अटल बिहारी वाजपेयी
साल 1995 में कानपुर देहात के गहलो रूरा गांव में अटल बिहारी वाजपेयी अपनी बुआ इंद्रवासिनी से मिलने पहुंचे। उन्हें देखते ही बुआ ने प्यार से पूछा, “अटलू बड़े दिनों के बाद आए हो?” अटल जी ने तुरंत झुककर उनके चरण स्पर्श किए।
अटल जी ने मुस्कराते हुए जवाब दिया कि बुआ, आपके यहां सड़कें इतनी खराब हैं कि समझ नहीं आता सड़क पर गड्ढा है या गड्ढे में सड़क। इसी को समझते समझते देर हो गई। यह सुनकर वहां मौजूद सभी लोग ठहाका लगाकर हंस पड़े।
बुजुर्ग इंद्रवासिनी भी अटलू की बात पर जोर से हंसीं और उन्हें सीने से लगा लिया। थोड़ी ही देर में उन्होंने गांव वालों को इशारे से जलपान लाने को कहा। उन्हें लगा कि इतने दिनों बाद आए अटलू की मेहमाननवाजी अधूरी नहीं रहनी चाहिए।
बुआ के लिए अटलू, अटल जी के लिए लालू बुआ
गांव वालों ने तुरंत अटल जी के लिए चाय पानी का इंतजाम किया। इंद्रवासिनी उन्हें बचपन से अटलू कहती थीं और अटल जी उन्हें लालू बुआ पुकारते थे। दोनों के बीच यह आत्मीय रिश्ता राजनीति, पद और सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं से कहीं पुराना था।
इंद्रवासिनी का विवाह कानपुर देहात के गहलो रूरा गांव में गंगा नारायण मिश्रा से हुआ था। शादी के करीब एक साल बाद ही उनके पति का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने गंगा नारायण मिश्रा के परिवार के साथ वहीं रहने का फैसला किया।
अटल जी रिश्तों को निभाने के लिए जाने जाते थे। कानपुर में पढ़ाई के दिनों में भी वह अपनी बुआ के घर जाना नहीं भूलते थे। राजनीति में सक्रियता बढ़ने के बाद यात्राएं कम हुईं, लेकिन मौका मिलते ही वह पारिवारिक रिश्तों तक पहुंचते रहे।
चुनाव प्रचार के बीच बुआ के गांव पहुंचे अटल जी
1995 में लखनऊ से कानपुर चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे अटल जी ने अपने साथियों से बुआ के गांव चलने की इच्छा जताई। वह गांव पहुंचे और पूरा दिन वहीं रहे। शाम को जब लौटने लगे तो लालू बुआ ने उन्हें रोक लिया।
बुआ ने कांपते हाथों से अपनी साड़ी के पल्लू की गांठ खोलनी शुरू की। अटल जी समझ गए कि वह पैसे देने जा रही हैं। उन्होंने कहा, “बुआ मुझे पैसे नहीं चाहिए, मैं तो आपका आशीर्वाद लेने आया था।” मगर बुआ नहीं मानीं।
पैसे निकालकर उन्होंने अटल जी का हाथ पकड़ा और कहा, “हां लल्ला अटलू, बहुत बड़े हो गए हो जो पैसे नहीं लोगे। यह भी मेरा आशीर्वाद है, रख लो, रास्ते में काम आएंगे।” यह सुनकर अटल जी भावुक हो गए।
बुआ के दिए पैसे पीड़ित परिवार को सौंप दिए
लालू बुआ ने अपने अटलू को बड़ा नेता बनने का आशीर्वाद भी दिया। गांव से निकलने के बाद उनका काफिला रास्ते में कारी गांव पहुंचा, जहां दूध बेचने वाले लाल सिंह यादव की हत्या की खबर मिली। अटल जी ने काफिला रुकवा दिया।
अटल जी लाल सिंह यादव के घर पहुंचे और उनकी पत्नी को ढांढस बंधाया। बातचीत के बाद उन्होंने जेब में हाथ डाला, बुआ से मिले पैसे निकाले और उसमें अपनी ओर से भी रकम मिलाई। कुल लगभग दस हजार रुपये पीड़ित महिला को सौंप दिए।
यह प्रसंग अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन का वह पक्ष सामने लाता है, जिसमें पारिवारिक आत्मीयता और सार्वजनिक संवेदना साथ दिखाई देती है। बुआ का आशीर्वाद लेकर निकले अटल जी ने वही धन पीड़ित महिला की मदद में देकर दिखाया कि व्यक्तित्व विरले होते हैं।

