Thursday, May 14, 2026

BRICS Meeting 2026: भारत बना ग्लोबल पावर का केंद्र, जयशंकर ने किया ईरान का स्वागत; जानें क्या है दिल्ली का ‘मेगा प्लान’

BRICS Meeting 2026: भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गई है।

भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship) के तहत, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का स्वागत किया।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव अपने चरम पर है और दुनिया की नजरें ब्रिक्स देशों के साझा रुख पर टिकी हैं।

ईरान और भारत के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात

BRICS Meeting 2026: बैठक से इतर डॉ. जयशंकर और अब्बास अराघची के बीच हुई मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है।

ईरान हाल ही में ब्रिक्स का पूर्णकालिक सदस्य बना है।

इस बैठक में न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई, बल्कि इजरायल-ईरान संघर्ष और रेड सी (लाल सागर) में सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।

भारत के लिए ईरान एक रणनीतिक साझेदार है, खासकर चाबहार पोर्ट के संदर्भ में।

पश्चिम एशिया में युद्ध का साया

BRICS Meeting 2026: ब्रिक्स की यह बैठक एक बड़े सैन्य तनाव के बीच हो रही है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक:

हिजबुल्लाह के हमले: ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना पर 17 से अधिक हमले करने का दावा किया है।

इनमें ड्रोन हमले, मिसाइल और आर्टिलरी स्ट्राइक शामिल हैं।

इजरायल की जवाबी कार्रवाई: इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने भी लेबनान की सीमा पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और संदिग्ध हवाई लक्ष्यों को मार गिराया है।

युद्ध विराम की कोशिशें: अमेरिका की मध्यस्थता में 14 और 15 मई को इजरायल और लेबनान के बीच वार्ता होनी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि युद्ध विराम केवल कागजों पर सिमट कर रह गया है।

ब्रिक्स@20: एक नया वैश्विक व्यवस्था (New World Order)

BRICS Meeting 2026: वर्ष 2026 ब्रिक्स के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह इस समूह की 20वीं वर्षगांठ है।

इस बार की थीम “BRICS@20: Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” रखी गई है।

इस बैठक को वैश्विक राजनीति के लिए एक ‘स्ट्रेस टेस्ट’ माना जा रहा है। अब इस ब्लॉक में सऊदी अरब, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया जैसे नए दिग्गज शामिल हो चुके हैं।

यह विस्तारित ब्रिक्स (BRICS+) अब:

दुनिया की 37% जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है।

दुनिया की आधी आबादी का हिस्सा है।

जी-7 (G7) के मुकाबले एक मजबूत आर्थिक और भू-राजनीतिक विकल्प बनकर उभरा है।

आज का पूरा शेड्यूल: बैठकों का दौर

नई दिल्ली में आज का दिन कूटनीतिक रूप से काफी व्यस्त है:

सुबह 10:30 बजे: विदेश मंत्रियों की पहली औपचारिक बैठक शुरू हुई।

दोपहर 1:00 बजे: सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।

दोपहर 3:10 बजे: दूसरा सत्र शुरू होगा, जिसमें आर्थिक सहयोग और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जाएगा।

शाम 7:00 बजे: डॉ. एस. जयशंकर मेहमानों के सम्मान में डिनर की मेजबानी करेंगे।

भारत मंडपम में खास तैयारियां: जायके और संस्कृति का संगम

भारत ने मेहमानों के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

भारत मंडपम में डेलीगेट्स के लिए खास मेनू (Menu) तैयार किया गया है। पीएमओ (PMO) की देखरेख में तैयार इस भोजन में भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखेगी।

इसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों विकल्प शामिल हैं, और मोटे अनाज (Millets) को भी विशेष स्थान दिया गया है, जिसे भारत वैश्विक स्तर पर प्रमोट कर रहा है।

भारतीय अध्यक्षता और ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ का संदेश

जनवरी 2026 में जब डॉ. जयशंकर ने ब्रिक्स का नया लोगो लॉन्च किया था, तो उसमें ‘कमल’ के फूल को प्रमुखता दी गई थी।

यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ (मानवता पहले) के दृष्टिकोण को दर्शाता है। भारत इस मंच के जरिए विकासशील देशों (Global South) की आवाज को बुलंद कर रहा है।

क्या है इस बैठक के मायने?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक का सबसे बड़ा संदेश यह है कि दुनिया अब एकध्रुवीय (Unipolar) नहीं रही।

रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास युद्ध के बीच, ब्रिक्स देश एक ऐसा मंच प्रदान कर रहे हैं जहाँ पश्चिमी देशों के प्रभाव से अलग हटकर वैश्विक समस्याओं पर चर्चा की जा सके।

ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार में डॉलर की निर्भरता कम करना (De-dollarization) और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता इस बैठक के मुख्य एजेंडे रहेंगे।

नई दिल्ली में हो रही यह ब्रिक्स बैठक न केवल आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह युद्धग्रस्त दुनिया में शांति की तलाश का एक प्रयास भी है।

डॉ. जयशंकर की अगुवाई में भारत एक कुशल मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जो ईरान जैसे देशों को साथ लेकर चलते हुए वैश्विक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

आने वाले दो दिनों में इस बैठक से निकलने वाले साझा बयान (Joint Declaration) पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

यह भी पढ़े: Trump Iran War: “समझौता करो या तबाह हो जाओ”, ट्रम्प की ईरान को खुली धमकी; US ने खर्च किए 29 अरब डॉलर

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