हेडफोन लगाकर तेज संगीत सुनने वालों के लिए अलका याग्निक की बीमारी बड़ा सबक
बॉलीवुड की दिग्गज पार्श्वगायिका अलका याग्निक को हाल ही में राष्ट्रपति भवन में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। जिनकी सुरीली आवाज ने कई पीढ़ियों की यादों और बचपन को संगीत से सजाया, उन्हें इस सम्मान के साथ देखना गर्व और भावुकता दोनों का क्षण रहा।
कमजोर हालत में मंच तक पहुंचीं अलका याग्निक
कभी अपनी आवाज की ऊर्जा और मधुरता से करोड़ों श्रोताओं को बांध लेने वाली अलका याग्निक जब व्हीलचेयर और सहायकों के सहारे मंच तक पहुंचीं, तो यह दृश्य हर संगीत प्रेमी के लिए गहराई तक चुभने वाला था। उनकी शारीरिक कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी।
अलका याग्निक पिछले लगभग दो वर्षों से सार्वजनिक जीवन से दूर थीं। इतने लंबे अंतराल के बाद उन्हें इस नाजुक स्थिति में देखकर उनके प्रशंसकों का चिंतित और भावुक होना स्वाभाविक था। राष्ट्रपति भवन में उनकी उपस्थिति ने सम्मान के साथ चिंता भी बढ़ा दी।
वायरल अटैक के बाद सुनने की क्षमता पर पड़ा गंभीर असर
अलका याग्निक जिस स्वास्थ्य संकट से गुजर रही हैं, वह किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ा आघात माना जा सकता है। वर्ष 2024 में अचानक हुए वायरल अटैक के बाद उन्हें सेंसोरिन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस नाम की गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा।
इस बीमारी ने उनकी सुनने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। जिस गायिका की आवाज ने करोड़ों दिलों पर राज किया, पीढ़ियों को अपने गीतों पर झुमाया और दुनिया को अपनी धुनों से मोह लिया, वही कलाकार आज ध्वनियों को सुनने में असमर्थ हैं।
एक गायिका के लिए अपनी ही सुनने की शक्ति खो देना नियति का बेहद कठोर प्रहार है। जिन सुरों ने उन्हें पहचान दी, वही सुर आज उनके कानों तक नहीं पहुंच पा रहे। इसी गंभीर स्वास्थ्य संकट के कारण वे शारीरिक रूप से भी बेहद कमजोर हो गई हैं।
हेडफोन पर तेज संगीत सुनने वालों के लिए चेतावनी
अलका याग्निक की यह स्थिति उन लोगों के लिए भी बड़ा सबक है, जो लंबे समय तक हेडफोन लगाकर तेज आवाज में संगीत सुनते हैं। सुनने की क्षमता जीवन का सामान्य हिस्सा लगती है, लेकिन एक बार नुकसान शुरू हो जाए तो उसका असर बहुत गहरा हो सकता है।
संगीत आनंद देता है, लेकिन तेज ध्वनि और कानों पर लगातार दबाव सुनने की शक्ति के लिए जोखिम बन सकता है। अलका याग्निक का मामला स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की जरूरत याद दिलाता है, खासकर उन युवाओं को जो घंटों हेडफोन पर संगीत सुनते हैं।
सम्मान के बाद प्रशंसकों के लिए लिखा भावुक संदेश
इन कठिन परिस्थितियों के बीच भी अलका याग्निक का हौसला उनके प्रशंसकों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। पद्म भूषण सम्मान ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपने चाहने वालों के लिए लिखा कि वह धीरे धीरे अपनी दुनिया में वापस लौट रही हैं।
उन्होंने इस मुश्किल सफर में प्रशंसकों की दुआओं को अपना सबसे बड़ा संबल माना। राष्ट्रपति भवन के विशाल हॉल में गूंजती तालियों को वे शायद अपने कानों से न सुन पाई हों, लेकिन उस सम्मान और प्रेम को उन्होंने अपनी आत्मा से जरूर महसूस किया होगा।
प्रशंसकों की प्रार्थना, जल्द स्वस्थ होकर लौटें अलका जी
उनके कई प्रशंसकों के लिए अलका याग्निक की आवाज निजी स्मृतियों का हिस्सा रही है। किसी ने उनका पहला गीत फिल्म लावारिस का मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है सुना, जो राखी पर फिल्माया गया था, तो किसी ने बचपन उनके गीतों के साथ जिया।
आज उनके प्रशंसकों की एक ही प्रार्थना है कि ईश्वर उन्हें शक्ति दे। वे जल्द पूरी तरह स्वस्थ हों और फिर उसी मुस्कान के साथ अपने चाहने वालों के बीच लौटें, जिस आवाज ने भारतीय संगीत प्रेमियों के जीवन में अनगिनत यादें छोड़ी हैं।

