बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई गई है। उन्हें बांग्लादेश की राजधानी ढाका में जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया गया है।
इस हिंसा में 1400 से ज्यादा मौतें हुई थीं। ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें 5 में से दो मामले, हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश के लिए मौत की सजा दी, जबकि बाकी मामलों में उम्रकैद की सजा दी गई है।
बांग्लादेश में हुई हिंसा के दौरान शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
बांग्लादेश ब्लड मनी कॉन्सेप्ट: किन मामलों में दोषी पाई गईं शेख हसीना?
- छात्र आंदोलन के दौरान हत्याओं का आदेश देना।
- भड़काऊ भाषण देकर हिंसा कराना।
- न्याय में बाधा डालना व सबूत मिटाने की कोशिश करना।
बांग्लादेश ब्लड मनी कॉन्सेप्ट: क्या है ‘ब्लड मनी’ कॉन्सेप्ट
बांग्लादेश के कानूनी ढांचे में ब्लड मनी का कॉन्सेप्ट आम आपराधिक कानून का हिस्सा नहीं है।
यह धारणा अधिकतर दूसरे इस्लामी देशों में मृत्युदंड से जुड़े मामलों में सामने आती है, जहां परिवार को मुआवजा देकर मृतक के खिलाफ दंड को कम या टाला जा सकता है।
इसका मुख्य उद्देश्य उन बांग्लादेशी नागरिकों को सुरक्षित करना है, जो ऐसे देशों में फंसे हैं, जहां शरिया कानून लागू है और उन्हें मृत्युदंड का सामना करना पड़ता है।
ऐसे मामलों में सरकार ब्लड मनी का उपयोग कर अपने नागरिकों को सजा से बचाने की कोशिश करती है।
बांग्लादेश ब्लड मनी कॉन्सेप्ट: क्या ‘ब्लड मनी’ कॉन्सेप्ट शेख हसीना को बचा पायेगा
सूत्रों के मुताबिक़, बांग्लादेश के अपने कानून में ब्लड मनी का कोई अधिकार नहीं है। देश के भीतर अपराधियों या राजनीतिक मामलों में इसका इस्तेमाल नहीं होता है।
‘ब्लड मनी’ हसीना को पूरी तरह बचा नहीं पाएगा, क्योंकि यह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित मामला है। अगर परिवार सहमत न हों, तो सजा बरकरार रहेगी।
अभी के लिए बांग्लादेश में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि अगर ‘ब्लड मनी कॉन्सेप्ट’ के ज़रिये हसीना की सजा काम करने का मामला सामने आया तो इस फैसले से जनता में तनाव बढ़ सकता है। हसीना के निष्काषन पर भारत का क़ानून तय करेगा कि यह सज़ा कितनी प्रभावी होगी।
‘ब्लड मनी’ कॉन्सेप्ट से हसीना को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन पूर्णतया बच पाना असंभव है, खासकर जब मामला राष्ट्रव्यापी हिंसा का हो।

