VB-G RAM G लागू: देश में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम (VB-G RAM G Act) लागू कर दिया है।
इस कानून ने लगभग दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ली है।
सरकार का कहना है कि यह केवल रोजगार देने वाली योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने वाला व्यापक सुधार है।
वहीं विपक्ष इसे मनरेगा की मूल भावना से अलग कदम बताते हुए सवाल उठा रहा है।
100 नहीं, अब मिलेंगे 125 दिन का रोजगार
नए कानून का सबसे बड़ा बदलाव रोजगार की अवधि में वृद्धि है। मनरेगा के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती थी,
जबकि VB-G RAM G Act के तहत यह अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
इससे ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त 25 दिनों की मजदूरी का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी वार्षिक आय बढ़ने की उम्मीद है।
साथ ही यदि किसी पात्र व्यक्ति को समय पर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी बरकरार रखा गया है।
मजदूरी बढ़ने से बढ़ेगी ग्रामीण आय
सरकार ने नए कानून के साथ मजदूरी दरों में भी संशोधन किया है। राष्ट्रीय औसत दैनिक मजदूरी अब लगभग 327 रुपये निर्धारित की गई है,
जबकि विभिन्न राज्यों में यह 300 से 409 रुपये प्रतिदिन तक रहेगी।
इससे ग्रामीण मजदूरों की आमदनी में सीधा इजाफा होगा। सरकार का दावा है कि समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आधार-लिंक्ड डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर प्रणाली लागू की गई है, जिससे मजदूरी सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचेगी।
विकास कार्यों पर रहेगा विशेष फोकस
VB-G RAM G Act केवल अस्थायी रोजगार तक सीमित नहीं है। इसके तहत चार प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
इनमें जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का विकास, आजीविका बढ़ाने वाली परिसंपत्तियों का निर्माण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने वाले कार्य शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इससे गांवों में स्थायी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत बनेगी।
तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा।
बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी और आधार से जुड़े
प्रत्यक्ष भुगतान के माध्यम से फर्जी जॉब कार्ड, घोस्ट लाभार्थियों और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।
इससे सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने के साथ-साथ वास्तविक श्रमिकों को समय पर भुगतान मिल सकेगा।
किसानों की जरूरतों का भी रखा गया ध्यान
मनरेगा को लेकर लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही थी कि बुवाई और कटाई के मौसम में सरकारी कार्यों के कारण खेतों में मजदूरों की कमी हो जाती थी।
इस समस्या को ध्यान में रखते हुए नए कानून में प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकारें आवश्यकता पड़ने पर प्रमुख कृषि सीजन के दौरान योजना के कार्यों को सीमित अवधि के लिए स्थगित कर सकती हैं।
इससे किसानों को खेती के समय पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध हो सकेंगे और कृषि उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश को मिल सकता है बड़ा लाभ
उत्तर प्रदेश की अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए इस कानून का प्रभाव राज्य में व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
रोजगार की अवधि बढ़ने और न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि से लाखों ग्रामीण परिवारों की आय में सुधार होने की संभावना है।
वहीं बुंदेलखंड जैसे जल संकट वाले क्षेत्रों में तालाबों के पुनर्जीवन, चेक डैम निर्माण और वर्षा जल संचयन जैसी परियोजनाओं से जल संरक्षण को
नई मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा राज्य को मिलने वाले बड़े वित्तीय आवंटन से ग्रामीण विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
सफलता क्रियान्वयन पर निर्भर
हालांकि नए कानून को लेकर राजनीतिक मतभेद जारी हैं। विपक्ष का कहना है कि बजट आधारित व्यवस्था से भविष्य में रोजगार उपलब्ध कराने में चुनौतियां आ सकती हैं,
जबकि सरकार का दावा है कि पर्याप्त धनराशि पहले ही राज्यों को जारी की जा चुकी है और सभी चल रहे कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।
ऐसे में VB-G RAM G Act की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका क्रियान्वयन कितना प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाता है।
यदि सरकार अपने दावों पर खरी उतरती है तो यह कानून ग्रामीण भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

