Bengal Election 2026: CPM सरकार के खिलाफ विद्रोह कर के आई ममता बनर्जी की TMC सरकार से लोगों को ये उम्मीद थी कि अब हिंसा की घटनाएं रुक जाएगी, लेकिन हुआ ठीक उसके विपरीत।
2011 में सत्ता में आने के बाद भी बंगाल में राजनीतिक टकराव और चुनावी हिंसा का सिलसिला लगातार जारी रहा।
शुरुआत से ही हालात सामान्य नहीं रहे और सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद ही करीब 25 लोगों की मौत की खबरें सामने आईं, जिसने लोगों की उम्मीदों को झटका दिया
12 लोगों की गई जान
इसके बाद हर चुनाव में हिंसा जैसे एक पैटर्न बन गया। 2016 के विधानसभा चुनाव में भी झड़पों और हमलों में लगभग 12 लोगों की जान गई।
2018 के पंचायत चुनावों में नामांकन से लेकर मतदान तक भारी हिंसा हुई और लगभग 70 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इसे अब तक का सबसे हिंसक चुनाव माना जाता है।
2019 के लोकसभा चुनाव में भी राजनीतिक टकराव कम नहीं हुआ और करीब 15 लोगों की जान गई। 2021 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद की हिंसा में मौत का आंकड़ा 30 से ज्यादा पहुंच गया,
जबकि कुछ दावों में यह संख्या 100 के पार भी बताई गई। वहीं 2023 के पंचायत चुनाव में भी करीब 45 से 55 लोगों की मौत ने पूरे देश का ध्यान बंगाल की तरफ खींचा।
वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में लगभग 10 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इन सभी घटनाओं को देखते हुए साफ कहा जा सकता है कि ममता सरकार के दौरान लगभग हर बड़े चुनाव में हिंसा और मौत का सिलसिला जारी रहा है।
10 बड़ी घटनाएं
अब बात करते है 23 अप्रैल 2026 के चुनाव की….जहां पहले फेज के लिए पश्चिम बंगाल के अलग-अलग बूथों पर मतदान हुआ।
इस दौरान बंगाल के लगभग 10 से ज्यादा इलाकों से हमले की खबरे सामने आई। हालांकि इस दौरान किसी की मौत की सूचना नहीं है, लेकिन हालात पूरी तरह शांत भी नहीं हैं।
जैसे आसनसोल में बीजेपी विधायक पर हमला हुआ।
मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर और TMC कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।
मालदा में TMC के ही दो गुट आपस में भिड़ गए और पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ हुई।
सिलीगुड़ी में TMC और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की देखने को मिली।
इसके अलावा कई जगह EVM में खराबी के कारण मतदाता भड़क गए और अधिकारियों के साथ बहस व हाथापाई तक की नौबत आई।
कूचबिहार और बीरभूम में हालात बिगड़ने पर केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा।
दक्षिण दिनाजपुर में बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर TMC के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के सामने ही हमला कर दिया और उनको दौड़ा-दौड़ाकर बुरी तरह पीटा गया।
वहीं जामुड़िया में गाड़ी में EVM मिलने के आरोप से विवाद और बढ़ गया।
इन घटनाओं से साफ है कि चुनाव के दौरान तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।
TMC के लोग डराते धमकाते है
आये दिन ऐसी खबरें सामने आती रहती है कि TMC के गुंडे लोगों को डराते है धमकाते है।
रिपोर्ट भारत की टीम जब ग्राउंड पर पहुंची तो लोगों ने बताया कि उनका घर तोड़ने के साथ ही जान से मारने की धमकी दी जाती है।
लोगों का कहना है कि घऱ की मां, बहन, बेटी और बीवी के साथ रेप करने की घमकी दी जाती है, जिससे वे चाहते हुए भी लोकतंत्र का इस्तेमाल कर अपनी पसंदीदा सरकार नहीं चुन पाते है।
सबसे ज्यादा चिंता नतीजों के बाद की स्थिति को लेकर है, क्योंकि पहले भी चुनाव परिणाम के बाद हिंसा बढ़ने के मामले सामने आते रहे हैं।
आज बंगाल में कानून-व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है और अब देखना यह होगा कि क्या इस बार सुरक्षा बलों की मौजूदगी में शांति बनी रहती है या फिर एक बार फिर हिंसा का दौर शुरू होता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर TMC की सरकार बनी तो खुले आम लोगों को हर बार की तरह दंगों में ऐसे ही मारा जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ बीजेपी की अगर पश्चिम बंगाल में सरकार बनती है तो क्या वो इन दंगों को रोकने में कामयाब हो पाएगी।

