Tuesday, July 7, 2026

चम्पत राय के इस्तीफे पर भड़का अखाड़ा परिषद, ट्रस्टियों के बयानों में साजिश की दुर्गन्ध

चम्पत राय

राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े घटनाक्रमों के बीच चम्पत राय के इस्तीफे ने संत समाज और रामभक्तों के भीतर गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी महाराज ने इस पर गहरा आक्रोश जताया है।

रविन्द्र पुरी महाराज ने चम्पत राय के पक्ष में रखी बात

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवीन्द्र पुरी जी महाराज ने कहा कि,

​”इस समय राम मंदिर का मुद्दा पूरे देश में गरम है। चोरी कोई और करता है, नाम बदनाम किसी और का हो जाता है, ये ऐसी परंपरा कुछ बनने जा रही है। चोरी ड्राइवर ने की या एक कर्मचारी ने की और नाम हमारे जो कलयुग के हनुमान जी हैं, चंपत राय जी महाराज हैं, उनका नाम बदनाम हो गया। और चंपत राय जी ऐसे व्यक्ति हैं कि मैं समझता हूं उच्च कोटि के संत हैं।”

रवीन्द्र पुरी जी महाराज ने कहा कि चोरी किसी ड्राइवर या कर्मचारी ने की, लेकिन नाम चम्पत राय जी महाराज का बदनाम हुआ। उन्होंने चम्पत राय को कलयुग का हनुमान बताते हुए कहा कि वे उच्च कोटि के संत पुरुष हैं।

दिनेंद्र दास महाराज के बयान से मामला और गंभीर

ट्रस्ट के ट्रस्टी पूज्य महंत दिनेंद्र दास जी महाराज के बयान ने इस पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि चम्पत राय जी से जबरदस्ती इस्तीफा लिया गया और वे स्वयं इस निर्णय के पक्ष में नहीं थे।

दिनेंद्र दास जी महाराज के इस बयान के बाद संत समाज में यह सवाल और गहरा गया है कि यदि ट्रस्ट के भीतर भी इस इस्तीफे पर पूर्ण सहमति नहीं थी, तो फिर इतने बड़े निर्णय तक बात कैसे पहुंची।

ट्रस्टी कमलनयन दास महाराज ने कहा कोई नहीं चाहता था चंपत राय का इस्तीफा

रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महान्त श्री नृत्यगोपालदासजी महाराज के शिष्य कमलनयन दास महाराज के बयान के बाद विवाद और गहरा हो गया।

इससे यह शक बढ़ गया कि चम्पत राय को बस इस्तीफा कांड में बलि का बकरा बनाया गया है। पर इससे मामला सुलझने वाला नहीं है। कमलनयन दास महाराज ने कहा कि,

​”ट्रस्ट के बैठक में आया चंपत जी का इस्तीफा। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का… अपने को जिम्मेदार समझते हुए इस्तीफा… लेकिन कोई ट्रस्टी तैयार नहीं था उनके इस्तीफे के लिए। ट्रस्ट के मुख्य… के. पाराशरण जी ने… जो मुख्य वकील हैं। उन्होंने कहा ट्रस्टी इस्तीफा देता है, कोई स्वीकार करे या न करे लेकिन उसका स्वीकार… इस्तीफा अपने आप स्वीकार हो जाता है। कार्यभार देखने के लिए कृष्ण मोहन जी को नियुक्त कर दिया गया है।”

― श्री कमल नयन दास जी महाराज

मीडिया ट्रायल ने चम्पत राय की छवि पर डाला असर

राम मंदिर से जुड़े इस मामले में लंबे समय तक मीडिया ट्रायल चलता रहा। कभी काकभुसुंडी जी महाराज की चोरी के आरोप लगे, तो कभी स्वर्ण से बनी रामचरितमानस को लेकर सवाल उठाए गए। इन आरोपों ने जनमानस में भ्रम फैलाया।

