अमेरिका ने इमिग्रेशन नीति को लेकर एक सख्त और दूरगामी कदम उठाया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान और रूस सहित कुल 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीजा की प्रक्रिया रोकने का फैसला किया है। यह नई व्यवस्था 21 जनवरी 2026 से लागू होगी और इसका सीधा असर लाखों संभावित प्रवासियों पर पड़ने वाला है।
क्यों लिया गया यह फैसला
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह कदम उन देशों से आने वाले प्रवासियों को लेकर उठाया गया है, जिनके नागरिक अमेरिका पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में सरकारी सहायता योजनाओं पर निर्भर हो जाते हैं। प्रशासन का मानना है कि इससे अमेरिकी करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और वेलफेयर सिस्टम का दुरुपयोग होता है।
विदेश विभाग ने साफ किया है कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि नए प्रवासी सार्वजनिक सहायता पर निर्भर नहीं होंगे, तब तक इन देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग पर रोक जारी रहेगी।
किन देशों पर पड़ा असर
इस फैसले की जद में एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व के कई देश आए हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान और रूस के अलावा सोमालिया, हैती, इरिट्रिया और अफगानिस्तान जैसे देश भी इस सूची में शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों से आने वाले आवेदकों के दस्तावेज़ों और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है।
पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका
इस लिस्ट में पाकिस्तान का नाम शामिल होना इस्लामाबाद के लिए खास तौर पर असहज करने वाला माना जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, जिन देशों को हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा गया है, उनमें पाकिस्तान का होना यह दर्शाता है कि अमेरिकी एजेंसियों को आज भी वहां के दस्तावेज़ी सिस्टम और आपराधिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन इस फैसले की घोषणा हुई, उसी दिन पाकिस्तान ने ट्रंप परिवार से जुड़ी एक क्रिप्टो कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसके बावजूद उसे किसी तरह की राहत नहीं मिली।
क्या आगे और सख्ती संभव है
फिलहाल यह रोक सिर्फ इमिग्रेंट वीजा तक सीमित है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के संकेत बताते हैं कि भविष्य में इन 75 देशों के लिए अन्य वीजा कैटेगरी पर भी कड़ी निगरानी रखी जा सकती है। इमिग्रेशन सिस्टम की व्यापक समीक्षा को ट्रंप प्रशासन अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर चुका है।
भारत क्यों रहा सूची से बाहर
जहां एक ओर कई देशों को झटका लगा है, वहीं भारत का नाम इस प्रतिबंध सूची में न होना नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्तों की मजबूती को दिखाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का मजबूत डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम, प्रभावी वेरिफिकेशन प्रक्रिया और अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों का पालन इसकी बड़ी वजह है।
इसके अलावा H-1B जैसी हाई-स्किल्ड वीजा कैटेगरी में भारतीय प्रोफेशनल्स की अहम भूमिका और अमेरिकी कॉन्सुलर एजेंसियों के साथ लंबे समय से चला आ रहा सहयोग भी भारत को इस फैसले से अलग रखने के कारणों में गिना जा रहा है।
भरोसे की राजनीति
कुल मिलाकर, 75 देशों पर इमिग्रेंट वीजा रोकने का फैसला ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति को दर्शाता है। वहीं, भारत का इस सूची से बाहर रहना अमेरिका की नजर में उसे एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करता है, जबकि पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह फैसला कूटनीतिक और छवि से जुड़ा बड़ा झटका माना जा रहा है।

