Saturday, August 15, 2026

First ATM in india: भारत में सबसे पहला ATM कब और कहां लगा था? जानिए इसकी दिलचस्प कहानी

First ATM in india: आज ATM हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। जरूरत पड़ने पर बैंक की शाखा में जाने या लंबी कतार में खड़े होने के बजाय हम कुछ ही मिनटों में ATM से नकद पैसे निकाल लेते हैं।

इसके अलावा बैलेंस चेक करने और कई दूसरी बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल भी ATM के जरिए किया जा सकता है,

लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ATM की शुरुआत कब हुई थी और देश में सबसे पहली ATM मशीन किस शहर में लगाई गई थी?

आज डिजिटल पेमेंट और UPI के दौर में ATM भले ही पहले जितना इस्तेमाल न होता हो, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब ATM भारत में बैंकिंग व्यवस्था के लिए बिल्कुल नई और आधुनिक सुविधा मानी जाती थी।

आइए जानते हैं भारत में ATM की शुरुआत से जुड़ी खास बातें।

ATM क्या होता है?

ATM का पूरा नाम Automated Teller Machine है। इसे हिंदी में स्वचालित टेलर मशीन कहा जाता है।

यह एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसकी मदद से ग्राहक बैंक की शाखा में जाए बिना अपने खाते से पैसे निकाल सकते हैं।

ATM का इस्तेमाल करने के लिए आमतौर पर बैंक द्वारा जारी कार्ड और उसका PIN जरूरी होता है।

कार्ड डालने और PIN दर्ज करने के बाद ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार रकम निकाल सकता है। समय के साथ ATM की सुविधाएं भी बढ़ती गईं।

अब कई ATM में नकद निकासी के अलावा बैलेंस चेक करने और मिनी स्टेटमेंट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं।

भारत में सबसे पहला ATM कहां लगा था?

भारत में ATM की शुरुआत 1987 में मुंबई से हुई थी। देश की पहली ATM मशीन HSBC (Hongkong and Shanghai Banking Corporation) ने मुंबई में अपनी शाखा में स्थापित की थी।

उस समय ATM भारत के लिए एक बिल्कुल नई तकनीक थी। बैंक के कर्मचारियों की मदद के बिना मशीन से पैसे निकालना लोगों के लिए काफी अलग अनुभव था।

धीरे-धीरे इस तकनीक ने लोगों का ध्यान खींचा और दूसरे बैंकों ने भी ATM जैसी सुविधाओं को अपनाना शुरू किया।

मुंबई से शुरू हुई ATM की यह सुविधा आगे चलकर देश के अलग-अलग शहरों और कस्बों तक पहुंची। इससे बैंकिंग सेवाओं को लेकर लोगों की आदतों में भी बड़ा बदलाव आया।

ATM से पहले कैसी थी बैंकिंग व्यवस्था?

आज के समय में पैसे निकालना बेहद आसान है, लेकिन कुछ दशक पहले बैंकिंग का तरीका काफी अलग था।

अगर किसी व्यक्ति को अपने बैंक खाते से नकद रकम निकालनी होती थी तो उसे बैंक की शाखा में जाना पड़ता था।

बैंक में पहुंचने के बाद ग्राहक को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती थी और कई बार लंबी कतार में भी इंतजार करना पड़ता था।

बैंक के कामकाज के समय पर भी ग्राहकों को निर्भर रहना पड़ता था। छुट्टी या बैंक बंद होने के बाद नकद पैसे निकालना आसान नहीं था।

ऐसे समय में ATM का आना बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना गया। ATM की मदद से ग्राहकों को हर छोटी जरूरत के लिए बैंक की शाखा पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।

समय के साथ बदलता गया ATM

शुरुआत में ATM का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को नकद पैसे निकालने की सुविधा देना था। लेकिन तकनीक के विकास के साथ ATM में कई नई सुविधाएं जुड़ती गईं।

आज कई ATM के जरिए ग्राहक खाते में उपलब्ध बैलेंस देख सकते हैं और मिनी स्टेटमेंट भी निकाल सकते हैं।

कुछ मशीनों में दूसरी बैंकिंग सेवाएं भी उपलब्ध होती हैं। हालांकि, UPI,

मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल ने नकद लेन-देन की जरूरत को काफी हद तक कम किया है।

फिर भी ऐसी जगहों या परिस्थितियों में जहां डिजिटल पेमेंट संभव नहीं होता, ATM आज भी लोगों के लिए उपयोगी साबित होता है।

मुंबई से शुरू हुई एक बड़ी बैंकिंग क्रांति

भारत में ATM की शुरुआत मुंबई से होना देश के बैंकिंग इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

1987 में शुरू हुई यह सुविधा धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गई और लोगों के लिए बैंकिंग को पहले के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक बनाने में मदद मिली।

आज भले ही मोबाइल फोन से कुछ सेकंड में पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं, लेकिन ATM ने भारत में आधुनिक और सुविधाजनक बैंकिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखा था।

मुंबई से शुरू हुआ यह सफर आज देश की बैंकिंग व्यवस्था का एक जाना-पहचाना हिस्सा बन चुका है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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