Delhi Gymkhana Club: देश की राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली क्लबों में गिने जाने वाले Delhi Gymkhana Club पर इन दिनों अस्तित्व का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है।
केंद्र सरकार ने क्लब की 27.3 एकड़ जमीन की लीज खत्म करते हुए 5 जून तक पूरा परिसर खाली करने का आदेश दिया है।
सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास और हाई-सिक्योरिटी जोन के बेहद करीब स्थित यह जमीन अब रक्षा और प्रशासनिक जरूरतों के लिए आवश्यक हो गई है।
इस फैसले ने सिर्फ एक क्लब नहीं, बल्कि दिल्ली की दशकों पुरानी पावर कल्चर को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
ब्रिटिश दौर में हुई थी इस क्लब की शुरुआत
दिल्ली जिमखाना क्लब की कहानी ब्रिटिश शासन के दौर से शुरू होती है।
साल 1911 में जब किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की, तब नई राजधानी में ब्रिटिश अधिकारियों और रियासतों के महाराजाओं के लिए एक विशेष सामाजिक केंद्र की जरूरत महसूस हुई।
इसी सोच के साथ 1913 में ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ की स्थापना हुई। यह क्लब अंग्रेज अधिकारियों, सेना के अफसरों और उच्च वर्गीय समाज का केंद्र बन गया, जहां राजनीतिक चर्चाएं, सामाजिक मेल-मिलाप और मनोरंजन साथ-साथ चलते थे।
रॉबर्ट टोर रसेल ने तैयार की ऐतिहासिक इमारत
क्लब की मौजूदा इमारत 1930 के दशक में बनाई गई थी और इसे मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट Robert Tor Russell ने डिजाइन किया था।
यही आर्किटेक्ट कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन जैसी ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी जाने जाते हैं।
विशाल लॉन, औपनिवेशिक शैली के हॉल, क्लासिक बार और पुराने लकड़ी के इंटीरियर आज भी इस क्लब को दिल्ली के सबसे खास स्थलों में शामिल करते हैं।
क्लब की भव्यता सिर्फ उसकी इमारतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह हमेशा सत्ता और प्रभावशाली नेटवर्क का प्रतीक माना जाता रहा।
आजादी के बाद बदले चेहरे, लेकिन संस्कृति वही रही
1947 में देश आजाद होने के बाद क्लब के नाम से ‘इंपीरियल’ शब्द हटा दिया गया और यह ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ बन गया।
हालांकि इसके भीतर का एलीट कल्चर लंबे समय तक वैसा ही बना रहा। अंग्रेज अधिकारियों की जगह भारतीय नौकरशाहों, मंत्रियों, सैन्य अधिकारियों और बड़े उद्योगपतियों ने ले ली।
धीरे-धीरे यह क्लब दिल्ली की राजनीतिक और प्रशासनिक लॉबिंग का अहम केंद्र बन गया, जहां रिश्ते और समीकरण अक्सर डाइनिंग टेबल और लॉन में तय होते थे।
सदस्यता बनी स्टेटस सिंबल
दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता हमेशा से बेहद सीमित और खास मानी जाती रही है। क्लब में स्थायी सदस्यों की संख्या सीमित है और हर साल बेहद कम नए लोगों को सदस्यता मिलती है।
यही वजह है कि इसकी वेटिंग लिस्ट कई बार 35 से 37 साल तक पहुंच जाती है। देश के बड़े सांसद, वरिष्ठ IAS-IPS अधिकारी, पूर्व जनरल, जज, कारोबारी और प्रभावशाली परिवार इसके सदस्य रहे हैं।
यहां सदस्यता पाना सिर्फ क्लब में एंट्री नहीं, बल्कि दिल्ली के सबसे ताकतवर नेटवर्क का हिस्सा बनने जैसा माना जाता है।
करोड़ों की कमाई और आलीशान सुविधाएं
Delhi Gymkhana Club: रिपोर्ट्स के मुताबिक क्लब का सालाना राजस्व लगभग 80 करोड़ रुपये के आसपास माना जाता है। सदस्यता शुल्क, प्रीमियम रेस्टोरेंट, बार, कैटरिंग और निजी आयोजनों से क्लब को हर महीने करोड़ों रुपये की आय होती है।
क्लब परिसर में टेनिस कोर्ट, स्क्वैश कोर्ट, स्विमिंग पूल, लाइब्रेरी, बार, फाइन डाइनिंग और गेस्ट रूम जैसी कई हाई-एंड सुविधाएं मौजूद हैं। इसकी सुविधाएं किसी पांच सितारा संस्थान से कम नहीं मानी जातीं।
सरकार ने क्यों लिया सख्त फैसला?
केंद्र सरकार का कहना है कि क्लब को दी गई जमीन मूल रूप से एक सामाजिक और खेल क्लब चलाने के लिए लीज पर दी गई थी। लेकिन अब इस इलाके की रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी अहमियत बढ़ चुकी है।
प्रधानमंत्री आवास और कई महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों के करीब होने की वजह से सरकार इस जमीन का उपयोग रक्षा और प्रशासनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करना चाहती है।
भूमि एवं विकास कार्यालय ने साफ चेतावनी दी है कि तय समय तक परिसर खाली नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई कर कब्जा लिया जाएगा।
कानूनी लड़ाई और विवादों का लंबा इतिहास
Delhi Gymkhana Club: दिल्ली जिमखाना क्लब पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों में रहा है। क्लब के प्रबंधन, वित्तीय मामलों और सदस्यता प्रक्रिया को लेकर कई आरोप लगे।
पूर्व बोर्ड सदस्य और व्हिसलब्लोअर Nijee Sapra ने पुराने प्रबंधन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए।
उनका दावा था कि क्लब को कुछ प्रभावशाली लोगों के समूह ने ‘मनी मिंटिंग माफिया’ की तरह चलाया। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की जांच में भी करोड़ों रुपये की अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों की बात सामने आई थी।
अब यह पूरा मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच चुका है, जहां क्लब सरकार के आदेश को चुनौती दे रहा है।
क्या खत्म हो जाएगी दिल्ली की पुरानी पावर कल्चर?
दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ एक स्पोर्ट्स या सोशल क्लब नहीं रहा, बल्कि यह लुटियंस दिल्ली की उस संस्कृति का हिस्सा रहा है जहां सत्ता, नौकरशाही और प्रभावशाली वर्ग एक-दूसरे से जुड़े रहे।
113 साल पुराने इस क्लब पर सरकार की कार्रवाई को कई लोग बदलते भारत का संकेत मान रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है, जबकि कई लोग इसे दिल्ली की पुरानी एलीट संस्कृति के अंत के रूप में देख रहे हैं।
अब सबकी नजर अदालत की सुनवाई और 5 जून की समयसीमा पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह ऐतिहासिक क्लब अपनी पहचान बचा पाएगा या इतिहास का हिस्सा बन जाएगा।
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