विहिप के बड़े दिनेश जी, 58 वर्षों से संभाल रहे संगठन और संत समाज से संपर्क की जिम्मेदारी
माननीय दिनेश चंद्र जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख मार्गदर्शकों में शामिल हैं।
संघ परिवार में उन्हें बड़े दिनेश जी के नाम से जाना जाता है। उनका प्रचारक जीवन लगभग 58 वर्षों का रहा है।
विश्व हिंदू परिषद में संभाले महत्वपूर्ण दायित्व
दिनेश चंद्र जी विश्व हिंदू परिषद के पहले केंद्रीय संगठन महामंत्री रहे हैं। उन्होंने संगठन में अंतरराष्ट्रीय महामंत्री और राष्ट्रीय संगठन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी संभाले। वर्तमान में वे विहिप के केंद्रीय संरक्षक और अंतरराष्ट्रीय संरक्षक के रूप में मार्गदर्शन दे रहे हैं।
संगठनात्मक जीवन में उनकी प्रमुख भूमिका विश्व हिंदू परिषद की नीतियों, कार्यक्रमों और अभियानों को दिशा देने की रही है। वे विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलों में मार्गदर्शक की जिम्मेदारी निभाते हुए संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से निरंतर संपर्क रखते हैं।
अशोक सिंघल जी के कार्यों और संत संपर्क की जिम्मेदारी
बड़े दिनेश जी पूज्य अशोक सिंघल जी से जुड़े समस्त कार्यों की देखरेख करते हैं। देश और विदेश के पूज्य साधु संतों से संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी भी उनके पास है।
संत समाज और संगठन के बीच समन्वय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से भी जुड़े
वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अयोध्या के विशेष आमंत्रित सदस्य भी हैं। राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े संगठनात्मक कार्यों में लंबे अनुभव के कारण उनकी भूमिका विशेष मानी जाती है। धार्मिक नेतृत्व से संवाद में भी उनका योगदान लगातार बना हुआ है।
वेदों के समाजोपयोगी विषयों को जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास
वर्तमान समय में बड़े दिनेश जी वेदों में वर्णित समाजोपयोगी विषयों को जनसामान्य तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
उनका प्रयास वैदिक ज्ञान, सामाजिक जीवन और भारतीय परंपराओं से जुड़े विचारों को सरल रूप में समाज के विभिन्न वर्गों के सामने प्रस्तुत करना है।
अमरनाथ श्राइन बोर्ड आंदोलन का किया नेतृत्व
वर्ष 2008 में तत्कालीन जम्मू कश्मीर सरकार ने अमरनाथ श्राइन बोर्ड को भंग कर यात्रियों की सुविधा के लिए दी गई 100 एकड़ भूमि वापस ले ली थी।
इस निर्णय के विरोध में देशव्यापी जनजागरण और आंदोलन बड़े दिनेश जी के नेतृत्व में हुआ।
आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला और अंततः अमरनाथ श्राइन बोर्ड का पुनर्गठन किया गया। यात्रियों की सुविधा के लिए 100 एकड़ भूमि भी दोबारा बोर्ड को वापस मिली।
यह अभियान उनके नेतृत्व में सफल हुए प्रमुख सामाजिक और धार्मिक आंदोलनों में गिना जाता है।

