Tuesday, May 26, 2026

Iran-US War: ईरान पर अमेरिका ने फिर बरसाए बम, सीजफायर के बीच फिर जंग शुरू

Iran-US War: युद्धविराम और शांति वार्ता जारी रहने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दक्षिणी ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की है।

अमेरिका का कहना है कि यह हमला पूरी तरह “सेल्फ-डिफेंस” यानी आत्मरक्षा के तहत किया गया,

ताकि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और नौसैनिक बलों को संभावित खतरे से बचाया जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी गतिविधियां

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि IRGC की कुछ तेज़ रफ्तार नावें होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थीं।

इसके अलावा कुछ मोबाइल मिसाइल लॉन्चर भी सक्रिय पाए गए थे, जिनसे अमेरिकी युद्धपोतों और सहयोगी देशों के जहाजों को खतरा हो सकता था।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है।

बंदर अब्बास में हुई कार्रवाई

अमेरिकी सेना ने यह हमला दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास इलाके में किया। यह क्षेत्र ईरान का एक प्रमुख नौसैनिक और सैन्य केंद्र माना जाता है।

अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने IRGC की उन नावों को निशाना बनाया जो कथित तौर पर समुद्र में माइंस बिछाने में लगी थीं।

इसके साथ ही अमेरिका ने कई मिसाइल लॉन्च साइट्स पर भी हमला किया। CENTCOM के मुताबिक

इन लॉन्च साइट्स को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया ताकि भविष्य में अमेरिकी या सहयोगी बलों पर कोई हमला न हो सके।

CENTCOM का बयान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना ने अपने सुरक्षाबलों की रक्षा के लिए यह सीमित कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा, “हमारी फोर्स ने दक्षिणी ईरान में सेल्फ-डिफेंस स्ट्राइक की ताकि अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी बलों को ईरानी खतरों से बचाया जा सके।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई को सीजफायर समाप्त होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

अमेरिका का कहना है कि वह अब भी क्षेत्र में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान का समर्थन करता है।

ईरान ने अमेरिका पर लगाया आरोप

दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरानी मीडिया और सरकारी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बिना किसी उकसावे के हमला किया और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है।

IRGC से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अमेरिका जानबूझकर शांति वार्ता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की कार्रवाइयां जारी रहीं तो उसका जवाब भी दिया जाएगा।

पहले भी हो चुका है हमला

यह पहली बार नहीं है जब सीजफायर के दौरान अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर हमला किया हो।

मई की शुरुआत में भी अमेरिकी सेना ने IRGC के ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और छोटी नावों को निशाना बनाया था।

उस समय भी अमेरिका ने दावा किया था कि ईरानी गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थीं।

लगातार दूसरी बार हुई इस कार्रवाई से साफ है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी बरकरार है।

भले ही युद्धविराम लागू हो, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा।

बढ़ सकता है क्षेत्रीय संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव आने वाले समय में और बढ़ सकता है।

यदि इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज़ होती हैं तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ेगा।

फिलहाल अमेरिका इसे सीमित सैन्य कार्रवाई बता रहा है, लेकिन ईरान की प्रतिक्रिया को देखते हुए हालात किसी भी समय गंभीर रूप ले सकते हैं।

ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब पश्चिम एशिया के बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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