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नौकरी बाजार बदल रहा है, युवाओं को नई तैयारी करनी होगी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेज विस्तार ने दुनिया भर के रोजगार बाजार की दिशा बदलनी शुरू कर दी है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का मानना है कि आने वाले समय में केवल पारंपरिक डिग्रियां सफलता की गारंटी नहीं रहेंगी।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने युवाओं को ट्रेड स्किल्स और मानव केंद्रित पेशों की तरफ गंभीरता से देखने की सलाह दी है। उनके अनुसार भविष्य की नौकरियों में वही लोग आगे बढ़ेंगे, जिनके पास तकनीकी समझ के साथ व्यावहारिक अनुभव और मानवीय कौशल भी मौजूद होंगे।
सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस और MBA पर बदल रही सोच
लंबे समय तक सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस और MBA जैसी डिग्रियों को बेहतर करियर की मजबूत चाबी माना जाता रहा है। लेकिन अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता कई पारंपरिक कामों को तेजी से अपने दायरे में ले रही है, जिससे रोजगार का स्वरूप बदल रहा है।
नागेश्वरन ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इसका सीधा असर रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में युवाओं को भविष्य की जरूरतों को समझते हुए अपने कौशल को नए क्षेत्रों के अनुसार विकसित करना होगा।
AI के कारण पारंपरिक डिग्रियों की अहमियत घट रही है
मुख्य आर्थिक सलाहकार का संकेत साफ है कि अब केवल डिग्री लेकर करियर सुरक्षित मान लेना सही नहीं होगा। AI के कारण कई ऐसे काम बदल रहे हैं, जिनके लिए पहले बड़े पैमाने पर डिग्रीधारियों की जरूरत महसूस होती थी।
उन्होंने युवाओं को समझाया कि भविष्य में नौकरी पाने और टिके रहने के लिए व्यावहारिक कौशल, संवाद क्षमता, समस्या समाधान और मानवीय समझ जैसे गुण जरूरी होंगे। आने वाले वर्षों में मशीनों से अलग पहचान बनाने वाले कौशल अधिक महत्व हासिल करेंगे।
ट्रेड स्किल्स को सम्मान देने की जरूरत
नागेश्वरन ने भारत में ट्रेड स्किल्स वाले पेशों को कम सम्मान मिलने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वेल्डर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, बढ़ई और दूसरे तकनीकी काम करने वाले लोग किसी भी अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव होते हैं।
स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों में व्यावसायिक कौशल रखने वाले लोगों को काफी सम्मान दिया जाता है। भारत में भी इस सोच को बदलने की जरूरत है।
युवा ट्रेड स्किल्स को करियर विकल्प मानें
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार भारत में युवाओं को इन तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों को केवल मजबूरी का काम नहीं मानना चाहिए। सही प्रशिक्षण और सामाजिक सम्मान के साथ ये क्षेत्र मजबूत करियर विकल्प बन सकते हैं और रोजगार के बड़े अवसर दे सकते हैं।
उनका मानना है कि जब तक समाज ट्रेड स्किल्स को उचित प्रतिष्ठा नहीं देगा, तब तक बड़ी संख्या में युवा इन क्षेत्रों की तरफ प्रेरित नहीं होंगे। इसलिए शिक्षा और रोजगार की सोच में व्यावहारिक हुनर को केंद्र में लाना जरूरी है।
AI हर पेशे की जगह नहीं ले सकता
नागेश्वरन ने बताया कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मानवीय संवेदनाएं और व्यक्तिगत संपर्क सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। बुजुर्गों की देखभाल, विशेष जरूरतों वाले बच्चों की काउंसलिंग और अस्पतालों में सहायक सेवाएं ऐसे ही महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
उन्होंने खेल शिक्षा, खाना बनाने की कला और अन्य सेवा क्षेत्रों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार AI कई तकनीकी कामों को आसान बना सकता है, लेकिन जिन पेशों में इंसानी उपस्थिति और संवेदनशील संपर्क जरूरी है, वहां उसकी सीमाएं बनी रहेंगी।
मानवीय स्पर्श वाले पेशों में मांग बढ़ सकती है
