कारण प्रभावित न हो।
उन्होंने दोहराया कि हर छात्र को निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए और सरकार इसी दिशा में लगातार काम करती रहेगी।
इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। विपक्ष लंबे समय से शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा था और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा था।
वहीं, कई छात्र संगठनों ने भी निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग करते हुए लगातार प्रदर्शन किए थे। ऐसे समय में उनका इस्तीफा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

