Sonia Gandhi Vande Mataram Controversy: देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था और इसी मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में भी तिरंगा फहराया गया।
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ध्वजारोहण किया। कार्यक्रम में सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
लेकिन समारोह खत्म होने के बाद एक वीडियो ने सियासी बहस को जन्म दे दिया।
दरअसल, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को लेकर दावा किया गया कि ‘वंदे मातरम’ के दौरान सोनिया गांधी ने इसे पूरा गाए जाने पर आपत्ति जताई और इसे रोकने का इशारा किया।
वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल खड़े किए कि आखिर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े राष्ट्रगीत को लेकर ऐसी आपत्ति क्यों जताई गई?
हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि इंदिरा भवन में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाया गया और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई।
उनके मुताबिक, वीडियो में सोनिया गांधी जिस बात का इशारा कर रही थीं, उसका राष्ट्रगीत को रोकने से कोई संबंध नहीं था।
जयराम रमेश ने सफाई देते हुए बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे काफी देर से खड़े थे।
Sonia Gandhi Vande Mataram Controversy: इसी वजह से सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी लाने की बात कह रही थीं। यानी कांग्रेस के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहा इशारा ‘वंदे मातरम’ को रोकने के लिए नहीं, बल्कि खरगे की सुविधा को लेकर था।
छह छंद गाए गए, कांग्रेस ने बताया पुराना जुड़ाव
Sonia Gandhi Vande Mataram Controversy: कांग्रेस नेता शकील अहमद ने भी पूरे विवाद पर पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में पहले से ‘वंदे मातरम’ के दो छंद गाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार छह छंदों का गायन हुआ।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ‘वंदे मातरम’ का कांग्रेस और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। आजादी की लड़ाई के दौर में कांग्रेस के कार्यक्रमों में भी इस गीत का इस्तेमाल होता रहा है।
यानी कांग्रेस का तर्क है कि जिस पार्टी का स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ से पुराना रिश्ता रहा हो, उसके कार्यक्रम में इसे रोकने का सवाल ही नहीं उठता।
लाल किले पर भी गूंजा ‘वंदे मातरम’
इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम’ को लेकर चर्चा सिर्फ कांग्रेस मुख्यालय तक सीमित नहीं रही।
लाल किले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्वजारोहण से पहले भी ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण के गायन ने लोगों का ध्यान खींचा।
‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण गीतों में से एक रहा है।
लंबे समय से राष्ट्रीय और सरकारी कार्यक्रमों में इसके चयनित छंदों का गायन किया जाता रहा है। ऐसे में इस बार इसके पूरे संस्करण के गायन ने भी इसे चर्चा के केंद्र में ला दिया।
वंदे मातरम’ पर अब कानून का भी शिकंजा
इसी बीच ‘वंदे मातरम’ को लेकर कानूनी स्थिति में भी बड़ा बदलाव हुआ है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद अगस्त 2026 में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026 लागू किया गया है।
नए प्रावधानों के तहत ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ की तरह कानूनी संरक्षण दिया गया है। इसके तहत जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालना या इसका अपमान करना दंडनीय माना जाएगा।
ऐसे में कांग्रेस मुख्यालय का यह वीडियो अब सिर्फ एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मामला नहीं रह गया है।
एक तरफ बीजेपी इसे कांग्रेस की सोच से जोड़कर सवाल उठा रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस साफ कह रही है कि ‘वंदे मातरम’ को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई।
फिलहाल वीडियो में सोनिया गांधी के इशारे का असल मतलब क्या था, इसे लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
लेकिन कांग्रेस की ओर से सफाई स्पष्ट है—पूरा ‘वंदे मातरम’ गाया गया था और इसे बीच में रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