मुख्य आर्थिक सलाहकार का कहना है कि AI के बढ़ते प्रभाव के बावजूद ऐसे पेशों में प्रशिक्षित और योग्य लोगों की मांग भविष्य में बढ़ सकती है। जिन कामों में भरोसा, देखभाल, भावनात्मक समझ और प्रत्यक्ष मानवीय संपर्क जरूरी है, वे क्षेत्र महत्वपूर्ण रहेंगे।
उनके अनुसार युवाओं को यह समझना होगा कि भविष्य केवल कंप्यूटर स्क्रीन पर होने वाले कामों तक सीमित नहीं रहेगा। स्वास्थ्य, देखभाल, सेवा, खेल, भोजन और व्यक्तिगत सहायता जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार की मजबूत संभावनाएं बनेंगी।
बेरोजगारी के साथ रोजगारयोग्यता भी बड़ी चुनौती
नागेश्वरन ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश के सामने केवल बेरोजगारी की चुनौती नहीं है। रोजगारयोग्यता यानी लोगों को काम के लिए तैयार करना भी उतनी ही बड़ी चुनौती है, क्योंकि नौकरी तभी टिकाऊ बनेगी जब व्यक्ति उसके योग्य कौशल रखेगा।
उनके अनुसार केवल नौकरियां पैदा करना पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं को उन नौकरियों के लिए जरूरी प्रशिक्षण और क्षमता भी देनी होगी। बदलती अर्थव्यवस्था में कौशल विकास को रोजगार नीति के केंद्र में रखना आवश्यक हो गया है।
पूंजी आधारित अर्थव्यवस्था में कम रोजगार की चुनौती
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था अधिक पूंजी आधारित होती जा रही है। कई उद्योग बड़े निवेश और आधुनिक तकनीक पर चलते हैं, लेकिन उनमें कम लोगों को रोजगार मिलता है, जिससे रोजगार निर्माण की चुनौती और जटिल बनती है।
इसी कारण उन्होंने श्रम प्रधान उद्योगों और सेवाओं के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। भारत जैसे विशाल युवा आबादी वाले देश में ऐसे क्षेत्रों को बढ़ाना जरूरी है, जो बड़े पैमाने पर लोगों को काम दे सकें।
मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत करने की सलाह
नागेश्वरन ने भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता मजबूत करने की सलाह भी दी। उनका मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले जैसी खुली नहीं रह गई है और कई देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
ऐसे माहौल में भारत को भी कई उत्पाद खुद बनाने होंगे। इससे घरेलू उत्पादन मजबूत होगा और देश बाहरी निर्भरता को कम कर सकेगा। विनिर्माण क्षेत्र में सही रणनीति रोजगार और आर्थिक विकास दोनों के लिए उपयोगी हो सकती है।
सेवा और श्रम प्रधान क्षेत्रों में बड़े अवसर
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग के साथ श्रम प्रधान उद्योगों और सेवा क्षेत्रों में भी बड़ी संभावनाएं हैं। यदि इन क्षेत्रों में सही प्रशिक्षण, कौशल विकास और नीति समर्थन दिया जाए, तो लाखों युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
इन क्षेत्रों का विस्तार केवल रोजगार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी। प्रशिक्षित कामगार, बेहतर सेवाएं और मजबूत उत्पादन व्यवस्था भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को मजबूत कर सकती है।
भविष्य की सफलता का नया फॉर्मूला
नागेश्वरन का संदेश साफ है कि आने वाले वर्षों में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं को व्यावहारिक कौशल, संवाद क्षमता, समस्या समाधान, टीमवर्क और मानवीय समझ जैसे गुणों पर भी लगातार काम करना होगा।
उनके अनुसार वैश्वीकरण के दौर में सॉफ्टवेयर और MBA शिक्षा ने भारत को बड़ा लाभ दिया था, लेकिन अब समय बदल रहा है। AI के प्रभाव के बीच वही लोग अधिक अवसर पाएंगे, जिनके कौशल मशीनें आसानी से नहीं दोहरा सकतीं।
ट्रेड स्किल्स और सॉफ्ट स्किल्स आज की जरूरत
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने युवाओं को भविष्य की तैयारी के लिए ट्रेड स्किल्स और सॉफ्ट स्किल्स अपनाने की सलाह दी है। उनका मानना है कि तकनीकी डिग्री के साथ व्यावहारिक दक्षता और मानवीय समझ करियर की असली ताकत बनेगी।
इस बदलते दौर में रोजगार की दिशा केवल पारंपरिक डिग्रियों से तय नहीं होगी। युवाओं को ऐसे क्षेत्रों की ओर बढ़ना होगा, जहां कौशल, अनुभव, संवेदना और उपयोगी सेवा क्षमता मिलकर भविष्य के अवसर तैयार करें।

