Wednesday, January 21, 2026

चंदन गुप्ता हत्याकांड के मुख्य आरोपी सलीम की मौत

कासगंज के चर्चित चंदन गुप्ता हत्याकांड के मुख्य आरोपी सलीम की बुधवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई।

वह लखनऊ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। जेल प्रशासन ने उसकी मृत्यु की पुष्टि करते हुए परिवार और अधिकारियों को सूचना दे दी है।

26 जनवरी 2018 की घटना और सजा

कासगंज शहर में 26 जनवरी 2018 को तिरंगा यात्रा के दौरान हिंसा और पथराव हुआ था, जिसमें चंदन गुप्ता की हत्या कर दी गई थी।

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इस मामले में मुख्य आरोपी सलीम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद वह जिला कारागार, लखनऊ गोसाईगंज में बंद था।

लंबे समय से चल रहा था इलाज

जेल में सजा काटते समय सलीम गंभीर रूप से बीमार हो गया था। 30 जुलाई को उसकी तबीयत बिगड़ने पर जेल चिकित्सक ने उसे लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल रेफर किया।

वहां एक माह इलाज के बाद उसकी स्थिति खराब बनी रही, जिसके बाद 16 अगस्त को उसे किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती कराया गया।

26 अगस्त की रात केजीएमयू में मौत

केजीएमयू में लगातार इलाज के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों की टीम ने आवश्यक उपचार जारी रखा।

लेकिन 26 अगस्त की रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल प्रशासन ने तुरंत इस बारे में उच्चाधिकारियों और सलीम के परिवार को जानकारी दी।

अन्य मामलों में भी था आरोपी

कासगंज निवासी 48 वर्षीय सलीम, बरकतउल्ला का बेटा था। वह चंदन हत्याकांड के अलावा कई अन्य मामलों में भी नामजद था। किडनी रोग से पीड़ित सलीम की मृत्यु के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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