Snakes In Monsoon: मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई तरह की चुनौतियां भी लेकर आता है। लगातार बारिश होने पर खेत, झाड़ियां, नालियां और सांपों के बिलों में पानी भर जाता है।
ऐसे में सांप अपने सुरक्षित ठिकानों से बाहर निकलकर सूखी जगहों की तलाश करने लगते हैं।
यही कारण है कि बारिश के दिनों में घरों, बगीचों, स्टोर रूम, सीढ़ियों के नीचे, गैरेज और नालियों के आसपास सांप दिखाई देने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के दौरान चूहे, मेंढक और छिपकलियां भी घरों के आसपास अधिक दिखाई देते हैं।
ये कई सांपों का प्रमुख भोजन होते हैं, इसलिए भोजन की तलाश में भी सांप आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं।
ऐसे में थोड़ी-सी सावधानी बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है।
कॉमन करैत से रहें सबसे ज्यादा सतर्क
मानसून में दिखाई देने वाले सबसे खतरनाक सांपों में कॉमन करैत का नाम प्रमुख है।
यह मुख्य रूप से रात के समय सक्रिय रहता है और अंधेरी, शांत व ठंडी जगहों में छिपना पसंद करता है।
कई बार यह घर के कोनों, स्टोर रूम, लकड़ी के ढेर या पुराने सामान के बीच भी छिप सकता है।
कॉमन करैत का जहर बेहद शक्तिशाली होता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके काटने पर शुरुआती समय में दर्द या सूजन बहुत कम महसूस होती है, जिससे कई लोग खतरे को समझ नहीं पाते,
लेकिन कुछ समय बाद इसका जहर शरीर के नर्वस सिस्टम पर असर डाल सकता है, जिससे सांस लेने में परेशानी,
मांसपेशियों में कमजोरी और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए रात में बिना टॉर्च या पर्याप्त रोशनी के घर के किसी अंधेरे हिस्से में जाने से बचना चाहिए।
इंडियन कोबरा भी बारिश में घरों तक पहुंच सकता है
इंडियन कोबरा भारत के सबसे प्रसिद्ध जहरीले सांपों में से एक है। बारिश के मौसम में जब इसके प्राकृतिक ठिकानों में पानी भर जाता है,
तब यह सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलता है। खेतों, बगीचों, खुले मैदानों और गांवों के आसपास इसके दिखाई देने की संभावना बढ़ जाती है।
कोबरा का जहर भी नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
यदि घर के आसपास चूहों की संख्या अधिक है, तो कोबरा सहित अन्य सांपों के आने की संभावना भी बढ़ जाती है, क्योंकि चूहे उनका प्रमुख भोजन हैं।
रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर भी हैं खतरनाक
मानसून के दौरान रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे जहरीले सांपों से भी सावधान रहने की जरूरत होती है।
रसेल वाइपर अक्सर खेतों, घास वाले इलाकों और झाड़ियों में पाया जाता है। इसका शरीर मोटा होता है और पीठ पर गहरे रंग के अंडाकार निशान इसकी पहचान माने जाते हैं।
इसका जहर खून के थक्के बनने की प्रक्रिया और शरीर के ऊतकों को प्रभावित कर सकता है। वहीं सॉ-स्केल्ड वाइपर आकार में छोटा होने के बावजूद बेहद आक्रामक माना जाता है।
यह सूखी झाड़ियों, पत्थरों और खेतों के आसपास छिपा मिल सकता है। इन दोनों सांपों के काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
बारिश के मौसम में कैसे करें बचाव?
सांपों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि घर और उसके आसपास साफ-सफाई बनाए रखें।
झाड़ियां, घास और बेकार पड़ा सामान समय-समय पर हटाते रहें। घर में चूहों की संख्या कम रखने की कोशिश करें, क्योंकि यही सांपों को आकर्षित करते हैं।
रात के समय बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का इस्तेमाल करें। यदि घर के बाहर पानी जमा हो रहा है, तो उसकी निकासी की व्यवस्था करें।
दरवाजों और खिड़कियों के नीचे मौजूद बड़े गैप को बंद करें ताकि सांप आसानी से अंदर प्रवेश न कर सकें।
लकड़ी, ईंट या कबाड़ का ढेर घर के बिल्कुल पास न रखें।
अगर घर में सांप दिखाई दे तो क्या करें?
यदि घर में सांप दिखाई दे, तो घबराने या उसे मारने की कोशिश बिल्कुल न करें।
सुरक्षित दूरी बनाए रखें और परिवार के अन्य सदस्यों को भी उस जगह से दूर रखें। स्थानीय वन विभाग, रेस्क्यू टीम या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू विशेषज्ञ को तुरंत सूचना दें।
बिना अनुभव के सांप को पकड़ने की कोशिश करना जानलेवा साबित हो सकता है।
सांप काट ले तो तुरंत क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो सबसे पहले उसे शांत रखें और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। प्रभावित अंग को ज्यादा हिलाने-डुलाने से बचें।
घाव को काटना, जहर चूसने की कोशिश करना, बर्फ लगाना या कसकर कपड़ा बांधना जैसे घरेलू उपाय नुकसान पहुंचा सकते हैं।
केवल प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा दिया गया एंटी-स्नेक वेनम (ASV) ही प्रभावी उपचार माना जाता है।

