Wednesday, May 13, 2026

Cannes 2026: पीच गाउन में आलिया भट्ट का जलवा, लेकिन उनके ‘सवालों’ ने बटोरी असली सुर्खियां

Cannes 2026: कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर जब आलिया भट्ट ने कदम रखा, तो हर नजर ठहर गई।

अपनी मासूमियत और ‘ड्रीमी’ लुक से उन्होंने इंटरनेशनल मीडिया का दिल जीत लिया।

लेकिन इस बार आलिया सिर्फ एक ‘ब्यूटी आइकन’ के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की एक बेबाक आवाज बनकर उभरी हैं।

उन्होंने चकाचौंध के बीच एक ऐसा मुद्दा उठाया है जिसने बॉलीवुड के बिजनेस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रेड कार्पेट पर ‘गुलाबी परी’ बनीं आलिया

Cannes 2026: 79वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में L’Oréal Paris की ग्लोबल एंबेसडर के तौर पर आलिया का दूसरा साल है।

अपने पहले रेड कार्पेट अपीयरेंस के लिए आलिया ने Tamara Ralph का कस्टम हॉर्ट कुटूर गाउन चुना।

ब्लश-टोन (हल्का गुलाबी/पीच) के इस गाउन के साथ उन्होंने 168.27 कैरेट के दुर्लभ पिंक कोरल का नेकलेस पहना था।

रिया कपूर द्वारा स्टाइल किया गया यह लुक ‘ओल्ड वर्ल्ड ग्लैमर‘ और आधुनिकता का बेहतरीन मेल था।

इससे पहले उन्हें यश पाटिल के लैंडस्केप-प्रिंट बॉल गाउन में देखा गया था, जिसमें वे किसी पेंटिंग जैसी नजर आ रही थीं।

आलिया ने खुद माना कि पिछले साल का अनुभव थोड़ा ‘अस्त-व्यस्त’ था, लेकिन इस बार वे अधिक आत्मविश्वास के साथ भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

“सिर्फ पुरुषों के लिए ही फिल्में क्यों?”: आलिया का तीखा सवाल

Cannes 2026: हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया के साथ बातचीत के दौरान आलिया ने भारतीय बॉक्स ऑफिस के उस कड़वे सच पर बात की, जिसे अक्सर ‘बिजनेस’ कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्लोबल लेवल पर Barbie, Wuthering Heights और The Devil Wears Prada 2 जैसी फिल्में महिलाओं के दम पर ब्लॉकबस्टर हो सकती हैं, तो भारत में हम अभी भी ‘75% मेल ऑडियंस’ के तर्क में क्यों फंसे हैं?

आलिया ने कहा:

“भारत में अक्सर बातचीत होती है कि 75% सिनेमा देखने वाली जनता पुरुष है, इसलिए हमें ‘मासेज’ (आम जनता) के लिए फिल्में बनानी चाहिए।

अगर हम सिर्फ मर्दों के लिए फिल्में बना रहे हैं, तो महिलाओं का क्या? मैं ये नहीं कह रही कि पुरुषों को अलग कर दो, लेकिन हम किसी को भी पीछे क्यों छोड़ें?”

‘जेंडर-एग्नोस्टिक’ सिनेमा: अब जेंडर नहीं, कहानी तय करे सफलता

आलिया भट्ट ने एक बहुत ही प्रभावी शब्द इस्तेमाल किया— ‘Gender-Agnostic‘ (लिंग-निरपेक्ष)।

उनका मानना है कि अब समय आ गया है जब हमें यह सोचना बंद कर देना चाहिए कि फिल्म का हीरो कौन है या फिल्म किस जेंडर के लिए बनाई गई है।

उनके अनुसार, अगर कहानी दमदार है, तो उसे हर कोई देखेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि फिल्में जेंडर देखकर नहीं, बल्कि बेहतरीन कंटेंट के दम पर चलनी चाहिए।

आलिया की यह बात इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि वे खुद गंगूबाई काठियावाड़ी, राज़ी और हालिया रिलीज जिगरा (2024) जैसी फिल्मों के जरिए यह साबित कर चुकी हैं कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर अपना लोहा मनवा सकती हैं।

सिनेमा का बदलता चेहरा और आलिया की जिम्मेदारी

आलिया ने साफ किया कि इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर भारत का प्रतिनिधित्व करना सिर्फ फैशन के बारे में नहीं है, बल्कि उस बदलती सोच के बारे में भी है जिसे वे अपने देश के सिनेमा में देखना चाहती हैं।

उनका कहना है कि आज का दौर बहुत ही रोमांचक है क्योंकि महिलाएं अब चुपचाप घर बैठने के बजाय सिनेमाघरों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं।

वे चाहती हैं कि फिल्म निर्माता अब इस ‘महिला दर्शक’ की ताकत को पहचानें और उन्हें महज एक ‘सपोर्टिंग जेंडर’ न समझें।

आने वाली फिल्में: क्या दिखेगा बदलाव?

आलिया की बातों का असर शायद उनके आने वाले प्रोजेक्ट्स में भी दिखे। उनके पास इस वक्त बड़े बैनर की फिल्में हैं:

Love & War: संजय लीला भंसाली की इस फिल्म में वे रणबीर कपूर और विक्की कौशल के साथ दिखेंगी। यह 21 जनवरी, 2027 को रिलीज होगी।

Alpha: यह एक स्पाई थ्रिलर फिल्म है, जिसमें आलिया एक्शन अवतार में नजर आएंगी।

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