बाद में ट्रस्ट ने मीडिया के सामने वस्तुस्थिति रखी और बताया कि जिन बातों को लेकर सनसनी फैलाई गई, वे आरोप सही नहीं थे। इसके बावजूद किसी बड़े चैनल ने प्रमुखता से यह नहीं दिखाया कि चोरी से जुड़े कई आरोप असत्य निकले।

रामभक्तों को बदनाम करने की साजिश का आरोप

इस पूरे घटनाक्रम को चम्पत राय समर्थक एक बड़ी साजिश के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति को बदनाम करने का मामला नहीं है, बल्कि प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था और रामभक्तों की प्रतिष्ठा पर घात है।

समर्थकों का आरोप है कि मीडिया के एक हिस्से ने ऐसे संत व्यक्तित्व को कटघरे में खड़ा किया, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रीरामकाज में समर्पित कर दिया। मंदिर निर्माण, व्यवस्था और ट्रस्ट की संपत्ति के उपयोग को लेकर उनके योगदान को नजरअंदाज किया गया।

मंदिर निर्माण और व्यवस्था में चम्पत राय की भूमिका

चम्पत राय के समर्थकों का कहना है कि मंदिर निर्माण समय पर आगे बढ़ा, ट्रस्ट के खातों में जमा पूंजी का सदुपयोग हुआ और अयोध्या सहित आसपास के विकास की योजनाएं भी बनीं। इसके बावजूद उन्हें विवादों में घसीटा गया।

उनका मानना है कि कुछ लोगों को वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिला, कुछ को प्राण प्रतिष्ठा में न्योता नहीं मिला और कुछ को आगे की कुर्सी नहीं मिली। इसी नाराजगी ने बाद में चम्पत राय के खिलाफ वातावरण बनाने का काम किया।

व्यवस्था पर सवाल और चोरी की असली प्रकृति

कई लोगों ने आरोप लगाया कि व्यवस्थाएं चाक चौबंद नहीं थीं, लेकिन चम्पत राय समर्थकों का तर्क है कि जब चढ़ावा निकालने वाले, गिनती करने वाले, बैंक कर्मचारी और सीसीटीवी रूम से जुड़े लोग मिलकर गड़बड़ी करें, तो सारा दोष महामंत्री का कैसे हो जाएगा।

उनके अनुसार किसी भी प्रबंधक की वास्तविक जिम्मेदारी चोरी को पकड़ना और उस पर कार्रवाई कराना होती है। जब जानकारी मिली, सबूत सामने आए और कार्रवाई हुई, तब सच खुला। चम्पत राय ने स्वयं SIT जांच का आग्रह किया।

जिम्मेदारी का सवाल और इस्तीफे पर उठे तर्क

चम्पत राय समर्थकों का कहना है कि यदि किसी व्यवस्था में किसी कर्मचारी या अधिकारी की चोरी पर शीर्ष व्यक्ति से इस्तीफा मांगना नियम बना दिया जाए, तो फिर यही कसौटी हर संस्था और हर सरकार पर लागू होनी चाहिए।

उनका तर्क है कि देश में प्रधानमंत्री और प्रदेश में मुख्यमंत्री सर्वोच्च प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हैं। यदि कहीं कोई अधिकारी या कर्मचारी चोरी करते पकड़ा जाए, तो क्या हर बार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे। यही सवाल चम्पत राय के मामले में भी उठ रहा है।

अखाड़ा परिषद की नाराजगी से बढ़ा विवाद

अखाड़ा परिषद की नाराजगी ने साफ कर दिया है कि चम्पत राय के इस्तीफे को संत समाज हल्के में लेने के पक्ष में नहीं है। परिषद इसे राम मंदिर आंदोलन से जुड़े एक समर्पित व्यक्तित्व के सम्मान का प्रश्न मान रही है।

रवीन्द्र पुरी जी महाराज के बयान के बाद यह मामला केवल ट्रस्ट के अंदरूनी निर्णय तक सीमित नहीं रहा। अब यह रामभक्तों, संत समाज और उन सभी लोगों की भावना से जुड़ गया है, जो चम्पत राय को श्रीरामकाज का निष्ठावान सेवक मानते हैं।

चम्पत राय का षड्यंत्रों के विरुद्ध एक महासंग्राम

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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